सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना जाता है। विशेषकर जया एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की भक्ति से जोड़कर मान्यता दी जाती है कि इससे जीवन के सारे दुख नष्ट होते हैं, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और आत्मा को शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग सरल होता है। जया एकादशी कब है? (तिथि एवं समय) * जया एकादशी व्रत का दिन:गुरुवार, 29 जनवरी 2026 * **एकादशी तिथि आरंभ: 28 जनवरी 2026 शाम लगभग 4:35 बजे * एकादशी तिथि समाप्त: 29 जनवरी 2026 दोपहर लगभग 1:55 बजे * परान (व्रत तोड़ने का शुभ समय):30 जनवरी 2026 सुबह 7:10 — 9:20 बजे के बीच यह व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि पर रखा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। शुभ मुहूर्त — पूजा के उत्तम समय पंचांग के अनुसार जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: * सुबह पूजा का अच्छा समय:7:11 बजे से 8:32 बजे तक * दोपहर तक दूसरा शुभ समय:*11:14 बजे से 1:55 बजे तक इन समयों में भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना और मंत्र जाप कर सकते हैं। पूजा विधि — कैसे करें जया एकादशी पूजा 1. प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। 2. पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 3. घी का दीपक जलाएँ, इत्र-अक्षत, तिल, दही, फूल आदि अर्पित करें। 4. भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते, पंचामृत और फल अर्पित करें। 5. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या विष्णु सहस्रनाम आदि मंत्रों का उच्चारण ध्यानपूर्वक करें। 6. दिनभर निर्जला व्रत या फलाहार व्रत रखें तथा मन को शुद्ध रखें। 7. परान (व्रत तोड़ने) के समय सुबह स्नान के बाद ही दान या ब्राह्मण भोजन अर्पित करना शुभ है। धार्मिक महत्व जया एकादशी व्रत को संपूर्ण कर लेने से मान्यता है कि: * जीवन के सारे दुख, विघ्न और पापों का नाश होता है। * भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और धार्मिक प्रगति संभव होती है। * पवित्र व्रत से आत्मा का शुद्धिकरण और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है। * एकादशी व्रत से न केवल भौतिक शुभ फल बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। समापन संदेश जया एकादशी का व्रत सनातन परंपरा में न केवल एक धार्मिक परंपरा है बल्कि जीवन को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला एक सशक्त साधन भी माना जाता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धा और विधिपूर्वक उपासना करने से जीवन में सकारात्मकता और दैवी कृपा का प्रवेश होता है। अगर आप चाहें, तो मैं जया एकादशी की कथा/व्रत कथा भी सुना सकता हूँ — क्या आप उसके बारे में भी जानना चाहते हैं?
काजीरंगा से सियासी संदेश: विकास परियोजनाओं के बीच पीएम मोदी का कांग्रेस पर तीखा प्रहार
कालियाबोर (असम) | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के कालियाबोर में करीब 6,957 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का शिलान्यास किया और साथ ही दो अमृत भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर राज्य को बड़ी विकास सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने जहां बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के विस्तार पर जोर दिया, वहीं कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए घुसपैठ, सुरक्षा और असम की सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने देश का भरोसा खो दिया है और असम की मिट्टी व संस्कृति के प्रति उसका रवैया उदासीन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान घुसपैठ लगातार बढ़ी, जिससे राज्य की जनसंख्या संरचना असंतुलित हुई। पीएम मोदी के अनुसार, यह स्थिति न केवल असम बल्कि पूरे देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। पीएम मोदी ने असम सरकार की सराहना करते हुए कहा कि जिस प्रकार राज्य सरकार घुसपैठ से सख्ती से निपट रही है, उसकी देशभर में प्रशंसा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अतीत में घुसपैठियों को संरक्षण दिया, जिससे तस्करी और अन्य अपराध बढ़े और असम की पहचान पर संकट आया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर सीधा राजनीतिक वार करते हुए कहा, “घुसपैठियों को बचाओ और उनकी मदद से सत्ता पाओ**—कांग्रेस और उसके सहयोगी पूरे देश में यही राजनीति कर रहे हैं।” उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां घुसपैठियों के समर्थन में रैलियां निकाली गईं, लेकिन जनता ने उन्हें करारा जवाब दिया। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि असम की धरती से भी कांग्रेस को ऐसा ही जवाब मिलेगा। विकास परियोजनाओं की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। वहीं अमृत भारत ट्रेनें आधुनिक सुविधाओं के साथ क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी और आम लोगों की यात्रा को आसान बनाएंगी। समग्र रूप से देखें तो कालियाबोर का यह कार्यक्रम विकास और राजनीति—दोनों का संगम रहा। एक ओर बड़ी परियोजनाओं से असम के भविष्य की रूपरेखा पेश की गई, तो दूसरी ओर घुसपैठ और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा कर राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट कर दिया गया।
टैरिफ टकराव की आग: अमेरिकी दालों पर भारत का 30% शुल्क, ट्रंप के फैसले पर कड़ा जवाब
अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में एक बार फिर तनाव की लकीरें गहरी हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने भी जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिकी दालों के आयात पर 30 फीसदी शुल्क लागू कर दिया है। यह फैसला पिछले साल अक्टूबर से प्रभावी है, लेकिन अब इसके राजनीतिक और आर्थिक असर खुलकर सामने आने लगे हैं। भारत का यह कदम सिर्फ एक आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। लंबे समय से भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी, लेकिन इस टैरिफ वॉर ने उन वार्ताओं को और जटिल बना दिया है। नई दिल्ली का साफ संकेत है कि वह एकतरफा दबाव की नीति को स्वीकार नहीं करेगा। अमेरिकी राजनीति में हलचल भारत के इस फैसले से अमेरिकी राजनीति में भी बेचैनी देखी जा रही है। कई अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से भारत के साथ बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि भारतीय बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों, खासकर दालों के लिए बेहद अहम है और ऊंचे टैरिफ से अमेरिकी किसानों को सीधा नुकसान होगा। भारतीय किसानों को संदेश दूसरी ओर, भारत में इस निर्णय को घरेलू किसानों के हित में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। अमेरिकी दालों पर शुल्क बढ़ने से आयात महंगा होगा, जिससे देश के दाल उत्पादक किसानों को राहत मिल सकती है। सरकार इसे “हितों की रक्षा” और “संतुलित व्यापार” की दिशा में जरूरी कदम बता रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देश जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचे, तो यह टैरिफ टकराव और गहरा सकता है। इसका असर सिर्फ दालों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आईटी, फार्मा और ऑटो सेक्टर जैसे अन्य क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ सकता है। फिलहाल, भारत ने साफ कर दिया है कि वह बराबरी के आधार पर व्यापार चाहता है। अब नजर इस बात पर है कि वॉशिंगटन इस कड़े संदेश को कैसे पढ़ता है—टकराव के तौर पर या बातचीत के न्योते के रूप में।
“पारिवारिक विवादों पर दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: हर मामले में ससुराल पक्ष दोषी नहीं, कानून के दुरुपयोग पर भी जताई चिंता”
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने पारिवारिक विवादों और दहेज उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान एक अहम और दूरगामी टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि हर मामले में ससुराल पक्ष को ही दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है और यह भी स्वीकार करना होगा कि कुछ मामलों में महिलाएं कानून का दुरुपयोग करती हैं। अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दहेज उत्पीड़न कानूनों के दुरुपयोग को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज निषेध और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानून समाज में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन इनका उद्देश्य निर्दोष लोगों को परेशान करना नहीं है। अदालत ने चिंता जताई कि कई मामलों में पति के पूरे परिवार को बिना ठोस सबूतों के आरोपी बना दिया जाता है, जिससे न केवल कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होता है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक संबंध भी गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि वैवाहिक विवाद अक्सर निजी और संवेदनशील होते हैं, जिन्हें आपसी समझ, मध्यस्थता और संतुलित दृष्टिकोण से सुलझाने की कोशिश की जानी चाहिए। हर विवाद को आपराधिक रंग देना न तो परिवार के हित में है और न ही समाज के। न्यायालय ने निचली अदालतों और जांच एजेंसियों को भी सतर्कता बरतने की सलाह दी, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि जहां महिलाओं के साथ वास्तव में उत्पीड़न और अन्याय होता है, वहां कानून पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा रहेगा। अदालत ने कहा कि कानून का उद्देश्य पीड़ित को न्याय दिलाना है, न कि उसे व्यक्तिगत बदले या दबाव बनाने का साधन बनाना। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली हाईकोर्ट की यह टिप्पणी संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे एक ओर जहां दहेज और घरेलू हिंसा के वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर कानून के दुरुपयोग पर भी लगाम लग सकेगी। यह टिप्पणी आने वाले समय में पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों की सुनवाई और जांच प्रक्रिया को अधिक जिम्मेदार और न्यायसंगत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
हजारों यात्रियों की परेशानी पर DGCA सख्त, IndiGo पर ₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo को दिसंबर 2025 में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करने के मामले में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। नियामक ने यात्रियों को हुई व्यापक असुविधा और संचालन में गंभीर चूक को लेकर IndiGo पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। DGCA की ओर से की गई विस्तृत जांच में सामने आया कि दिसंबर 2025 के दौरान IndiGo ने 2500 से अधिक उड़ानें रद्द कीं, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति केवल मौसम या बाहरी कारणों की वजह से नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे एयरलाइन की खराब संचालन व्यवस्था, आंतरिक समन्वय की कमी और गंभीर प्रबंधन लापरवाही भी जिम्मेदार रही। नियामक का कहना है कि IndiGo समय रहते न तो पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था कर पाई और न ही यात्रियों को सही व स्पष्ट जानकारी दी गई। इससे यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा, कई लोगों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई और अनेक यात्रियों को होटल व अन्य सुविधाओं के लिए अपनी जेब से खर्च करना पड़ा। DGCA ने अपने आदेश में कहा है कि किसी भी एयरलाइन से यह अपेक्षा की जाती है कि वह परिचालन संबंधी जोखिमों का पहले से आकलन करे और आपात स्थिति में यात्रियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे। IndiGo इस कसौटी पर विफल रही, इसलिए उस पर यह आर्थिक दंड लगाया गया है। सूत्रों के अनुसार, DGCA ने IndiGo को भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए ऑपरेशनल सिस्टम सुधारने, स्टाफ प्लानिंग मजबूत करने और यात्रियों से संवाद बेहतर करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि आगे किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर और सख्त कार्रवाई की जा सकती है। यह जुर्माना न सिर्फ IndiGo के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, बल्कि पूरे विमानन क्षेत्र के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बिहार की धरती पर इतिहास रचा गया: पूर्वी चंपारण में स्थापित हुआ दुनिया का सबसे बड़ा अखंड शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’
पूर्वी चंपारण (बिहार)। बिहार ने एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर अपनी वैश्विक पहचान दर्ज कराई है। पूर्वी चंपारण जिले में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में 17 जनवरी को दुनिया का सबसे बड़ा 33 फीट ऊंचा अखंड शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’ विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। इस ऐतिहासिक स्थापना के साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए—यह शिवलिंग क्या है, इसे कहां और क्यों स्थापित किया गया, इसकी विशेषताएं क्या हैं और इससे जुड़े सभी अहम सवालों के जवाब। क्या है ‘सहस्त्रलिंगम’? ‘सहस्त्रलिंगम’ का अर्थ है—हजारों शिवलिंगों से युक्त एक विशाल शिवलिंग। इस अखंड शिवलिंग की सतह पर भगवान शिव के हजारों सूक्ष्म स्वरूप अंकित हैं, जो इसे अद्वितीय बनाते हैं। यह शिवलिंग एक ही पत्थर से तराशा गया है, इसलिए इसे ‘अखंड’ कहा जा रहा है। कहां स्थापित हुआ है यह शिवलिंग? यह शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। यह वही स्थल है, जहां भविष्य में दुनिया का सबसे बड़ा रामायण मंदिर निर्माणाधीन है। शिवलिंग की ऊंचाई और विशेषताएं क्या हैं? * ऊंचाई: 33 फीट * स्वरूप: अखंड (एक ही पत्थर से निर्मित) * डिजाइन: शिवलिंग पर हजारों छोटे शिवलिंगों की नक्काशी * पहचान: दुनिया का सबसे ऊंचा अखंड शिवलिंग धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, 33 फीट की ऊंचाई भगवान शिव के 33 कोटि देवताओं से जुड़े आध्यात्मिक प्रतीक को भी दर्शाती है। स्थापना कब और कैसे हुई? 17 जनवरी को वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के बीच शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, धार्मिक विद्वान और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है? यह शिवलिंग न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि— * बिहार को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मजबूत स्थान दिलाएगा * विराट रामायण मंदिर परियोजना को नई पहचान देगा * रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा देगा धार्मिक मान्यता है कि सहस्त्रलिंगम के दर्शन से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। क्या यह आम श्रद्धालुओं के लिए खुला है? जी हां, शिवलिंग स्थापना के बाद अब श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन कर सकते हैं। आने वाले समय में यहां विशेष पर्वों पर भव्य आयोजन और शिवरात्रि जैसे महापर्वों पर विशाल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बिहार के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक? अब तक बिहार को बौद्ध और जैन तीर्थों के लिए जाना जाता था, लेकिन सहस्त्रलिंगम की स्थापना के बाद यह राज्य शैव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। यह उपलब्धि न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक गर्व का विषय भी है। पूर्वी चंपारण में स्थापित ‘सहस्त्रलिंगम’ न सिर्फ एक धार्मिक संरचना है, बल्कि यह बिहार की आध्यात्मिक विरासत, शिल्पकला और आस्था का भव्य प्रतीक बनकर उभरा है। आने वाले वर्षों में यह स्थल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिवभक्तों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने की पूरी संभावना रखता है।
“बीजेपी पेशेवर राजनीति करती है, विपक्ष को भी खुद को मजबूत करना होगा” — ओडिशा दौरे पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान
भुवनेश्वर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा आज की राजनीति में “पेशेवर तरीके” से काम कर रही है, जबकि विपक्षी दलों को अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर भाजपा को हराना है तो अन्य राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति, संगठन और जनसंपर्क को मजबूत करना होगा। ओडिशा दौरे पर पहुंचे अखिलेश यादव ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि लगातार जमीन पर काम करती है। उन्होंने कहा, “बीजेपी की राजनीति प्रोफेशनल है। विपक्षी दलों को भी समय के साथ खुद को अपडेट करना होगा, तभी लोकतंत्र मजबूत रहेगा।” पीडीए को मजबूत करने पर जोर अखिलेश यादव ने ओडिशा में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) गठबंधन को मजबूत करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पीडीए ही सामाजिक न्याय की असली ताकत है और यही वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और असमानता से सबसे ज्यादा प्रभावित है। उन्होंने कहा, “अगर हम पीडीए को एकजुट कर पाते हैं, तो भाजपा की राजनीति को चुनौती दी जा सकती है। ओडिशा सहित पूरे देश में सामाजिक न्याय की राजनीति को और धार देने की जरूरत है।” नवीन पटनायक से मुलाकात अपने दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। हालांकि बैठक के बाद किसी संभावित गठबंधन पर कोई औपचारिक बयान नहीं दिया गया, लेकिन दोनों नेताओं के बीच राष्ट्रीय राजनीति और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। भाजपा पर परोक्ष हमला अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए भाजपा पर आरोप लगाया कि वह सरकारी संसाधनों और एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीति के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों का मजबूत और संगठित होना जरूरी है। आगामी राजनीति के संकेत राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान सिर्फ ओडिशा तक सीमित नहीं है, बल्कि 2029 के आम चुनावों से पहले विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा है। पीडीए की बात कर उन्होंने साफ संकेत दे दिया है कि समाजवादी पार्टी सामाजिक न्याय की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कुल मिलाकर, अखिलेश यादव का यह बयान विपक्षी राजनीति को नए सिरे से सोचने और रणनीति बदलने का संदेश देता है, जिसमें भाजपा की “पेशेवर राजनीति” का मुकाबला करने की बात खुलकर कही गई है।
बीएमसी चुनाव में महायुति की बड़ी जीत, भाजपा बनी सबसे बड़ी पार्टी; एमएनएस का प्रदर्शन निराशाजनक
मुंबई।मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों के चुनाव परिणाम पूरी तरह घोषित हो चुके हैं। देश की सबसे अमीर नगर निकाय के इस चुनाव में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए सत्ता की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिया है। गठबंधन ने कुल 118 वार्डों में जीत दर्ज की, जो बहुमत के आंकड़े 114 से कहीं अधिक है। चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। यह बीएमसी चुनावों के इतिहास में भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पार्टी ने शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ और संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी गठबंधन सहयोगी के रूप में अहम योगदान दिया। विपक्ष को करारा झटका इन चुनावों में विपक्षी दलों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। लंबे समय से बीएमसी पर वर्चस्व रखने वाली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी प्रभावी चुनौती पेश करने में नाकाम रहीं। सबसे चौंकाने वाला परिणाम राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को लेकर सामने आया। एमएनएस न सिर्फ सीमित सीटों पर सिमट गई, बल्कि उसका प्रदर्शन एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी) से भी पीछे रहा। यह नतीजा मुंबई की राजनीति में बदलते समीकरणों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाता है। शहरी विकास बना प्रमुख मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में बुनियादी सुविधाएं, सड़कें, जल निकासी, साफ-सफाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए निर्णायक रहे। महायुति ने अपने प्रचार में विकास, स्थिर प्रशासन और “डबल इंजन सरकार” के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसका सीधा लाभ गठबंधन को मिला। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब बीएमसी में महायुति का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मुंबई के प्रशासन और विकास कार्यों को लेकर नई नीतियों और तेज फैसलों की शुरुआत होगी। कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव परिणामों ने न सिर्फ मुंबई बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नए संकेत दे दिए हैं, जहां सत्ताधारी गठबंधन मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है और विपक्ष को आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो रही है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का दमदार Q3 प्रदर्शन: मुनाफा 18,645 करोड़ रुपये, कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 18,645 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जबकि कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये रही। नतीजों से यह साफ है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात के बावजूद रिलायंस के प्रमुख बिज़नेस सेगमेंट्स ने स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA 6.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 50,932 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस बढ़ोतरी में डिजिटल सर्विसेज़ और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट की अहम भूमिका रही। इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर कमाई ने अपस्ट्रीम ऑयल और गैस बिज़नेस की कमजोरी के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। डिजिटल बिज़नेस की बात करें तो रिलायंस जियो और इससे जुड़ी सेवाओं में लगातार बढ़ती ग्राहक संख्या और डेटा खपत ने आय को मजबूती दी। वहीं, O2C सेगमेंट में परिचालन दक्षता और बेहतर मार्जिन ने EBITDA को सपोर्ट किया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी के अपस्ट्रीम बिज़नेस पर देखने को मिला, लेकिन विविध बिज़नेस मॉडल के चलते इसका कुल नतीजों पर सीमित प्रभाव पड़ा। कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के Q3 नतीजे यह दर्शाते हैं कि कंपनी का फोकस डिजिटल, रिटेल और O2C जैसे मजबूत स्तंभों पर बना हुआ है, जो कठिन बाजार परिस्थितियों में भी उसे स्थिर ग्रोथ की राह पर बनाए हुए हैं।
“राम मंदिर को लेकर संत-महंतों की सियासत तेज, राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा पर शंकराचार्य का तीखा बयान”
अयोध्या। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर साधु-संतों तक बहस तेज हो गई है। इसी बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर राहुल गांधी अयोध्या पहुंचते भी हैं, तो उन्हें राम मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे हिंदू नहीं हैं। दरअसल, हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर है कि राहुल गांधी राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या जा सकते हैं। जैसे ही यह खबर सामने आई, वैसे ही धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ संतों ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया, तो वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया। शंकराचार्य का बयान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर हिंदू आस्था का केंद्र है और इसमें प्रवेश के लिए व्यक्ति का हिंदू होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी स्वयं को हिंदू मानने की स्पष्ट घोषणा नहीं करते, ऐसे में उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। शंकराचार्य का कहना है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा और परंपरा का है। राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी का मंदिर जाना उनकी निजी आस्था का विषय है और किसी को भी उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। वहीं, विरोधी दल इसे कांग्रेस की “सॉफ्ट हिंदुत्व” राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। अयोध्या की पवित्रता और सियासत अयोध्या लंबे समय से धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहसों का केंद्र रही है। राम मंदिर निर्माण के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक नेता की यात्रा और उस पर दिए गए बयान स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाते हैं। फिलहाल राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन उससे पहले ही शंकराचार्य का यह बयान देशभर में नई बहस छेड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और धर्म के बीच खींचतान किस दिशा में जाती है।