अब ईपीएफ निकासी होगी झटपट: अप्रैल में लॉन्च होगा EPFO 3.0 मोबाइल ऐप, UPI से सीधे खाते में आएंगे पैसे

डिजिटल डेस्क: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने करोड़ों खाताधारकों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। ऑनलाइन सेवाओं को और सरल, तेज़ व यूज़र-फ्रेंडली बनाने की दिशा में EPFO अब एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। EPFO 3.0 के तहत जल्द ही कर्मचारी अपने ईपीएफ खाते से यूपीआई (UPI) के जरिए तत्काल राशि निकाल सकेंगे। इसके लिए अप्रैल 2026 में EPFO का नया मोबाइल एप लॉन्च किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, इस नए मोबाइल एप के जरिए कर्मचारी भविष्य निधि खाते से सीधे अपने बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से रकम ट्रांसफर कर सकेंगे। यानी अब लंबी प्रक्रिया, इंतजार और बार-बार आवेदन करने की झंझट से मुक्ति मिलने वाली है। ट्रायल सफल, अप्रैल में लॉन्च की तैयारी श्रम मंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि मोबाइल ऐप और यूपीआई आधारित निकासी सुविधा का ट्रायल शुरू हो चुका है। फिलहाल 100 से अधिक डमी ईपीएफ खातों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है। ट्रायल के नतीजे सकारात्मक रहे हैं और अप्रैल में इसे देशभर में लॉन्च करने की तैयारी है। कितनी रकम निकलेगी? जानिए नियम हालांकि, यूपीआई के जरिए निकासी पर कुछ सीमाएं तय होंगी। लेबर कोड के नए नियमों के तहत ईपीएफ खाते की न्यूनतम 25 प्रतिशत राशि को फ्रीज किया जाएगा। इसके बाद बची हुई राशि में से खाताधारक अपनी आवश्यकता के अनुसार यूपीआई के माध्यम से तत्काल निकासी कर सकेंगे। सिर्फ निकासी ही नहीं, ये सुविधाएं भी मिलेंगी नए मोबाइल एप के जरिए खाताधारक: ईपीएफ पासबुक बैलेंस देख सकेंगे क्लेम स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे प्रोफाइल व केवाईसी अपडेट कर सकेंगे अन्य EPFO सेवाओं का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म पर उठा सकेंगे हालांकि, यूएएन पोर्टल और उमंग ऐप की मौजूदा सेवाएं भी पहले की तरह उपलब्ध रहेंगी। नया ऐप केवल एक अतिरिक्त और तेज़ विकल्प होगा। अभी कैसी है निकासी प्रक्रिया? वर्तमान में ईपीएफ खाताधारकों को राशि निकालने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है, जिसमें कई बार लंबा समय लग जाता है। हालांकि ऑटो-सेटलमेंट मोड के तहत दावा दाखिल होने के तीन दिनों के भीतर भुगतान हो जाता है। हाल ही में EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी है। हर साल 5 करोड़ से ज्यादा दावे मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, EPFO हर साल 5 करोड़ से अधिक दावों का निपटान और भुगतान करता है। ऐसे में यूपीआई आधारित तत्काल निकासी सुविधा लागू होने से न सिर्फ कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि EPFO की कार्यप्रणाली भी और अधिक डिजिटल व पारदर्शी बनेगी। कुल मिलाकर, EPFO 3.0 के साथ भविष्य निधि से जुड़ी सेवाएं अब पहले से कहीं ज्यादा तेज़, आसान और आधुनिक होने जा रही हैं। कर्मचारियों के लिए यह बदलाव डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और मजबूत कदम माना जा रहा है।

भटनी–कुसम्ही खंड का DRM ने किया विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण, गुड्स शेड व स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर जोर

वाराणसी, 09 फरवरी 2026। पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल में माल यातायात को सुदृढ़ करने की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है। इसी क्रम में मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री आशीष जैन ने मंडल पर मॉल यातायात को बढ़ावा देने की कार्ययोजना के तहत मॉल टर्मिनलों की क्षमता वृद्धि एवं गुड्स शेडों के आधुनिकीकरण से जुड़े विकास कार्यों की समीक्षा के लिए भटनी–कुसम्ही रेल खंड का विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान DRM ने कुसम्ही रेलवे स्टेशन एवं कोल गुड्स शेड, सरदार नगर स्टेशन एवं गुड्स शेड, तथा चौरीचौरा, गौरीबाजार, बैतालपुर और नूनखार रेलवे स्टेशनों का गहन अवलोकन किया। उन्होंने माल ढुलाई से संबंधित व्यवस्थाओं, सुरक्षा मानकों और यात्री सुविधाओं की स्थिति का सूक्ष्म मूल्यांकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों में गति लाने और निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कुसम्ही स्टेशन व कोल गुड्स शेड पर फोकस कुसम्ही कोल गुड्स शेड के निरीक्षण के दौरान DRM ने लोडिंग–अनलोडिंग व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधों और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने अनाधिकृत प्रवेश पर रोक, सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने, निष्प्रयोज्य विद्युत पोल व स्लीपर हटाने, तथा परिचालनिक सुगमता के लिए गुड्स शेड में ट्रैक्शन (OHE) लाइन नंबर 5 और 6 की विद्युत आपूर्ति को अलग-अलग करने के निर्देश दिए। कुसम्ही स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के निरीक्षण के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, प्लेटफार्मों की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया। DRM ने स्टेशन भवन पर लगे CCTV कैमरों के ऊपर हाईलोजन लैंप लगाने, तथा रिक्त कमरों में एक कक्ष लोको पायलट व गार्ड के विश्रामालय और एक कक्ष में ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) स्थापित करने का निर्देश दिया। सरदार नगर: सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था पर जोर सरदार नगर स्टेशन एवं गुड्स साइडिंग के निरीक्षण में DRM ने माल ढुलाई, साइडिंग की सुरक्षा और सुविधाओं के उन्नयन की समीक्षा की। उन्होंने **गुड्स शेड की सुरक्षा पुख्ता करने, विद्युत प्रकाश बढ़ाने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्टेशन निरीक्षण के दौरान परिचालनिक व्यवस्था, स्टेशन पैनल, संरक्षा उपकरण, स्टेशन भवन और सर्कुलेटिंग एरिया की गहन जांच की गई। DRM ने प्लेटफार्म संख्या-01 पर रखे निष्प्रयोज्य सामान को हटाने, प्लेटफार्म संख्या-02 की इलेक्ट्रिकल वायरिंग दुरुस्त करने, तथा स्टेशन परिसर की हाई-मास्ट लाइट बदलने के निर्देश दिए। अन्य स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की समीक्षा चौरीचौरा, गौरीबाजार, बैतालपुर और नूनखार स्टेशनों पर DRM ने परिचालनिक व्यवस्था, स्टेशन पैनल, संरक्षा उपकरण, बर्थिंग ट्रैक, पॉइंट्स ज़ोन, स्टेशन भवन, सर्कुलेटिंग एरिया तथा यात्री सुविधाओं—जैसे सुरक्षा, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, फूड स्टॉल, वाटर बूथ, प्लेटफार्मों की स्थिति और पैदल उपरिगामी पुल के निकास—का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने प्लेटफार्म सतह दुरुस्त करने , साफ-सफाई और रख-रखाव में सुधार, तथा परिचालन में संरक्षा नियमों के कड़ाई से अनुपालन के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान DRM ने केंद्रीकृत स्टेशन पैनल और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से कार्यप्रणाली की जानकारी भी ली। इस अवसर पर वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) श्री विकास कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री शेख रहमान, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक श्री बलेंद्र पाल, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर श्री यशवीर सिंह, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी श्री एम. रमेश कुमार, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (परिचालन) श्री धर्मेंद्र यादव, मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर (गोरखपुर) श्री अमित मणि त्रिपाठी सहित वरिष्ठ पर्यवेक्षक और स्टेशन कर्मचारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के माध्यम से मंडल में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने, सुरक्षा को सुदृढ़ करने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

“गौ-वंश वध से वेतन–वैराग्य तक: योगी सरकार की नीतियों पर शंकराचार्य जी का तीखा प्रतिवाद, काशी में शास्त्रार्थ की घोषणा”

वाराणसी, 9 फरवरी 2026 : उत्तर प्रदेश में चल रहे 40 दिवसीय ‘उप्र राज्यमाता अभियान’ के 11वें दिन परमाराध्य उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ‘1008’ ने प्रदेश सरकार की नीतियों को लेकर कड़ा प्रतिवाद दर्ज कराया। श्री विद्यामठ, काशी में आयोजित पत्रकारवार्ता में शंकराचार्य जी ने गौ-वंश वध, बढ़ते मांस उत्पादन, राजकीय संरक्षण में संचालित वधशालाओं और सत्ता-धर्म के अंतर्विरोधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। शंकराचार्य जी ने कहा कि वर्तमान सरकार स्वयं को “गौ-भक्त” बताती है, लेकिन सरकारी आंकड़े इस दावे की पोल खोलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन की प्राथमिकता धर्म-रक्षा नहीं, बल्कि मांस-उद्योग को बढ़ावा देना बन गई है। इस दौरान उन्होंने आगामी 1 मार्च 2026 को काशी में ‘वेतन और वैराग्य’ विषय पर अखिल भारतीय स्तर के शास्त्रार्थ की घोषणा भी की, जिसे उन्होंने “शास्त्रीय मर्यादा की शुद्धि की दिशा में ऐतिहासिक कदम” बताया। सरकारी दावों पर सवाल, आंकड़ों के साथ घेरा पत्रकारवार्ता में शंकराचार्य जी ने कहा कि प्रदेश के पशुपालन मंत्री के माध्यम से यह स्वीकारोक्ति कराई गई कि सरकार गाय नहीं, बल्कि भैंस, बकरा और सुअर का वध कराती है। उन्होंने इसे हिन्दू समाज और गुरु गोरखनाथ की परंपरा के विपरीत बताया। उन्होंने दावा किया कि वर्ष **2017 में प्रदेश में मांस उत्पादन जहां लगभग 7.5 लाख टन था, वहीं वर्तमान में यह बढ़कर 13 लाख टन से अधिक हो गया है। उनके अनुसार, कागजों पर वधशालाओं की संख्या भले घटी हो, लेकिन पशु-वध की गति और मात्रा में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। शंकराचार्य जी ने यह भी कहा कि जिन गतिविधियों को पहले अपराध माना जाता था, आज उन्हें “उद्योग” का दर्जा देकर 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी (5 करोड़ रुपये तक) दी जा रही है। उनका अनुमान है कि बीते नौ वर्षों में प्रदेश में 16 करोड़ से अधिक निरपराध जीवों, जिनमें लगभग 4 करोड़ भैंस-वंश शामिल हैं, का वध हुआ है। केन्द्रीय बजट और चुनावी चंदे पर भी निशाना उन्होंने केन्द्रीय बजट 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि मांस निर्यातकों को दी गई 3 प्रतिशत अतिरिक्त ड्यूटी-फ्री छूट यह दर्शाती है कि शासन की दिशा किस ओर है। साथ ही, उन्होंने बड़े मांस निर्यात समूहों से मिलने वाले चुनावी चंदे और उन्हें मिल रहे राजकीय संरक्षण पर भी सवाल उठाए। ‘वेतन बनाम वैराग्य’ का शास्त्रीय विमर्श शंकराचार्य जी ने शास्त्रीय संदर्भ देते हुए कहा कि सिद्ध सिद्धांत पद्धति के अनुसार संन्यासी के लिए ‘भृति’ (वेतन) विष तुल्य है। उन्होंने तर्क दिया कि जो व्यक्ति एक ओर संन्यासी-महंत की परंपरा से जुड़ा है और दूसरी ओर उसी राजकोष से वेतन व सुविधाएं ले रहा है, जो हिंसक राजस्व से भरा है—उसके लिए धर्म-रक्षा का दावा कैसे संभव है? इसी शास्त्रीय द्वंद्व के समाधान हेतु उन्होंने तीन चरणों के कार्यक्रम की घोषणा की— 19 फरवरी 2026: देशभर में स्वतंत्र विमर्श 1 मार्च 2026: काशी में अखिल भारतीय संत-विद्वद्गोष्ठी और ‘वेतन बनाम वैराग्य’ पर शास्त्रार्थ 11 मार्च 2026: लखनऊ में अभियान का अंतिम निष्कर्ष और आगामी “धर्म-शासनादेश” गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित करने की मांग पत्रकारवार्ता के अंत में शंकराचार्य जी ने आशा जताई कि शेष दिनों में सरकार आत्म-चिंतन करेगी और गोमाता को ‘राज्यमाता’ घोषित कर पशु-वध और मांस-उद्योग से जुड़े इस “क्रूर कारोबार” पर रोक लगाएगी। धर्म, शासन और समाज के इस टकराव ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति और नीतियों पर व्यापक बहस को जन्म दे दिया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

बम धमकी से थमी अदालत की सांसें, पप्पू यादव की जमानत पर सुनवाई टली

पटना। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी। पटना सिविल कोर्ट को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट समेत पूरे न्यायालय परिसर को एहतियातन खाली करा लिया गया। सुरक्षा कारणों से कोर्ट की सभी कार्यवाहियां स्थगित कर दी गईं, जिसके चलते पप्पू यादव की बेल पर फैसला टल गया। फिलहाल उन्हें पटना के बेऊर जेल में ही रहना होगा। सोमवार सुबह पटना सिविल कोर्ट के आधिकारिक ईमेल पर आरडीएक्स और आईईडी से धमाके की धमकी मिली। इस सूचना के मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस की टीमों ने पूरे कोर्ट परिसर को घेर लिया। एमपी-एमएलए कोर्ट सहित अन्य अदालतों को तत्काल खाली कराया गया और जगह-जगह सघन तलाशी अभियान चलाया गया। सुरक्षा जांच के कारण कोर्ट की नियमित कार्यवाही पूरी तरह प्रभावित रही। इसी बीच पप्पू यादव की जमानत याचिका पर निर्धारित सुनवाई भी नहीं हो सकी। अदालत की कार्यवाही स्थगित होने के चलते मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब उनकी जमानत पर सुनवाई अगली तारीख पर ही संभव हो पाएगी। गौरतलब है कि पप्पू यादव फिलहाल बेऊर जेल में बंद हैं। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पीएमसीएच ले जाकर मेडिकल जांच कराई गई थी। पीएमसीएच के अधीक्षक राजीव कुमार के मुताबिक जांच में उनकी सेहत सामान्य पाई गई थी, हालांकि जेल ले जाते समय वे एंबुलेंस में लेटे हुए दिखाई दिए थे, जिसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हुईं। पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात 31 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी ऐसे वक्त हुई, जब वे हाल ही में सामने आए NEET छात्रा की मौत के मामले को लेकर सरकार और प्रशासन पर लगातार सवाल उठा रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की थी। कोर्ट परिसर को मिली बम धमकी ने एक बार फिर न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ईमेल भेजने वाले की पहचान और धमकी की सत्यता की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।

लोकसभा में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारों के बीच कार्यवाही स्थगित

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान सियासी टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और लगातार व्यवधान के कारण प्रश्नकाल भी नहीं चल सका। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि नियमों के तहत बोलने का अधिकार सभी सदस्यों को है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सदन गतिरोध, नारेबाजी और हंगामे के लिए नहीं, बल्कि गंभीर चर्चा और जनहित के मुद्दों पर संवाद के लिए है। स्पीकर की इस टिप्पणी के बावजूद विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहा। इस बीच सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहा है। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी दलों के नेताओं ने सदन में बैठक की, जिसमें इस प्रस्ताव को लेकर रणनीति पर मंथन किया गया। विपक्ष का आरोप है कि सदन में उनकी बातों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। कार्यवाही के दौरान विपक्षी सांसदों ने ‘राहुल गांधी को बोलने दो’ के नारे लगाए और सरकार पर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का आरोप लगाया। कांग्रेस पार्टी ने साफ तौर पर कहा है कि यदि राहुल गांधी को सदन में अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है तो कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकती है, अन्यथा संसद में लगातार हंगामे की स्थिति बनी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ संसद पहुंचे। सदन के कामकाज को लेकर पूछे गए सवाल पर खरगे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कौन कहता है कि आज सदन नहीं चलेगा?”—उनके इस बयान को विपक्ष की ओर से सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, बजट सत्र के बीच बढ़ता राजनीतिक टकराव न सिर्फ संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है, बल्कि अहम विधायी चर्चाओं पर भी विराम लगा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति बन पाएगी, या आने वाले दिनों में संसद का गतिरोध और गहराएगा।

छपरा में न्यायिक गतिरोध पर जिला न्यायाधीश का संवाद का संदेश, अधिवक्ताओं से कार्य बहिष्कार खत्म करने की अपील

छपरा। जिले में चल रहे अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार को लेकर जिला न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग ने संवाद और सहयोग पर जोर दिया है। रविवार को अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे न्यायिक कार्य ठप रखने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाएं और कार्य बहिष्कार समाप्त करें। जिला न्यायाधीश ने कहा कि अधिवक्ताओं की जो भी शिकायतें या समस्याएं हैं, उन पर खुलकर और सकारात्मक माहौल में चर्चा करने के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी विवाद या असहमति का समाधान संवाद से ही संभव है, न कि न्यायिक कार्य को बाधित करके। उन्होंने यह भी कहा कि अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठकर बिंदुवार चर्चा की जा सकती है, ताकि हर मुद्दे को गंभीरता से समझा जाए और उसका व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। जिला न्यायाधीश ने अधिवक्ताओं से आग्रह किया कि वे सोमवार से न्यायिक कार्य प्रारंभ करें और अपनी टीम के साथ आकर संवाद स्थापित करें। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि आपसी विश्वास, बातचीत और सहयोग के माध्यम से सभी लंबित मुद्दों का समाधान अवश्य निकल आएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक व्यवस्था का सुचारू संचालन आम जनता के हित में है और इसमें न्यायपालिका तथा अधिवक्ता दोनों की समान जिम्मेदारी है। जिला न्यायाधीश की इस अपील को न्यायिक गतिरोध समाप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें अधिवक्ताओं के अगले कदम पर टिकी हैं, जिससे छपरा की न्यायिक व्यवस्था फिर से पूरी गति से आगे बढ़ सके।

स्वैग, स्क्रीन और स्मार्टर ब्रेन की जंग: क्या Gen-Z वाकई पिछड़ रही है?

लाइफस्टाइल: साल 2025 के साथ ही दुनिया ने ‘बीटा जनरेशन’ का स्वागत कर लिया है, लेकिन बाज़ार, सोशल मीडिया और बहसों के केंद्र में आज भी ‘Gen-Z’ ही है। कॉलेज की कैंटीन से लेकर कॉर्पोरेट के क्यूबिकल्स तक अपनी पहचान बनाने में जुटी यह पीढ़ी अक्सर अपने बेबाक अंदाज़, डिजिटल समझ और अलग सोच के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार Gen-Z चर्चा में है, और वजह चौंकाने वाली है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय स्टडी ने इस कूल कही जाने वाली पीढ़ी की स्मार्टनेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली बार इतिहास में… इस शोध का दावा है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब बच्चे, बुद्धिमत्ता के पैमाने पर अपने माता-पिता से पीछे रह गए हैं। स्टडी के अनुसार, ‘जनरेशन Z’ (Gen-Z) अपने से पिछली पीढ़ी यानी मिलेनियल्स (Millennials) के मुकाबले औसतन कम स्मार्ट साबित हो रही है। इस रिपोर्ट को और गंभीर बनाता है न्यूरोसाइंटिस्ट और पूर्व शिक्षक डॉ. जेरेड कूनी होर्वाथ का बयान, जो उन्होंने अमेरिकी सीनेट के सामने दिया। डॉ. होर्वाथ के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह है — पढ़ाई में तकनीक और स्क्रीन का अत्यधिक इस्तेमाल (EdTech Overuse) रिसर्च में क्या निकला सामने? स्टडी में Gen-Z से जुड़ी कुछ चिंताजनक बातें सामने आई हैं: ध्यान लगाने की क्षमता में गिरावट गणित और पढ़ने का कौशल कमजोर समस्या सुलझाने की क्षमता (Problem Solving Ability) में कमी यानी जानकारी तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा आसान है, लेकिन उसे समझने, जोड़ने और लागू करने की क्षमता कमजोर होती जा रही है। स्क्रीन बन रही है सबसे बड़ी दुश्मन? डॉ. होर्वाथ के अनुसार, आज की पीढ़ी का बड़ा हिस्सा अपना ज्यादातर समय मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप स्क्रीन के सामने बिताता है। हैरानी की बात यह है कि स्कूल-कॉलेज जाने के मौके पहले से ज्यादा मिलने के बावजूद, 2010 के बाद से सीखने की क्षमता में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। असल में, इंसानी दिमाग आमने-सामने बातचीत, गहराई से पढ़ने और लंबे फोकस के लिए विकसित हुआ है। इसके उलट, तेज़ी से स्क्रॉल करना छोटे-छोटे बुलेट पॉइंट्स में जानकारी लेना मल्टीटास्किंग के नाम पर ध्यान बांटना ये सब मिलकर दिमाग की गहरी समझ विकसित करने की प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं। डिजिटल पढ़ाई: सहायक या बाधा? स्टडी का साफ संकेत है कि डिजिटल एजुकेशन अपने आप में बुरी नहीं है, लेकिन उसका अत्यधिक और असंतुलित इस्तेमाल दिमागी विकास के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है। आसान शब्दों में कहें तो — स्क्रीन ने पढ़ाई को तेज़ जरूर किया है, लेकिन सोच को उथला भी बना दिया है। Gen-Z अभी भी युवा है, सीखने और बदलने की क्षमता रखती है। सवाल यह नहीं कि यह पीढ़ी कम स्मार्ट है या ज्यादा, सवाल यह है कि क्या हम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दिमाग को मजबूत करने के लिए कर रहे हैं, या सिर्फ समय काटने के लिए? क्योंकि आने वाली बीटा जनरेशन उसी रास्ते पर चलेगी, जो आज Gen-Z बना रही है।

दिनदहाड़े हथियारों के बल पर ज्वेलरी शॉप लूट, दो मिनट में 20 लाख की वारदात से सहमा सारण

सारण (बिहार), रविवार: बिहार के सारण जिले में अपराधियों के हौसले एक बार फिर खुलेआम दिखाई दिए, जब मांझी थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर बाजार में स्थित एक ज्वेलरी शॉप से दिनदहाड़े करीब 20 लाख रुपये की लूट कर ली गई। इस सनसनीखेज वारदात को दो बाइक पर सवार होकर आए छह बदमाशों ने महज दो मिनट में अंजाम दिया और फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बदमाश अचानक दुकान पर पहुंचे और अंदर घुसते ही पिस्टल दिखाकर दुकानदार व ग्राहकों को आतंकित कर दिया। हथियारों के बल पर सभी को बंधक बना लिया गया। इसके बाद बदमाशों ने सोने-चांदी के आभूषण बोरे में भरने शुरू कर दिए। दहशत फैलाने के लिए अपराधियों ने फायरिंग भी की, जिससे पूरे बाजार में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे। वीडियो में कैद हुई पूरी वारदात घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि तीन बदमाश दुकान के अंदर मौजूद हैं। दो के हाथों में पिस्टल है, जबकि एक बदमाश गन पॉइंट पर ग्राहकों को बंधक बनाए हुए है। वहीं, दो अन्य बदमाश तेजी से ज्वेलरी को बोरे में भरते नजर आ रहे हैं। दुकान के अंदर मौजूद ग्राहकों की चीख-पुकार भी वीडियो में सुनी जा सकती है। दुकानदार ने बताई आपबीती दुकान के मालिक बृज बिहारी गुप्ता ने बताया कि वे ग्राहकों को आभूषण दिखा रहे थे, तभी अचानक दो बाइक पर सवार होकर छह बदमाश पहुंचे। उन्होंने बिना कुछ कहे पिस्टल निकाल ली और लूटपाट शुरू कर दी। फायरिंग की आवाज सुनते ही पूरा बाजार दहल उठा। घटना की सूचना मिलते ही मांझी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि दुकान और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज हाथ लगी है, जिसके आधार पर बदमाशों की पहचान की जा रही है। इलाके की नाकेबंदी कर फरार अपराधियों की तलाश तेज कर दी गई है। दिनदहाड़े हुई इस बड़ी लूट की घटना ने एक बार फिर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापारी वर्ग में दहशत का माहौल है और लोग सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने की मांग कर रहे हैं।

बिहार में अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की कथा के दौरान हंगामा, भीड़ बेकाबू होने पर पुलिस का लाठीचार्ज

न्यूज डेस्क | बिहार : बिहार में प्रसिद्ध कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा के दौरान उस समय अफरातफरी मच गई, जब उनके कार्यक्रम में प्रवेश के लिए उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया। हालात इस कदर बिगड़ गए कि भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या अनुमान से कहीं अधिक पहुंच गई थी। प्रवेश के लिए केवल एक ही गेट खोला गया था, जिससे हजारों श्रद्धालु एक साथ अंदर घुसने की कोशिश करने लगे। इसी दौरान धक्का-मुक्की बढ़ गई और लोहे का गेट दबाव के कारण उखड़ गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। भीड़ के बेकाबू होते ही मौके पर मौजूद पुलिस बल ने पहले समझाइश और बैरिकेडिंग के जरिए लोगों को पीछे हटाने का प्रयास किया, लेकिन जब हालात नहीं संभले तो हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया गया। इस दौरान कुछ श्रद्धालुओं को मामूली चोटें आने की भी सूचना है, हालांकि किसी गंभीर घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्यक्रम के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के इंतजाम किए गए थे, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षा से कहीं अधिक होने के कारण दबाव बढ़ गया। घटना के बाद अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया और प्रवेश-निकास की व्यवस्था को अस्थायी रूप से बंद कर हालात को नियंत्रण में लिया गया। वहीं, आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है और कथा कार्यक्रम आगे की व्यवस्थाओं के साथ जारी रखने की तैयारी की जा रही है।

रक्षा से चिप निर्माण तक: भारत–मलेशिया साझेदारी में आई नई तेजी, पीएम मोदी बोले—यह दोस्ती भविष्य की नींव

कुआलालंपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मलेशिया यात्रा ने भारत–मलेशिया संबंधों को नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच हुई अहम वार्ता के बाद दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। इस दौरान कुल 11 द्विपक्षीय समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए, जिन्हें दोनों देशों के रिश्तों में “नए अध्याय की शुरुआत” माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मलेशिया की साझेदारी केवल वर्तमान की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देश मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, समृद्धि और सुरक्षा को बढ़ावा देंगे। रक्षा सहयोग में नई दिशा वार्ता के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग को गहरा करने पर विशेष जोर दिया गया। संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा उपकरणों के निर्माण और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। पीएम मोदी ने कहा कि **रक्षा साझेदारी आपसी विश्वास और साझा सुरक्षा हितों का प्रतीक है। ऊर्जा और ग्रीन ट्रांजिशन पर फोकस ऊर्जा क्षेत्र में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। हरित हाइड्रोजन, सोलर और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों से सतत विकास लक्ष्यों को गति मिलेगी। सेमीकंडक्टर और मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा कदम सेमीकंडक्टर निर्माण को लेकर हुए समझौते को खास अहमियत दी जा रही है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहल को मलेशिया की तकनीकी विशेषज्ञता से नई मजबूती मिलेगी। इससे वैश्विक सप्लाई चेन में दोनों देशों की भूमिका और मजबूत होगी। व्यापार और निवेश को मिलेगी रफ्तार व्यापारिक संबंधों को बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और MSMEs के लिए नए अवसर खोलने पर भी सहमति बनी। दोनों नेताओं ने व्यापार बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर तक ले जाने का संकल्प दोहराया। पीएम मोदी का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत और मलेशिया की दोस्ती विश्वास, सम्मान और साझा भविष्य पर आधारित है। आज किए गए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के युवाओं, उद्योगों और अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर लेकर आएंगे।” मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भी भारत को विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि यह सहयोग दोनों देशों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। कुल मिलाकर, पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि रक्षा से ऊर्जा और सेमीकंडक्टर तक भारत–मलेशिया की दोस्ती अब सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि भविष्य-केंद्रित रणनीतिक साझेदारी बन चुकी है।