रावलपिंडी।पाकिस्तान के सेना प्रमुख (COAS) जनरल आसिम मुनीर की बेटी महनूर की शादी 26 दिसंबर को उनके फर्स्ट कजिन अब्दुल रहमान के साथ संपन्न हुई। यह विवाह समारोह रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान आर्मी के जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में बेहद निजी और सीमित मेहमानों की मौजूदगी में आयोजित किया गया। सूत्रों के मुताबिक, विवाह समारोह को पूरी तरह से प्राइवेट रखा गया, जिसमें परिवार के करीबी सदस्य और चुनिंदा लोग ही शामिल हुए। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच रस्में पूरी की गईं। सार्वजनिक या राजनीतिक हस्तियों की व्यापक मौजूदगी की कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि दूल्हा अब्दुल रहमान जनरल आसिम मुनीर के भाई के बेटे हैं, यानी यह शादी पारिवारिक रिश्तों के दायरे में हुई। पाकिस्तान में ऐसे विवाह सामाजिक रूप से स्वीकार्य माने जाते हैं और कई परिवारों में यह परंपरा रही है। हालांकि, इस विवाह को लेकर न तो इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) और न ही सेना की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है। इसके बावजूद, यह खबर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग सेना प्रमुख के पारिवारिक आयोजन को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। गौरतलब है कि जनरल आसिम मुनीर मौजूदा समय में पाकिस्तान की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके परिवार से जुड़ी किसी भी निजी घटना पर देश-विदेश की नजरें टिकी रहती हैं।
“बंगाल में घुसपैठ और कुशासन का अंत तय, दो-तिहाई बहुमत से बनेगी बीजेपी सरकार” — अमित शाह का ममता सरकार पर बड़ा हमला
कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर राज्य में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने घुसपैठ, गरीबी, भ्रष्टाचार और कुशासन जैसे मुद्दों को लेकर तृणमूल कांग्रेस सरकार को घेरा और दावा किया कि आने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दो-तिहाई बहुमत के साथ राज्य में सरकार बनाएगी। अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल आज कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है, जिनकी जड़ में राज्य की मौजूदा सरकार की नीतियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में अवैध घुसपैठ लगातार बढ़ रही है, जिससे राज्य की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने पर खतरा पैदा हो गया है। गृह मंत्री ने कहा, “बंगाल की सीमाएं असुरक्षित हैं। घुसपैठ को लेकर ममता सरकार आंख मूंदे बैठी है, जबकि इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।” गरीबी और विकास के मुद्दे पर सरकार को घेरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने राज्य में फैली गरीबी और बेरोजगारी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को बंगाल सरकार ने राजनीतिक कारणों से सही तरीके से लागू नहीं किया, जिससे गरीब, किसान और मजदूर वर्ग को उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि “ममता सरकार ने केंद्र की योजनाओं पर अपना नाम चिपकाने की राजनीति की, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जनता तक लाभ नहीं पहुंचाया।” कुशासन और भ्रष्टाचार के आरोप गृह मंत्री ने बंगाल सरकार पर कुशासन और भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले और अन्य मामलों का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि तृणमूल सरकार ने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। बीजेपी के वादे और चुनावी दावा अमित शाह ने भरोसा जताया कि बंगाल की जनता इस बार बदलाव के मूड में है। उन्होंने कहा, “आने वाले विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की जनता तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार और भय की राजनीति को खत्म करेगी। बीजेपी दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी और राज्य में विकास, सुरक्षा और सुशासन का नया अध्याय शुरू होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की सरकार बनने पर राज्य में बिना भेदभाव के विकास होगा, सीमाओं की सुरक्षा मजबूत की जाएगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शाह का आक्रामक रुख यह साफ संकेत देता है कि आगामी विधानसभा चुनावों में बंगाल राजनीतिक रूप से बेहद गर्म रहने वाला है, जहां बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी और कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।
प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा ने सात साल की प्रेम कहानी के बाद अवीवा बेग से की सगाई
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और उद्योगपति रॉबर्ट वाड्रा के परिवार में खुशियों का माहौल है। उनके बेटे रेहान वाड्रा ने अपनी लंबे समय से प्रेमिका अवीवा बेग से सगाई कर ली है। सात साल के रिश्ते के बाद दोनों ने अपने संबंधों को औपचारिक रूप देते हुए जीवन की नई शुरुआत की ओर कदम बढ़ाया है। सूत्रों के अनुसार, 25 वर्षीय रेहान वाड्रा ने हाल ही में अवीवा बेग को शादी का प्रस्ताव दिया, जिसे अवीवा ने खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। इस खास मौके पर दोनों परिवारों की सहमति और आशीर्वाद के साथ रिश्ते को आधिकारिक रूप से मंजूरी दी गई। सात साल की मजबूत लव स्टोरी रेहान और अवीवा की मुलाकात कई वर्ष पहले हुई थी। दोस्ती से शुरू हुआ यह रिश्ता समय के साथ प्यार और विश्वास में बदल गया। दोनों की रुचियां—खासतौर पर फोटोग्राफी और कला—ने उन्हें और करीब लाने का काम किया। निजी और पेशेवर जीवन में एक-दूसरे का साथ निभाते हुए दोनों ने अपने रिश्ते को मजबूती दी। सादगी भरा, निजी सगाई समारोह सगाई की रस्म को पूरी तरह पारिवारिक और निजी रखा गया। समारोह में केवल करीबी रिश्तेदार और चुनिंदा लोग ही शामिल हुए। इस दौरान रेहान ने अवीवा को अंगूठी पहनाई और दोनों ने इस खास पल को सादगी और आत्मीयता के साथ साझा किया। परिवार के सदस्यों ने नवयुगल को शुभकामनाएं दीं। अब शादी की तैयारियां शुरू सगाई के बाद अब दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुट गए हैं। सूत्रों की मानें तो शादी समारोह राजस्थान में आयोजित किया जा सकता है। हालांकि, शादी की तारीख को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जल्द ही तारीख सामने आने की संभावना है। कौन हैं रेहान वाड्रा और अवीवा बेग रेहान वाड्रा प्रियंका गांधी वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा के बेटे हैं। उनका झुकाव राजनीति से अधिक कला और फोटोग्राफी की ओर रहा है। वे अपने फोटोग्राफी प्रोजेक्ट्स और कला प्रदर्शनियों के लिए जाने जाते हैं। अवीवा बेग दिल्ली स्थित फोटोग्राफर और क्रिएटिव प्रोफेशनल हैं। उन्होंने अपने रचनात्मक काम के दम पर कला जगत में अलग पहचान बनाई है। गांधी–वाड्रा परिवार में इस सगाई के साथ ही उत्सव और खुशियों का सिलसिला शुरू हो गया है, और अब सभी को इस शाही शादी के ऐलान का इंतजार है।
‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की नई सियासत: ममता बनर्जी का मंदिर कार्ड, बीजेपी की पिच पर ही चुनौती क्यों?
कोलकाता/सिलीगुड़ी।भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को पश्चिम बंगाल में रोकने का दम भरने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर बनवाने के ऐलान के बाद राजनीतिक विश्लेषक इसे ममता की बदली हुई रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। इससे पहले दीघा में जगन्नाथ मंदिर निर्माण की घोषणा भी इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। सवाल यह है कि जो ममता अब तक खुद को धर्मनिरपेक्ष राजनीति की प्रतीक बताती रही हैं, वे मंदिर निर्माण जैसे कदम क्यों उठा रही हैं—और क्या यह वाकई बीजेपी की पिच पर जाकर उसे मात देने की कोशिश है? मंदिर राजनीति का मकसद क्या है? पश्चिम बंगाल में बीजेपी लंबे समय से हिंदुत्व को चुनावी मुद्दा बनाती रही है। राम नवमी, दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के जरिए उसने अपना आधार मजबूत करने की कोशिश की है। ऐसे में ममता बनर्जी का मंदिरों का ऐलान बीजेपी के ‘हिंदुत्व एजेंडे’ को काटने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। ममता यह संदेश देना चाहती हैं कि धर्म पर किसी एक पार्टी का एकाधिकार नहीं है और तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी आस्था का सम्मान करती है—बिना उसे राजनीति का हथियार बनाए। उत्तर बंगाल पर फोकस क्यों? सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल का इलाका राजनीतिक रूप से बेहद अहम है। यहां बीजेपी का प्रभाव बीते वर्षों में बढ़ा है। महाकाल मंदिर का ऐलान सीधे तौर पर उत्तर बंगाल के हिंदू मतदाताओं को साधने की कोशिश माना जा रहा है। ममता जानती हैं कि यदि इस क्षेत्र में बीजेपी की बढ़त रोकी गई, तो राज्य की राजनीति में संतुलन उनके पक्ष में रह सकता है। ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ बनाम ‘हार्ड हिंदुत्व’ राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक ममता बनर्जी ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की राह पर चल रही हैं—जहां धार्मिक आस्था को सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, न कि विभाजनकारी राजनीति के तौर पर। बीजेपी का हिंदुत्व जहां आक्रामक और वैचारिक माना जाता है, वहीं ममता का मॉडल समावेशी और लोक-परंपराओं से जुड़ा दिखाने की कोशिश है। यही फर्क दिखाकर वह हिंदू मतदाताओं को यह भरोसा दिलाना चाहती हैं कि TMC भी उनकी आस्था का सम्मान करती है। बीजेपी की धार कुंद करने की कोशिश ममता के इन कदमों से बीजेपी के उस नैरेटिव को चुनौती मिलती है, जिसमें वह खुद को हिंदू हितों की एकमात्र प्रतिनिधि बताती है। मंदिर निर्माण जैसे फैसलों से बीजेपी के चुनावी हथियारों की धार कुंद हो सकती है, क्योंकि तब धार्मिक मुद्दों पर उसका एकाधिकार टूटता दिखेगा। विपक्ष का आरोप और सियासी जोखिम हालांकि विपक्ष इसे ‘चुनावी हिंदुत्व’ करार दे रहा है। बीजेपी का कहना है कि ममता अवसरवादी राजनीति कर रही हैं। वहीं वाम दल और कांग्रेस इसे धर्मनिरपेक्षता से समझौता मानते हैं। ममता के लिए यह रणनीति दोधारी तलवार भी है—अगर वह ज्यादा आगे बढ़ती हैं, तो अल्पसंख्यक वोट बैंक में असंतोष का खतरा हो सकता है; और कम करती हैं, तो बीजेपी को मौका मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: उन्नाव रेप केस में कुलदीप सेंगर की जमानत पर ब्रेक, हाईकोर्ट के आदेश पर रोक
नई दिल्ली। उन्नाव दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत के आदेश पर रोक लगा दी है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला सुनाया। क्या है मामला उन्नाव दुष्कर्म कांड देश के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में से एक रहा है। इस मामले में कुलदीप सेंगर को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए ट्रायल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पीड़िता के साथ हुए अन्याय, उसके परिवार पर हमलों और मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना था। हाईकोर्ट से मिली थी जमानत दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में सेंगर को स्वास्थ्य आधार सहित कुछ तथ्यों को ध्यान में रखते हुए जमानत दी थी। इस फैसले के बाद पीड़िता पक्ष और जांच एजेंसी ने कड़ा विरोध जताया था। सीबीआई का तर्क था कि मामला अत्यंत गंभीर है और जमानत से न्याय प्रक्रिया व पीड़िता की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर तत्काल रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता और पूर्व में दर्ज तथ्यों को देखते हुए इस पर विस्तार से सुनवाई जरूरी है। फिलहाल सेंगर को जेल में ही रहना होगा। अगली सुनवाई पर टिकी नजर अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि जमानत आदेश को रद्द किया जाए या किसी अन्य आधार पर आगे का फैसला लिया जाए। इस फैसले को महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट के इस कदम के बाद महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संतोष जताया है। उनका कहना है कि यह फैसला न्याय में जनता का भरोसा मजबूत करता है और ऐसे मामलों में सख्ती का संदेश देता है।
DTC बसों में मुफ्त सफर के नियम बदलेंगे: 2026 से पिंक टिकट की जगह ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’, आधार होगा अनिवार्य
दिल्ली में महिलाओं को दी जा रही मुफ्त बस यात्रा योजना में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और क्लस्टर बसों में अब पिंक टिकट की जगह 2026 से ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ लागू किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से न केवल यात्रा व्यवस्था अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि फ्री यात्रा के नाम पर हो रहे दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी। क्या है पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड एक डिजिटल कार्ड होगा, जिसके जरिए महिलाएं DTC और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। अभी महिलाओं को कंडक्टर से पिंक टिकट लेकर सफर करना होता है, लेकिन नई व्यवस्था में कार्ड को बस में लगे इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर टैप करना होगा। आधार कार्ड होगा जरूरी इस स्मार्ट कार्ड को बनवाने के लिए दिल्ली का आधार कार्ड अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि आधार से लिंक होने के कारण यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि योजना का लाभ केवल दिल्ली की पात्र महिलाओं को ही मिले। इससे बाहरी लोगों द्वारा योजना के गलत इस्तेमाल को रोका जा सकेगा। 2026 में लॉन्च होंगे तीन नए स्मार्ट कार्ड परिवहन विभाग के अनुसार, 2026 में कुल तीन नए स्मार्ट कार्ड लॉन्च किए जाएंगे— * महिलाओं के लिए पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड * छात्रों के लिए अलग स्मार्ट कार्ड * आम यात्रियों के लिए जनरल स्मार्ट कार्ड इन सभी कार्डों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा, जिससे बस यात्रा को पूरी तरह कैशलेस और स्मार्ट बनाया जा सके। महिलाओं को मिलेगी खास सुविधा नई व्यवस्था के तहत महिलाओं को बार-बार टिकट लेने की जरूरत नहीं होगी। कार्ड के जरिए यात्रा का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। इससे बस में चढ़ने के दौरान समय की बचत होगी और भीड़भाड़ के समय कंडक्टर से टिकट लेने की झंझट खत्म हो जाएगी। सरकार का क्या कहना है सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम महिला सशक्तिकरण और डिजिटल इंडिया की दिशा में बड़ा प्रयास है। स्मार्ट कार्ड से यह भी पता चल सकेगा कि कितनी महिलाएं रोजाना योजना का लाभ ले रही हैं, जिससे भविष्य की परिवहन नीतियों को बेहतर बनाया जा सकेगा। कब से होगा लागू फिलहाल यह योजना तैयारी के चरण में है। सरकार का लक्ष्य है कि 2026 से पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड पूरी तरह लागू कर दिया जाए और धीरे-धीरे पिंक टिकट प्रणाली को बंद कर दिया जाए। कुल मिलाकर, दिल्ली की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा अब और भी आसान, सुरक्षित और पारदर्शी होने जा रही है, लेकिन इसके लिए आधार से जुड़ी डिजिटल पहचान जरूरी होगी।
अरावली पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: नई परिभाषा पर स्वतः संज्ञान, CJI की अगुवाई में 3 जजों की पीठ आज करेगी सुनवाई
नई दिल्ली। देश की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली रेंज को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक बार फिर मामले की सुनवाई करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ सोमवार को इस अहम मुद्दे पर सुनवाई करेगी। अदालत की यह पहल ऐसे समय में आई है, जब पर्यावरणविद और सामाजिक संगठन अरावली की प्रस्तावित नई परिभाषा को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। दरअसल, विवाद अरावली रेंज की उस नई परिभाषा को लेकर है, जिसमें 100 मीटर की ऊंचाई के मानदंड को आधार बनाया गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस मानक को लागू किया गया, तो अरावली के बड़े हिस्से को ‘पर्वतीय क्षेत्र’ की श्रेणी से बाहर कर दिया जाएगा। इससे उन इलाकों में खनन, निर्माण और औद्योगिक गतिविधियों का रास्ता साफ हो सकता है, जो अब तक संरक्षित माने जाते रहे हैं। पर्यावरणविदों की चिंता पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क है कि अरावली सिर्फ पहाड़ियों का समूह नहीं, बल्कि उत्तर भारत की पर्यावरणीय रीढ़ है। यह दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में भूजल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और मरुस्थलीकरण रोकने में अहम भूमिका निभाती है। नई परिभाषा लागू होने से न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि भविष्य में जल संकट और प्रदूषण की समस्या भी गंभीर हो सकती है। पहले भी हो चुकी है सुनवाई अरावली से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट पहले भी सख्त रुख अपनाता रहा है। अदालत पूर्व में अवैध खनन और पर्यावरणीय नुकसान पर कड़ी टिप्पणियां कर चुकी है। ऐसे में मौजूदा स्वतः संज्ञान को विशेषज्ञ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम मान रहे हैं। आज की सुनवाई पर टिकी निगाहें सोमवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि * नई परिभाषा पर्यावरणीय दृष्टि से कितनी उचित है, * क्या 100 मीटर ऊंचाई का मानदंड वैज्ञानिक आधार पर सही है, * और क्या इससे अरावली के संरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। देशभर की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला न सिर्फ अरावली रेंज, बल्कि भविष्य की पर्यावरण नीति के लिए भी दिशा तय कर सकता है।
जमुई में बड़ा रेल हादसा: बरुआ नदी पुल से गिरी सीमेंट लदी मालगाड़ी, झाझा–जसीडीह रूट पूरी तरह ठप
जमुई। बिहार के जमुई जिले में रविवार को एक भीषण रेल हादसा हो गया। झाझा–जसीडीह रेलखंड पर टेलवा हॉल्ट के पास बरुआ नदी पुल पर सीमेंट से लदी एक मालगाड़ी के 19 डिब्बे पटरी से उतर गए। इनमें से 10 डिब्बे सीधे पुल से नीचे नदी किनारे जा गिरे, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के बाद अप और डाउन दोनों लाइनें पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मालगाड़ी तेज आवाज के साथ अचानक बेपटरी हुई और कुछ ही सेकंड में कई डिब्बे पुल से नीचे गिर गए। डिब्बों के गिरने से पटरियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे इस महत्वपूर्ण रेल रूट पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। हादसे का असर यात्री ट्रेनों पर भी साफ दिख रहा है। इस रूट से गुजरने वाली कई एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोक दिया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों को वैकल्पिक मार्गों से चलाने की तैयारी की जा रही है। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, इंजीनियरिंग टीम और राहत व बचाव दल मौके पर पहुंच गए। क्रेन और अन्य भारी मशीनों की मदद से डिब्बों को हटाने और ट्रैक की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि पहले प्राथमिकता अप और डाउन लाइन को जल्द से जल्द बहाल करने की है, हालांकि इसमें कई घंटे से लेकर एक-दो दिन तक का समय लग सकता है। फिलहाल हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, जो राहत की बात है। रेलवे ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक तौर पर तकनीकी खराबी या ट्रैक में समस्या को हादसे की वजह माना जा रहा है, लेकिन जांच के बाद ही असली कारण स्पष्ट हो पाएगा। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर लें और अनावश्यक यात्रा से फिलहाल बचें।
नए साल से पहले थमेगा यूक्रेन युद्ध? ट्रंप–जेलेंस्की की अहम मुलाकात आज, 20 सूत्रीय शांति योजना पर मंथन
वॉशिंगटन/फ्लोरिडा। रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में आज एक अहम कूटनीतिक पहल देखने को मिल सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच आज फ्लोरिडा में उच्चस्तरीय मुलाकात होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य लगभग तीन साल से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है। दोनों नेताओं के बीच 20 सूत्रीय शांति योजना पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। क्या नए साल से पहले रुक पाएगा युद्ध? दुनियाभर की नजरें इस मुलाकात पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका और यूक्रेन किसी साझा रोडमैप पर सहमत होते हैं, तो नए साल से पहले युद्धविराम की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, रूस की सहमति और उसकी शर्तें इस पूरी प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। 20 सूत्रीय शांति योजना में क्या हो सकता है शामिल? सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित शांति योजना में कई अहम बिंदु शामिल हो सकते हैं, जिनमें— * तत्काल युद्धविराम और संघर्षविराम की समय-सीमा * विवादित क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों पर रोक * यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की गारंटी * रूस पर लगे प्रतिबंधों में चरणबद्ध ढील या समीक्षा * अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती * युद्ध से प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण में आर्थिक सहायता किन मुद्दों पर होगी ट्रंप–जेलेंस्की में बात? बैठक में अमेरिका द्वारा यूक्रेन को दी जा रही सैन्य और आर्थिक मदद, नाटो की भूमिका, यूरोपीय देशों का समर्थन और रूस के साथ संभावित बातचीत के रास्तों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, ट्रंप की यह रणनीति भी अहम मानी जा रही है कि वह किस तरह रूस को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश करेंगे। वैश्विक राजनीति पर पड़ेगा असर यदि इस बैठक से कोई ठोस नतीजा निकलता है, तो इसका असर सिर्फ रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी इससे प्रभावित हो सकती है। उम्मीद और संशय दोनों बरकरार हालांकि शांति की कोशिशें तेज हुई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत और रूस-यूक्रेन के बीच गहरे मतभेदों को देखते हुए रास्ता आसान नहीं माना जा रहा। फिर भी, ट्रंप और जेलेंस्की की यह मुलाकात युद्ध समाप्ति की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि क्या यह कूटनीतिक पहल नए साल से पहले युद्ध पर विराम लगाने में सफल हो पाती है या नहीं।
बांग्लादेश में जेम्स के शो में हिंसा, पथराव के बाद फरीदपुर कॉन्सर्ट रद्द; कई दर्शक घायल
फरीदपुर (बांग्लादेश)। बांग्लादेश के मशहूर रॉक सिंगर जेम्स का फरीदपुर में प्रस्तावित कॉन्सर्ट उस समय रद्द करना पड़ा, जब कार्यक्रम स्थल पर अचानक हिंसा भड़क उठी। एक स्कूल की वर्षगांठ के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में बेकाबू भीड़ ने ईंट-पत्थर फेंकने शुरू कर दिए, जिससे कई दर्शक और आयोजन से जुड़े लोग घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही भीड़ का दबाव बढ़ता जा रहा था। किसी बात को लेकर हुई कहासुनी देखते ही देखते झड़प में बदल गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पथराव के कारण मंच के आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। हालात बिगड़ते देख आयोजकों ने तुरंत कॉन्सर्ट रद्द करने का फैसला लिया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है और उपद्रवियों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कॉन्सर्ट रद्द होने से जेम्स के प्रशंसकों में निराशा का माहौल है। वहीं प्रशासन ने भविष्य में ऐसे बड़े कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर सख्त इंतजाम करने की बात कही है।