मुंबई।मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के 227 वार्डों के चुनाव परिणाम पूरी तरह घोषित हो चुके हैं। देश की सबसे अमीर नगर निकाय के इस चुनाव में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन महायुति ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए सत्ता की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिया है। गठबंधन ने कुल 118 वार्डों में जीत दर्ज की, जो बहुमत के आंकड़े 114 से कहीं अधिक है। चुनाव नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। यह बीएमसी चुनावों के इतिहास में भाजपा के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पार्टी ने शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ और संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट प्रदर्शन किया है। वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी गठबंधन सहयोगी के रूप में अहम योगदान दिया। विपक्ष को करारा झटका इन चुनावों में विपक्षी दलों को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई। लंबे समय से बीएमसी पर वर्चस्व रखने वाली उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना का प्रदर्शन कमजोर रहा, जबकि कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी प्रभावी चुनौती पेश करने में नाकाम रहीं। सबसे चौंकाने वाला परिणाम राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को लेकर सामने आया। एमएनएस न सिर्फ सीमित सीटों पर सिमट गई, बल्कि उसका प्रदर्शन एआईएमआईएम (असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी) से भी पीछे रहा। यह नतीजा मुंबई की राजनीति में बदलते समीकरणों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में आए बदलाव को दर्शाता है। शहरी विकास बना प्रमुख मुद्दा विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में बुनियादी सुविधाएं, सड़कें, जल निकासी, साफ-सफाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए निर्णायक रहे। महायुति ने अपने प्रचार में विकास, स्थिर प्रशासन और “डबल इंजन सरकार” के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसका सीधा लाभ गठबंधन को मिला। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब बीएमसी में महायुति का महापौर बनना लगभग तय माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मुंबई के प्रशासन और विकास कार्यों को लेकर नई नीतियों और तेज फैसलों की शुरुआत होगी। कुल मिलाकर, बीएमसी चुनाव परिणामों ने न सिर्फ मुंबई बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी नए संकेत दे दिए हैं, जहां सत्ताधारी गठबंधन मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है और विपक्ष को आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो रही है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का दमदार Q3 प्रदर्शन: मुनाफा 18,645 करोड़ रुपये, कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में 18,645 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है, जबकि कुल आय 2.65 लाख करोड़ रुपये रही। नतीजों से यह साफ है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालात के बावजूद रिलायंस के प्रमुख बिज़नेस सेगमेंट्स ने स्थिर और मजबूत प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड EBITDA 6.1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 50,932 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इस बढ़ोतरी में डिजिटल सर्विसेज़ और ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) सेगमेंट की अहम भूमिका रही। इन दोनों क्षेत्रों में बेहतर कमाई ने अपस्ट्रीम ऑयल और गैस बिज़नेस की कमजोरी के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। डिजिटल बिज़नेस की बात करें तो रिलायंस जियो और इससे जुड़ी सेवाओं में लगातार बढ़ती ग्राहक संख्या और डेटा खपत ने आय को मजबूती दी। वहीं, O2C सेगमेंट में परिचालन दक्षता और बेहतर मार्जिन ने EBITDA को सपोर्ट किया। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर कंपनी के अपस्ट्रीम बिज़नेस पर देखने को मिला, लेकिन विविध बिज़नेस मॉडल के चलते इसका कुल नतीजों पर सीमित प्रभाव पड़ा। कुल मिलाकर, रिलायंस इंडस्ट्रीज के Q3 नतीजे यह दर्शाते हैं कि कंपनी का फोकस डिजिटल, रिटेल और O2C जैसे मजबूत स्तंभों पर बना हुआ है, जो कठिन बाजार परिस्थितियों में भी उसे स्थिर ग्रोथ की राह पर बनाए हुए हैं।
“राम मंदिर को लेकर संत-महंतों की सियासत तेज, राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा पर शंकराचार्य का तीखा बयान”
अयोध्या। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर साधु-संतों तक बहस तेज हो गई है। इसी बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर राहुल गांधी अयोध्या पहुंचते भी हैं, तो उन्हें राम मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे हिंदू नहीं हैं। दरअसल, हाल के दिनों में यह चर्चा जोरों पर है कि राहुल गांधी राम मंदिर दर्शन के लिए अयोध्या जा सकते हैं। जैसे ही यह खबर सामने आई, वैसे ही धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ संतों ने इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय बताया, तो वहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे धार्मिक पहचान से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया। शंकराचार्य का बयान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर हिंदू आस्था का केंद्र है और इसमें प्रवेश के लिए व्यक्ति का हिंदू होना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी स्वयं को हिंदू मानने की स्पष्ट घोषणा नहीं करते, ऐसे में उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। शंकराचार्य का कहना है कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा और परंपरा का है। राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया शंकराचार्य के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी का मंदिर जाना उनकी निजी आस्था का विषय है और किसी को भी उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। वहीं, विरोधी दल इसे कांग्रेस की “सॉफ्ट हिंदुत्व” राजनीति से जोड़कर देख रहे हैं। अयोध्या की पवित्रता और सियासत अयोध्या लंबे समय से धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहसों का केंद्र रही है। राम मंदिर निर्माण के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक नेता की यात्रा और उस पर दिए गए बयान स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाते हैं। फिलहाल राहुल गांधी की अयोध्या यात्रा को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन उससे पहले ही शंकराचार्य का यह बयान देशभर में नई बहस छेड़ चुका है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और धर्म के बीच खींचतान किस दिशा में जाती है।
देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मकर संक्रांति का पर्व, गोरखपुर में सीएम योगी ने चढ़ाई खिचड़ी, संगम-घाटों पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
न्यूज डेस्क: देशभर में आज मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही इस महापर्व की शुरुआत हुई, जिसे लेकर उत्तर भारत सहित कई राज्यों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और स्नान का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर महायोगी गुरु गोरखनाथ को परंपरागत रूप से खिचड़ी अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने लोकमंगल और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सामाजिक समरसता, सेवा और सनातन परंपराओं का प्रतीक है। वहीं प्रयागराज के पावन संगम तट पर तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। घना कोहरा और कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगाते नजर आए। प्रशासन द्वारा सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। काशी नगरी वाराणसी के गंगा घाटों पर भी मकर संक्रांति का विशेष उल्लास देखने को मिला। दशाश्वमेध, अस्सी और अन्य प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान कर दान-पुण्य किया। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई और हर-हर महादेव के जयकारों से घाट गूंज उठे। उल्लेखनीय है कि मकर संक्रांति को दान, स्नान और सूर्य उपासना का महापर्व माना जाता है। इस दिन खिचड़ी, तिल, गुड़ और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जा रहा है, लेकिन आस्था और संस्कृति का भाव हर जगह समान रूप से दिखाई दे रहा है।
बीसीबी बनाम खिलाड़ी: निदेशक के बयान से भड़के बांग्लादेशी क्रिकेटर्स, T20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार की चेतावनी
ढाका। बांग्लादेश क्रिकेट में इस समय जबरदस्त उथल-पुथल मची हुई है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के निदेशक नजमुल इस्लाम के एक विवादित बयान ने राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ियों को नाराज़ कर दिया है। खिलाड़ियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि नजमुल इस्लाम अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे न केवल आगामी T20 वर्ल्ड कप बल्कि सभी तरह के क्रिकेट का बहिष्कार करेंगे। दरअसल, हाल ही में बीसीबी निदेशक नजमुल इस्लाम ने सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता और प्रोफेशनलिज़्म पर सवाल उठाए थे। उनके इस बयान को खिलाड़ियों ने अपमानजनक और मनोबल तोड़ने वाला बताया। बयान सामने आते ही ड्रेसिंग रूम में असंतोष फैल गया और सीनियर खिलाड़ियों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया। बीसीबी ने झाड़ा पल्ला विवाद बढ़ने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर नजमुल इस्लाम की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि निदेशक के व्यक्तिगत विचार बीसीबी की आधिकारिक सोच का प्रतिनिधित्व नहीं करते। हालांकि, बोर्ड की इस सफाई से खिलाड़ी संतुष्ट नजर नहीं आए। खिलाड़ियों की दो टूक चेतावनी राष्ट्रीय खिलाड़ियों का कहना है कि केवल बयान से दूरी बनाना काफी नहीं है। उनका आरोप है कि नजमुल इस्लाम लगातार खिलाड़ियों को निशाना बनाते रहे हैं और इससे टीम का माहौल खराब हुआ है। खिलाड़ियों ने साफ कहा है कि जब तक निदेशक इस्तीफा नहीं देते, वे किसी भी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय मैच में हिस्सा नहीं लेंगे। T20 वर्ल्ड कप पर संकट इस विवाद का सीधा असर आगामी T20 वर्ल्ड कप पर पड़ सकता है। यदि खिलाड़ियों ने अपना फैसला नहीं बदला तो बांग्लादेश की भागीदारी ही खतरे में पड़ सकती है। क्रिकेट प्रशंसक और पूर्व खिलाड़ी भी इस विवाद पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द समाधान की उम्मीद जता रहे हैं। क्या निकलेगा समाधान? फिलहाल, बीसीबी के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है। एक तरफ खिलाड़ियों की एकजुटता है, तो दूसरी ओर बोर्ड की साख और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बोर्ड इस संकट से कैसे निपटता है और क्या बांग्लादेशी क्रिकेट समय रहते इस विवाद से बाहर निकल पाता है। खेल जगत में इस घटनाक्रम को बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक टकरावों में से एक माना जा रहा है।
दही-चूड़ा भोज में सियासी तंज: तेजस्वी की गैरमौजूदगी पर तेज प्रताप बोले—‘जयचंदों से घिरे हैं’
पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज एक बार फिर राजनीतिक बयानबाज़ी का मंच बन गया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेज प्रताप यादव के भोज में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई। इस मौके पर तेज प्रताप यादव ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी “जयचंदों से घिरे हुए हैं”, इसलिए कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए। तेज प्रताप यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने तेजस्वी यादव का रात 9 बजे तक इंतजार किया, लेकिन वह नहीं आए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग हैं जो उन्हें घेरकर गलत सलाह दे रहे हैं और वही उनकी अनुपस्थिति का कारण हो सकते हैं। तेज प्रताप के इस बयान को पार्टी के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। भोज के दौरान तेज प्रताप यादव ने अपने पिता और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि “हमारी पार्टी असली है, तभी मेरे पिताजी खुद मुझे आशीर्वाद देने आए।” लालू प्रसाद यादव की मौजूदगी को उन्होंने अपने पक्ष में एक मजबूत संकेत बताया और कहा कि परिवार और पार्टी के मूल सिद्धांत उनके साथ हैं। तेज प्रताप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पार्टी और विचारधारा के लिए है, किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं। हालांकि, तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी और उस पर आया यह बयान राजद की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मकर संक्रांति जैसे सामाजिक अवसर पर दिए गए इस तरह के बयान केवल पारिवारिक नहीं, बल्कि सियासी संदेश भी देते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच यह दूरी केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहती है या पार्टी की राजनीति पर इसका असर और गहराता है।
ईरान में हालात बेहद तनावपूर्ण, भारतीय नागरिकों को तुरंत सतर्क रहने की चेतावनी
विदेश मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी, गैर-जरूरी यात्रा से बचने की अपील नई दिल्ली/तेहरान: ईरान में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों (PIO) के लिए अहम एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं, ऐसे में सभी भारतीय नागरिक अत्यधिक सतर्कता बरतें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। एडवाइजरी में क्या कहा गया है? विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, “ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिक और PIO अत्यधिक सावधानी बरतें। किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन, रैलियों या भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।” इसके साथ ही गैर-जरूरी यात्रा से बचने और जहां संभव हो सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि भारतीय दूतावास के संपर्क में लगातार बने रहें। ईरान में कैसे हैं हालात? ईरान में हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में हिंसा और अस्थिरता के चलते अब तक हजारों लोगों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं। बताया जा रहा है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले इस देश में आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अमेरिकी हमले की आशंका से बढ़ी चिंता इस बीच ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों की खबरों ने हालात को और ज्यादा विस्फोटक बना दिया है। ऐसे में विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय दूतावास की अपील ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत दूतावास से संपर्क करें, अपनी जानकारी अपडेट रखें और अफवाहों से दूर रहें। ईरान में मौजूदा हालात को देखते हुए भारत सरकार पूरी तरह सतर्क है। विदेश मंत्रालय की यह एडवाइजरी साफ संकेत देती है कि स्थिति गंभीर बनी हुई है और किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे संयम, सतर्कता और सरकारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।
दिशा पाटनी की लव लाइफ में नई एंट्री! कौन हैं 6 साल छोटे रूमर्ड ब्वॉयफ्रेंड तलविंदर सिंह, जिनके साथ दिखीं एक्ट्रेस
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी एक बार फिर अपनी निजी ज़िंदगी को लेकर चर्चा में हैं। टाइगर श्रॉफ से लंबे समय पहले हुए ब्रेकअप के बाद दिशा ने अपनी पर्सनल लाइफ को हमेशा निजी रखा, लेकिन हाल ही में उदयपुर में नूपुर सेनन की शादी के दौरान सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। वायरल क्लिप में दिशा एक शख्स के साथ हाथों में हाथ डाले नज़र आईं—बताया जा रहा है कि यह शख्स तलविंदर सिंह हैं, जो उम्र में दिशा से करीब 6 साल छोटे हैं। उदयपुर वेडिंग से वायरल हुआ वीडियो शादी के फंक्शन के दौरान दिशा पाटनी का सिंपल लेकिन एलिगेंट लुक और उनके साथ मौजूद मिस्ट्री मैन ने सबका ध्यान खींचा। वीडियो में तलविंदर सिंह अक्सर नकाब या कैप में नज़र आए, जिससे उनकी पहचान को लेकर जिज्ञासा और बढ़ गई। यही वजह है कि सोशल मीडिया यूज़र्स उन्हें “नकाब में रहने वाला शख्स” कहकर पुकारने लगे। कौन हैं तलविंदर सिंह? मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं के मुताबिक, तलविंदर सिंह का ताल्लुक न तो सीधे फिल्म इंडस्ट्री से है और न ही वह किसी बड़े सेलिब्रिटी परिवार से आते हैं। कहा जा रहा है कि वह फिटनेस और बिज़नेस से जुड़े हुए हैं, हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। तलविंदर लाइमलाइट से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं, यही कारण है कि उनकी पब्लिक प्रोफाइल काफी लो-की बताई जाती है। उम्र का फासला और बढ़ी चर्चा बताया जा रहा है कि तलविंदर सिंह, दिशा पाटनी से लगभग 6 साल छोटे हैं। बॉलीवुड में उम्र के फासले को लेकर पहले भी कई रिश्ते सुर्खियों में रहे हैं, ऐसे में दिशा और तलविंदर की जोड़ी को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। सोशल मीडिया पर रिएक्शन वायरल वीडियो के बाद फैंस दो हिस्सों में बंटे दिखे। कुछ लोग दिशा को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं, तो कुछ इसे महज़ एक दोस्ताना पल बता रहे हैं। हालांकि, दिशा पाटनी या तलविंदर सिंह की ओर से अब तक इस रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दिशा की चुप्पी, अटकलें बरकरार दिशा पाटनी हमेशा से अपनी निजी ज़िंदगी पर कम बोलती आई हैं। टाइगर श्रॉफ से ब्रेकअप के बाद उन्होंने करियर पर फोकस किया और फिल्मों व ब्रांड एंडोर्समेंट में व्यस्त रहीं। ऐसे में तलविंदर सिंह के साथ उनकी नज़दीकियों की खबरों ने एक बार फिर उनकी लव लाइफ को सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल, यह साफ है कि दिशा पाटनी और तलविंदर सिंह को लेकर चल रही बातें अभी अफवाहों के दायरे में हैं। आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन इतना तय है कि यह “नकाब में रहने वाला” शख्स इन दिनों बॉलीवुड गॉसिप का नया केंद्र बन चुका है।
4 साल बाद विराट कोहली की ताजपोशी: 37 की उम्र में फिर बने वनडे के नंबर-1 बल्लेबाज़, रोहित शर्मा को झटका
न्यूज़ डेस्क | करीब चार साल के लंबे इंतज़ार के बाद भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार विराट कोहली ने एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम कर ली है। 37 साल की उम्र में कोहली ने आईसीसी मेंस वनडे बैटर्स रैंकिंग में नंबर-1 का स्थान हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे मुकाबले में खेली गई शानदार 93 रनों की पारी के दम पर पाई। आईसीसी द्वारा जारी ताज़ा वनडे बल्लेबाज़ों की रैंकिंग में विराट कोहली को एक स्थान का फायदा हुआ, जिससे वह सीधे शीर्ष पायदान पर पहुंच गए। इस रेस में उन्होंने अपने ही साथी और भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा को पीछे छोड़ दिया। रैंकिंग अपडेट में रोहित शर्मा को भारी नुकसान हुआ है और वह दो स्थान फिसलकर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पारी बनी टर्निंग पॉइंट न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच में विराट कोहली ने जिस तरह संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाया, उसने चयनकर्ताओं और रैंकिंग पैनल दोनों को प्रभावित किया। 93 रनों की इस पारी में कोहली का अनुभव और क्लास साफ झलका, जिसका सीधा फायदा उन्हें रैंकिंग में मिला। 37 साल की उम्र में नंबर-1 बनना यह साबित करता है कि विराट कोहली आज भी विश्व क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली बल्लेबाज़ों में से एक हैं। फिटनेस, निरंतरता और बड़े मैचों में प्रदर्शन—इन तीनों के दम पर कोहली ने एक बार फिर खुद को शीर्ष पर स्थापित किया है। रोहित शर्मा को झटका वहीं दूसरी ओर, रोहित शर्मा के लिए यह रैंकिंग अपडेट झटके जैसा रहा। दो स्थान की गिरावट के साथ वह तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि रोहित के पास वापसी का पूरा मौका है और आने वाले मुकाबलों में वह फिर से रैंकिंग में ऊपर चढ़ सकते हैं। भारतीय क्रिकेट के लिए खुशी की बात आईसीसी वनडे रैंकिंग में भारतीय बल्लेबाज़ों का शीर्ष स्थानों पर बने रहना देश के क्रिकेट प्रशंसकों के लिए गर्व की बात है। विराट कोहली की यह उपलब्धि न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भारतीय क्रिकेट की मजबूती को भी दर्शाती है। अब सभी की निगाहें आने वाले वनडे मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां विराट कोहली अपनी नंबर-1 पोज़िशन को बरकरार रखने और रोहित शर्मा अपनी खोई हुई रैंकिंग वापस पाने की कोशिश करेंगे।
150 साल बाद स्पेन को मिलने जा रही है रानी, जानिए कौन हैं राजकुमारी लियोनोर जो इतिहास रचने को तैयार
मैड्रिड। स्पेन के शाही इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। करीब 150 साल बाद पहली बार देश की गद्दी पर रानी का शासन देखने को मिलेगा। राजा फेलिप VI और रानी लेटिजिया की 20 वर्षीय बेटी राजकुमारी लियोनोर स्पेन की अगली शासक होंगी। वह वर्तमान में प्रिंसेस ऑफ ऑस्टुरियस (Crown Princess) हैं और संवैधानिक रूप से सिंहासन की उत्तराधिकारी हैं। 150 साल बाद महिला शासक स्पेन में आखिरी बार रानी इसाबेला द्वितीय का शासन 19वीं सदी में रहा था, जिनका राज 1868 में समाप्त हुआ। उसके बाद से स्पेन में केवल पुरुष राजाओं ने ही शासन संभाला। अब लियोनोर के उत्तराधिकारी बनने से यह लंबा अंतराल खत्म होने जा रहा है। कौन हैं राजकुमारी लियोनोर * पूरा नाम: लियोनोर दे बोर्बोन ई ऑर्टिज़ * जन्म: 31 अक्टूबर 2005 * पद: प्रिंसेस ऑफ ऑस्टुरियस (स्पेन की क्राउन प्रिंसेस) * माता-पिता: राजा फेलिप VI और रानी लेटिजिया लियोनोर को बचपन से ही भावी शासक के रूप में तैयार किया जा रहा है। उन्होंने स्पेन और विदेशों में उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त की है और आधुनिक राजशाही की जिम्मेदारियों को समझने के लिए कूटनीति, इतिहास और राजनीति का अध्ययन किया है। संविधान के प्रति शपथ अक्टूबर 2023 में 18 वर्ष की उम्र पूरी करने पर लियोनोर ने स्पेन की संसद में संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी। यह कदम उन्हें औपचारिक रूप से सिंहासन की उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करता है। सैन्य प्रशिक्षण भी अनिवार्य स्पेन की परंपरा के अनुसार भावी शासक को तीनों सेनाओं—थलसेना, नौसेना और वायुसेना—का प्रशिक्षण लेना होता है। लियोनोर ने सैन्य प्रशिक्षण की शुरुआत कर दी है, जिससे वह देश की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर की भूमिका निभाने के लिए तैयार होंगी। आधुनिक दौर की रानी राजकुमारी लियोनोर को एक आधुनिक, शिक्षित और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में सामाजिक मुद्दों, युवाओं, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुलकर बोलती हैं। यही वजह है कि स्पेन की युवा पीढ़ी में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कब संभालेंगी शासन? फिलहाल राजा फेलिप VI गद्दी पर हैं। भविष्य में उनके पद छोड़ने या संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लियोनोर स्पेन की पहली आधुनिक रानी के रूप में शासन संभालेंगी। स्पेन ही नहीं, पूरी दुनिया की निगाहें अब इस युवा राजकुमारी पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में इतिहास रचने के लिए तैयार हैं।