बम धमकी से थमी अदालत की सांसें, पप्पू यादव की जमानत पर सुनवाई टली

पटना। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी। पटना सिविल कोर्ट को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट समेत पूरे न्यायालय परिसर को एहतियातन खाली करा लिया गया। सुरक्षा कारणों से कोर्ट की सभी कार्यवाहियां स्थगित कर दी गईं, जिसके चलते पप्पू यादव की बेल पर फैसला टल गया। फिलहाल उन्हें पटना के बेऊर जेल में ही रहना होगा। सोमवार सुबह पटना सिविल कोर्ट के आधिकारिक ईमेल पर आरडीएक्स और आईईडी से धमाके की धमकी मिली। इस सूचना के मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस की टीमों ने पूरे कोर्ट परिसर को घेर लिया। एमपी-एमएलए कोर्ट सहित अन्य अदालतों को तत्काल खाली कराया गया और जगह-जगह सघन तलाशी अभियान चलाया गया। सुरक्षा जांच के कारण कोर्ट की नियमित कार्यवाही पूरी तरह प्रभावित रही। इसी बीच पप्पू यादव की जमानत याचिका पर निर्धारित सुनवाई भी नहीं हो सकी। अदालत की कार्यवाही स्थगित होने के चलते मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब उनकी जमानत पर सुनवाई अगली तारीख पर ही संभव हो पाएगी। गौरतलब है कि पप्पू यादव फिलहाल बेऊर जेल में बंद हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पीएमसीएच ले जाकर मेडिकल जांच कराई गई थी। पीएमसीएच के अधीक्षक राजीव कुमार के मुताबिक जांच में उनकी सेहत सामान्य पाई गई थी, हालांकि जेल ले जाते समय वे एंबुलेंस में लेटे हुए दिखाई दिए थे, जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हुईं। पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात 31 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी ऐसे वक्त हुई, जब वे हाल ही में सामने आए NEET छात्रा की मौत के मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर लगातार सवाल उठा रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की थी। कोर्ट परिसर को मिली बम धमकी ने एक बार फिर न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ईमेल भेजने वाले की पहचान और धमकी की सत्यता की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

लोकसभा में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारों के बीच कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सियासी टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और लगातार व्यवधान के कारण प्रश्नकाल भी नहीं चल सका। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि नियमों के तहत बोलने का अधिकार सभी सदस्यों को है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन गतिरोध, नारेबाजी और हंगामे के लिए नहीं, बल्कि गंभीर चर्चा और जनहित के मुद्दों पर संवाद के लिए है। स्पीकर की इस टिप्पणी के बावजूद विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहा। इस बीच सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने सदन में बैठक की, जिसमें इस प्रस्ताव को लेकर रणनीति पर मंथन किया गया। विपक्ष का आरोप है कि सदन में उनकी बातों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों ने ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारे लगाए और सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया। कांग्रेस पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि यदि राहुल गांधी को सदन में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है तो कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकती है, अन्यथा संसद में लगातार हंगामे की स्थिति बनी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ संसद पहुंचे। सदन के कामकाज को लेकर पूछे गए सवाल पर खरगे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कौन कहता है कि आज सदन नहीं चलेगा?”—उनके इस बयान को विपक्ष की ओर से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, बजट सत्र के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव न सिर्फ संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है, बल्कि अहम विधायी चर्चाओं पर भी विराम लगा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति बन पाएगी, या आने वाले दिनों में संसद का गतिरोध और गहराएगा।

छपरा में न्यायिक गतिरोध पर जिला न्यायाधीश का संवाद का संदेश, अधिवक्ताओं से कार्य बहिष्कार खत्म करने की अपील

छपरा। जिले में चल रहे अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार को लेकर जिला न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग ने संवाद और सहयोग पर जोर दिया है। रविवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे न्यायिक कार्य ठप रखने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाएं और कार्य बहिष्कार समाप्त करें। जिला न्यायाधीश ने कहा कि अधिवक्ताओं की जो भी शिकायतें या समस्याएं हैं, उन पर खुलकर और सकारात्मक माहौल में चर्चा करने के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी विवाद या असहमति का समाधान संवाद से ही संभव है, न कि न्यायिक कार्य को बाधित करके। उन्होंने यह भी कहा कि अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठकर बिंदुवार चर्चा की जा सकती है, ताकि हर मुद्दे को गंभीरता से समझा जाए और उसका व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। जिला न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे सोमवार से न्यायिक कार्य प्रारंभ करें और अपनी टीम के साथ आकर संवाद स्थापित करें। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि आपसी विश्वास, बातचीत और सहयोग के माध्यम से सभी लंबित मुद्दों का समाधान अवश्य निकल आएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक व्यवस्था का सुचारू संचालन आम जनता के हित में है और इसमें न्यायपालिका तथा अधिवक्ता दोनों की समान जिम्मेदारी है। जिला न्यायाधीश की इस अपील को न्यायिक गतिरोध समाप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें अधिवक्ताओं के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे छपरा की न्यायिक व्यवस्था फिर से पूरी गति से आगे बढ़ सके।

स्वैग, स्क्रीन और स्मार्टर ब्रेन की जंग: क्या Gen-Z वाकई पिछड़ रही है?

लाइफस्टाइल: साल 2025 के साथ ही दुनिया ने ‘बीटा जनरेशन’ का स्वागत कर लिया है, लेकिन बाज़ार, सोशल मीडिया और बहसों के केंद्र में आज भी ‘Gen-Z’ ही है। कॉलेज की कैंटीन से लेकर कॉर्पोरेट के क्यूबिकल्स तक अपनी पहचान बनाने में जुटी यह पीढ़ी अक्सर अपने बेबाक अंदाज़, डिजिटल समझ और अलग सोच के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार Gen-Z चर्चा में है, और वजह चौंकाने वाली है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने इस कूल कही जाने वाली पीढ़ी की स्मार्टनेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली बार इतिहास में… इस शोध का दावा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब बच्चे, बुद्धिमत्ता के पैमाने पर अपने माता-पिता से पीछे रह गए हैं। स्टडी के अनुसार, ‘जनरेशन Z’ (Gen-Z) अपने से पिछली पीढ़ी यानी मिलेनियल्स (Millennials) के मुकाबले औसतन कम स्मार्ट साबित हो रही है। इस रिपोर्ट को और गंभीर बनाता है न्यूरोसाइंटिस्ट और पूर्व शिक्षक डॉ. जेरेड कूनी होर्वाथ का बयान, जो उन्होंने अमेरिकी सीनेट के सामने दिया। डॉ. होर्वाथ के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है — पढ़ाई में तकनीक और स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल (EdTech Overuse) रिसर्च में क्या निकला सामने? स्टडी में Gen-Z से जुड़ी कुछ चिंताजनक बातें सामने आई हैं: ध्यान लगाने की क्षमता में गिरावट गणित और पढ़ने का कौशल कमजोर समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem Solving Ability) में कमी यानी जानकारी तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा आसान है, लेकिन उसे समझने, जोड़ने और लागू करने की क्षमता कमजोर होती जा रही है। स्क्रीन बन रही है सबसे बड़ी दुश्मन? डॉ. होर्वाथ के अनुसार, आज की पीढ़ी का बड़ा हिस्सा अपना ज्यादातर समय मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताता है। हैरानी की बात यह है कि स्कूल-कॉलेज जाने के मौके पहले से ज्यादा मिलने के बावजूद, 2010 के बाद से सीखने की क्षमता में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। असल में, इंसानी दिमाग आमने-सामने बातचीत, गहराई से पढ़ने और लंबे फोकस के लिए विकसित हुआ है। इसके उलट, तेज़ी से स्क्रॉल करना छोटे-छोटे बुलेट पॉइंट्स में जानकारी लेना मल्टीटास्किंग के नाम पर ध्यान बांटना ये सब मिलकर दिमाग की गहरी समझ विकसित करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं। डिजिटल पढ़ाई: सहायक या बाधा? स्टडी का साफ संकेत है कि डिजिटल एजुकेशन अपने आप में बुरी नहीं है, लेकिन उसका अत्यधिक और असंतुलित इस्तेमाल दिमागी विकास के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। आसान शब्दों में कहें तो — स्क्रीन ने पढ़ाई को तेज़ जरूर किया है, लेकिन सोच को उथला भी बना दिया है। Gen-Z अभी भी युवा है, सीखने और बदलने की क्षमता रखती है। सवाल यह नहीं कि यह पीढ़ी कम स्मार्ट है या ज्यादा, सवाल यह है कि क्या हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दिमाग को मजबूत करने के लिए कर रहे हैं, या सिर्फ समय काटने के लिए? क्योंकि आने वाली बीटा जनरेशन उसी रास्ते पर चलेगी, जो आज Gen-Z बना रही है।

दिनदहाड़े हथियारों के बल पर ज्वेलरी शॉप लूट, दो मिनट में 20 लाख की वारदात से सहमा सारण

सारण (बिहार), रविवार: बिहार के सारण जिले में अपराधियों के हौसले एक बार फिर खुलेआम दिखाई दिए, जब मांझी थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर बाजार में स्थित एक ज्वेलरी शॉप से दिनदहाड़े करीब 20 लाख रुपये की लूट कर ली गई। इस सनसनीखेज वारदात को दो बाइक पर सवार होकर आए छह बदमाशों ने महज दो मिनट में अंजाम दिया और फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बदमाश अचानक दुकान पर पहुंचे और अंदर घुसते ही पिस्टल दिखाकर दुकानदार व ग्राहकों को आतंकित कर दिया। हथियारों के बल पर सभी को बंधक बना लिया गया। इसके बाद बदमाशों ने सोने-चांदी के आभूषण बोरे में भरने शुरू कर दिए। दहशत फैलाने के लिए अपराधियों ने फायरिंग भी की, जिससे पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। वीडियो में कैद हुई पूरी वारदात घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि तीन बदमाश दुकान के अंदर मौजूद हैं। दो के हाथों में पिस्टल है, जबकि एक बदमाश गन पॉइंट पर ग्राहकों को बंधक बनाए हुए है। वहीं, दो अन्य बदमाश तेजी से ज्वेलरी को बोरे में भरते नजर आ रहे हैं। दुकान के अंदर मौजूद ग्राहकों की चीख-पुकार भी वीडियो में सुनी जा सकती है। दुकानदार ने बताई आपबीती दुकान के मालिक बृज बिहारी गुप्ता ने बताया कि वे ग्राहकों को आभूषण दिखा रहे थे, तभी अचानक दो बाइक पर सवार होकर छह बदमाश पहुंचे। उन्होंने बिना कुछ कहे पिस्टल निकाल ली और लूटपाट शुरू कर दी। फायरिंग की आवाज सुनते ही पूरा बाजार दहल उठा। घटना की सूचना मिलते ही मांझी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि दुकान और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज हाथ लगी है, जिसके आधार पर बदमाशों की पहचान की जा रही है। इलाके की नाकेबंदी कर फरार अपराधियों की तलाश तेज कर दी गई है। दिनदहाड़े हुई इस बड़ी लूट की घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारी वर्ग में दहशत का माहौल है और लोग सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने की मांग कर रहे हैं।

बिहार में अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की कथा के दौरान हंगामा, भीड़ बेकाबू होने पर पुलिस का लाठीचार्ज

न्यूज डेस्क | बिहार : बिहार में प्रसिद्ध कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा के दौरान उस समय अफरातफरी मच गई, जब उनके कार्यक्रम में प्रवेश के लिए उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया। हालात इस कदर बिगड़ गए कि भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से कहीं अधिक पहुंच गई थी। प्रवेश के लिए केवल एक ही गेट खोला गया था, जिससे हजारों श्रद्धालु एक साथ अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान धक्का-मुक्की बढ़ गई और लोहे का गेट दबाव के कारण उखड़ गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। भीड़ के बेकाबू होते ही मौके पर मौजूद पुलिस बल ने पहले समझाइश और बैरिकेडिंग के जरिए लोगों को पीछे हटाने का प्रयास किया, लेकिन जब हालात नहीं संभले तो हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। इस दौरान कुछ श्रद्धालुओं को मामूली चोटें आने की भी सूचना है, हालांकि किसी गंभीर घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षा से कहीं अधिक होने के कारण दबाव बढ़ गया। घटना के बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया और प्रवेश-निकास की व्यवस्था को अस्थायी रूप से बंद कर हालात को नियंत्रण में लिया गया। वहीं, आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है और कथा कार्यक्रम आगे की व्यवस्थाओं के साथ जारी रखने की तैयारी की जा रही है।

रक्षा से चिप निर्माण तक: भारत–मलेशिया साझेदारी में आई नई तेजी, पीएम मोदी बोले—यह दोस्ती भविष्य की नींव

कुआलालंपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया यात्रा ने भारत–मलेशिया संबंधों को नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच हुई अहम वार्ता के बाद दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इस दौरान कुल 11 द्विपक्षीय समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए, जिन्हें दोनों देशों के रिश्तों में “नए अध्याय की शुरुआत” माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया की साझेदारी केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देश मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा को बढ़ावा देंगे। रक्षा सहयोग में नई दिशा वार्ता के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया। संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा उपकरणों के निर्माण और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। पीएम मोदी ने कहा कि **रक्षा साझेदारी आपसी विश्वास और साझा सुरक्षा हितों का प्रतीक है। ऊर्जा और ग्रीन ट्रांजिशन पर फोकस ऊर्जा क्षेत्र में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। हरित हाइड्रोजन, सोलर और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों से सतत विकास लक्ष्यों को गति मिलेगी। सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा कदम सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर हुए समझौते को खास अहमियत दी जा रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहल को मलेशिया की तकनीकी विशेषज्ञता से नई मजबूती मिलेगी। इससे वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों देशों की भूमिका और मजबूत होगी। व्यापार और निवेश को मिलेगी रफ्तार व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और MSMEs के लिए नए अवसर खोलने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने व्यापार बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर तक ले जाने का संकल्प दोहराया। पीएम मोदी का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और मलेशिया की दोस्ती विश्वास, सम्मान और साझा भविष्य पर आधारित है। आज किए गए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के युवाओं, उद्योगों और अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर लेकर आएंगे।” मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी भारत को विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि यह सहयोग दोनों देशों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। कुल मिलाकर, पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि रक्षा से ऊर्जा और सेमीकंडक्टर तक भारत–मलेशिया की दोस्ती अब सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि भविष्य-केंद्रित रणनीतिक साझेदारी बन चुकी है।

डिजिटल डेस्क : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बांग्लादेश में रहने वाले हिंदू समाज से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा है कि आज भी वहां करीब 1.25 करोड़ हिंदू मौजूद हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि यह समुदाय संगठित होकर लोकतांत्रिक और राजनीतिक व्यवस्था का सही ढंग से उपयोग करे, तो वह अपने अधिकारों, सुरक्षा और भविष्य को मजबूत बना सकता है। मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी समाज की शक्ति उसकी संख्या से अधिक उसकी एकता में होती है। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय ऐतिहासिक रूप से समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का वाहक रहा है, लेकिन समय-समय पर उसे असुरक्षा और भेदभाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में संगठन और सामूहिक प्रयास ही स्थायी समाधान का रास्ता खोलते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है। वोट, संवाद और संवैधानिक अधिकारों के माध्यम से समाज अपनी बात मजबूती से रख सकता है। भागवत ने कहा कि एकजुट हिंदू समाज न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, बल्कि सामाजिक सम्मान और विकास की दिशा में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है। आरएसएस प्रमुख ने अपील की कि समाज के भीतर आपसी मतभेद भुलाकर सांस्कृतिक पहचान, शिक्षा और सामाजिक सहयोग को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विश्वास जताया कि जागरूकता और संगठन के बल पर बांग्लादेशी हिंदू समुदाय अपने लिए बेहतर भविष्य गढ़ सकता है। मोहन भागवत का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज है। उनकी यह अपील बांग्लादेशी हिंदुओं के बीच आत्मविश्वास और सामूहिक शक्ति का संचार करने वाली मानी जा रही है।

अग्निवीर भर्ती 2026: नियमों में बड़ा बदलाव, अब सिर्फ अविवाहित युवाओं को मिलेगा मौका

नई दिल्ली। भारतीय सेना में अग्निवीर बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए साल 2026 की भर्ती प्रक्रिया कई अहम बदलावों के साथ सामने आई है। सेना ने भर्ती नियमों को और अधिक अनुशासित एवं सेवा-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से कुछ सख्त शर्तें लागू की हैं, जिनका सीधा असर उम्मीदवारों की पात्रता पर पड़ेगा। केवल अविवाहित उम्मीदवार ही होंगे पात्र ई व्यवस्था के तहत अब केवल अविवाहित पुरुष उम्मीदवारों को ही अग्निवीर भर्ती में आवेदन करने की अनुमति दी जाएगी। यदि कोई अभ्यर्थी विवाहित पाया जाता है या भर्ती प्रक्रिया के दौरान विवाह करता है, तो उसकी उम्मीदवारी तत्काल रद्द की जा सकती है। चार साल की सेवा अवधि में शादी पर पूरी तरह रोक सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि अग्निवीर के रूप में चयनित होने के बाद चार साल की सेवा अवधि के दौरान विवाह की अनुमति नहीं होगी। इस अवधि में यदि कोई अग्निवीर नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा से निष्कासन भी शामिल हो सकता है। क्यों किए गए ये बदलाव सेना सूत्रों के मुताबिक, इन बदलावों का मकसद अग्निवीरों का पूरा ध्यान प्रशिक्षण, अनुशासन और राष्ट्रीय सेवा पर केंद्रित रखना है। कम उम्र में पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर रहकर जवान अपनी शारीरिक, मानसिक और पेशेवर क्षमताओं को बेहतर ढंग से विकसित कर सकें, यही इस नीति का मूल उद्देश्य है। भर्ती प्रक्रिया में अनुशासन को मिलेगी मजबूती अधिकारियों का मानना है कि सख्त नियमों से सेना में अनुशासन और कार्यक्षमता दोनों में सुधार होगा। अग्निवीर योजना को दीर्घकालिक रूप से सफल बनाने के लिए यह कदम जरूरी बताया जा रहा है। युवाओं को क्या रखना होगा ध्यान में आवेदन से पहले वैवाहिक स्थिति की सही जानकारी देना अनिवार्य सेवा अवधि के दौरान विवाह न करने का शपथ पत्र नियमों के उल्लंघन पर सेवा समाप्ति का जोखिम देश सेवा का मौका, लेकिन शर्तों के साथ अग्निवीर योजना युवाओं को कम उम्र में भारतीय सेना से जुड़ने और देश सेवा का सुनहरा अवसर देती है। हालांकि, 2026 की भर्ती में लागू किए गए नए नियम यह साफ संकेत देते हैं कि यह अवसर कड़े अनुशासन और प्रतिबद्धता के साथ ही मिलेगा।

दिल्ली की सड़कों पर हरित क्रांति: 500 नई इलेक्ट्रिक बसों की ऐतिहासिक सौगात, EV ट्रांसपोर्ट में बना नया रिकॉर्ड

नई दिल्ली: दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ने आज एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया, जब रामलीला ग्राउंड से राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने राजधानी को एक साथ 500 नई इलेक्ट्रिक बसें समर्पित कीं। यह दिल्ली के इतिहास में पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों को एक साथ परिवहन बेड़े में शामिल किया गया। बीते एक वर्ष के दौरान दिल्ली सरकार ने डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम) के बेड़े को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि नई इलेक्ट्रिक बसों के जुड़ने के साथ ही दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या 4000 के आंकड़े को पार कर गई है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक डीटीसी की सभी बसों को पूर्णतः इलेक्ट्रिक बनाया जाए, जिस दिशा में तेज़ी से काम चल रहा है। इन नई EV बसों से न केवल राजधानी की यातायात व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर भी यह एक निर्णायक पहल साबित होगी। इलेक्ट्रिक बसें शून्य उत्सर्जन पर आधारित हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार, ध्वनि प्रदूषण में कमी और ईंधन पर निर्भरता घटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिल्ली को स्वच्छ हवा और हरित भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा। कार्यक्रम के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दिल्ली–पानीपत के बीच इलेक्ट्रिक अंतरराज्यीय बस सेवा का भी शुभारंभ किया गया। इस नई सेवा से दिल्ली और हरियाणा के हजारों यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और सुविधाजनक यात्रा विकल्प मिलेगा। यह पहल अंतरराज्यीय परिवहन में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देगी। सरकार का कहना है कि आने वाले समय में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, स्मार्ट डिपो और आधुनिक तकनीक के ज़रिये दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को देश के लिए हरित मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। 500 नई इलेक्ट्रिक बसों की यह सौगात न सिर्फ आज की जरूरत है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और टिकाऊ दिल्ली की मजबूत नींव भी है।