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दिशा पाटनी की लव लाइफ में नई एंट्री! कौन हैं 6 साल छोटे रूमर्ड ब्वॉयफ्रेंड तलविंदर सिंह, जिनके साथ दिखीं एक्ट्रेस

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी एक बार फिर अपनी निजी ज़िंदगी को लेकर चर्चा में हैं। टाइगर श्रॉफ से लंबे समय पहले हुए ब्रेकअप के बाद दिशा ने अपनी पर्सनल लाइफ को हमेशा निजी रखा, लेकिन हाल ही में उदयपुर में नूपुर सेनन की शादी के दौरान सामने आए एक वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। वायरल क्लिप में दिशा एक शख्स के साथ हाथों में हाथ डाले नज़र आईं—बताया जा रहा है कि यह शख्स तलविंदर सिंह हैं, जो उम्र में दिशा से करीब 6 साल छोटे हैं। उदयपुर वेडिंग से वायरल हुआ वीडियो शादी के फंक्शन के दौरान दिशा पाटनी का सिंपल लेकिन एलिगेंट लुक और उनके साथ मौजूद मिस्ट्री मैन ने सबका ध्यान खींचा। वीडियो में तलविंदर सिंह अक्सर नकाब या कैप में नज़र आए, जिससे उनकी पहचान को लेकर जिज्ञासा और बढ़ गई। यही वजह है कि सोशल मीडिया यूज़र्स उन्हें “नकाब में रहने वाला शख्स” कहकर पुकारने लगे। कौन हैं तलविंदर सिंह? मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया चर्चाओं के मुताबिक, तलविंदर सिंह का ताल्लुक न तो सीधे फिल्म इंडस्ट्री से है और न ही वह किसी बड़े सेलिब्रिटी परिवार से आते हैं। कहा जा रहा है कि वह फिटनेस और बिज़नेस से जुड़े हुए हैं, हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। तलविंदर लाइमलाइट से दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं, यही कारण है कि उनकी पब्लिक प्रोफाइल काफी लो-की बताई जाती है। उम्र का फासला और बढ़ी चर्चा बताया जा रहा है कि तलविंदर सिंह, दिशा पाटनी से लगभग 6 साल छोटे हैं। बॉलीवुड में उम्र के फासले को लेकर पहले भी कई रिश्ते सुर्खियों में रहे हैं, ऐसे में दिशा और तलविंदर की जोड़ी को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। सोशल मीडिया पर रिएक्शन वायरल वीडियो के बाद फैंस दो हिस्सों में बंटे दिखे। कुछ लोग दिशा को नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दे रहे हैं, तो कुछ इसे महज़ एक दोस्ताना पल बता रहे हैं। हालांकि, दिशा पाटनी या तलविंदर सिंह की ओर से अब तक इस रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दिशा की चुप्पी, अटकलें बरकरार दिशा पाटनी हमेशा से अपनी निजी ज़िंदगी पर कम बोलती आई हैं। टाइगर श्रॉफ से ब्रेकअप के बाद उन्होंने करियर पर फोकस किया और फिल्मों व ब्रांड एंडोर्समेंट में व्यस्त रहीं। ऐसे में तलविंदर सिंह के साथ उनकी नज़दीकियों की खबरों ने एक बार फिर उनकी लव लाइफ को सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल, यह साफ है कि दिशा पाटनी और तलविंदर सिंह को लेकर चल रही बातें अभी अफवाहों के दायरे में हैं। आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन इतना तय है कि यह “नकाब में रहने वाला” शख्स इन दिनों बॉलीवुड गॉसिप का नया केंद्र बन चुका है।

4 साल बाद विराट कोहली की ताजपोशी: 37 की उम्र में फिर बने वनडे के नंबर-1 बल्लेबाज़, रोहित शर्मा को झटका

न्यूज़ डेस्क | करीब चार साल के लंबे इंतज़ार के बाद भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार विराट कोहली ने एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम कर ली है। 37 साल की उम्र में कोहली ने आईसीसी मेंस वनडे बैटर्स रैंकिंग में नंबर-1 का स्थान हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे मुकाबले में खेली गई शानदार 93 रनों की पारी के दम पर पाई। आईसीसी द्वारा जारी ताज़ा वनडे बल्लेबाज़ों की रैंकिंग में विराट कोहली को एक स्थान का फायदा हुआ, जिससे वह सीधे शीर्ष पायदान पर पहुंच गए। इस रेस में उन्होंने अपने ही साथी और भारतीय टीम के कप्तान रोहित शर्मा को पीछे छोड़ दिया। रैंकिंग अपडेट में रोहित शर्मा को भारी नुकसान हुआ है और वह दो स्थान फिसलकर तीसरे नंबर पर पहुंच गए हैं।  न्यूजीलैंड के खिलाफ पारी बनी टर्निंग पॉइंट न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे मैच में विराट कोहली ने जिस तरह संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाया, उसने चयनकर्ताओं और रैंकिंग पैनल दोनों को प्रभावित किया। 93 रनों की इस पारी में कोहली का अनुभव और क्लास साफ झलका, जिसका सीधा फायदा उन्हें रैंकिंग में मिला। 37 साल की उम्र में नंबर-1 बनना यह साबित करता है कि विराट कोहली आज भी विश्व क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली बल्लेबाज़ों में से एक हैं। फिटनेस, निरंतरता और बड़े मैचों में प्रदर्शन—इन तीनों के दम पर कोहली ने एक बार फिर खुद को शीर्ष पर स्थापित किया है। रोहित शर्मा को झटका वहीं दूसरी ओर, रोहित शर्मा के लिए यह रैंकिंग अपडेट झटके जैसा रहा। दो स्थान की गिरावट के साथ वह तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। हालांकि, क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि रोहित के पास वापसी का पूरा मौका है और आने वाले मुकाबलों में वह फिर से रैंकिंग में ऊपर चढ़ सकते हैं। भारतीय क्रिकेट के लिए खुशी की बात आईसीसी वनडे रैंकिंग में भारतीय बल्लेबाज़ों का शीर्ष स्थानों पर बने रहना देश के क्रिकेट प्रशंसकों के लिए गर्व की बात है। विराट कोहली की यह उपलब्धि न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भारतीय क्रिकेट की मजबूती को भी दर्शाती है। अब सभी की निगाहें आने वाले वनडे मुकाबलों पर टिकी हैं, जहां विराट कोहली अपनी नंबर-1 पोज़िशन को बरकरार रखने और रोहित शर्मा अपनी खोई हुई रैंकिंग वापस पाने की कोशिश करेंगे।

150 साल बाद स्पेन को मिलने जा रही है रानी, जानिए कौन हैं राजकुमारी लियोनोर जो इतिहास रचने को तैयार

मैड्रिड। स्पेन के शाही इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। करीब 150 साल बाद पहली बार देश की गद्दी पर रानी का शासन देखने को मिलेगा। राजा फेलिप VI और रानी लेटिजिया की 20 वर्षीय बेटी राजकुमारी लियोनोर स्पेन की अगली शासक होंगी। वह वर्तमान में प्रिंसेस ऑफ ऑस्टुरियस (Crown Princess) हैं और संवैधानिक रूप से सिंहासन की उत्तराधिकारी हैं। 150 साल बाद महिला शासक स्पेन में आखिरी बार रानी इसाबेला द्वितीय का शासन 19वीं सदी में रहा था, जिनका राज 1868 में समाप्त हुआ। उसके बाद से स्पेन में केवल पुरुष राजाओं ने ही शासन संभाला। अब लियोनोर के उत्तराधिकारी बनने से यह लंबा अंतराल खत्म होने जा रहा है। कौन हैं राजकुमारी लियोनोर * पूरा नाम: लियोनोर दे बोर्बोन ई ऑर्टिज़ * जन्म: 31 अक्टूबर 2005 * पद: प्रिंसेस ऑफ ऑस्टुरियस (स्पेन की क्राउन प्रिंसेस) * माता-पिता: राजा फेलिप VI और रानी लेटिजिया लियोनोर को बचपन से ही भावी शासक के रूप में तैयार किया जा रहा है। उन्होंने स्पेन और विदेशों में उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त की है और आधुनिक राजशाही की जिम्मेदारियों को समझने के लिए कूटनीति, इतिहास और राजनीति का अध्ययन किया है। संविधान के प्रति शपथ अक्टूबर 2023 में 18 वर्ष की उम्र पूरी करने पर लियोनोर ने स्पेन की संसद में संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी। यह कदम उन्हें औपचारिक रूप से सिंहासन की उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित करता है। सैन्य प्रशिक्षण भी अनिवार्य स्पेन की परंपरा के अनुसार भावी शासक को तीनों सेनाओं—थलसेना, नौसेना और वायुसेना—का प्रशिक्षण लेना होता है। लियोनोर ने सैन्य प्रशिक्षण की शुरुआत कर दी है, जिससे वह देश की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर की भूमिका निभाने के लिए तैयार होंगी। आधुनिक दौर की रानी राजकुमारी लियोनोर को एक आधुनिक, शिक्षित और संवेदनशील नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में सामाजिक मुद्दों, युवाओं, शिक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर खुलकर बोलती हैं। यही वजह है कि स्पेन की युवा पीढ़ी में उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। कब संभालेंगी शासन? फिलहाल राजा फेलिप VI गद्दी पर हैं। भविष्य में उनके पद छोड़ने या संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद लियोनोर स्पेन की पहली आधुनिक रानी के रूप में शासन संभालेंगी। स्पेन ही नहीं, पूरी दुनिया की निगाहें अब इस युवा राजकुमारी पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में इतिहास रचने के लिए तैयार हैं।

भारी क्रेन गिरने से थाईलैंड में भीषण रेल हादसा: 22 यात्रियों की मौत, 30 से अधिक घायल

बैंकॉक/नखोन रत्चासिमा, 14 जनवरी 2026: आज सुबह थाईलैंड के उत्तर-पूर्वी नखोन रत्चासिमा प्रांत के सिखियो जिले में एक भयानक रेल दुर्घटना हुई। एक चलती पैसेंजर ट्रेन पर निर्माणाधीन क्रेन गिरने से ट्रेन पटरी से उतर गई और इसके कारण कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 से अधिक यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। स्थानीय पुलिस एवं अधिकारियों ने बताया कि यह हादसा बुधवार सुबह लगभग 9 बजे उस समय हुआ जब बैंकॉक से उबोन रत्चथानी की ओर जा रही ट्रेन हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के नीचे से गुजर रही थी। इसी दौरान ऊपर से काम कर रही भारी क्रेन अनियंत्रित होकर ट्रेन पर गिर पड़ी। क्रेन की टक्कर से ट्रेन के कई डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए और ट्रेन डिवर हो गई। रिपोर्टों के अनुसार क्रेन दुर्घटना की तेज़ टक्कर से तीन डिब्बों पर गंभीर प्रभाव पड़ा और कई यात्री मलबे में फँस गए। घटना के तुरंत बाद ट्रेन के कुछ हिस्सों में आग भी लगी, जिसे दमकल और बचाव कर्मियों ने नियंत्रित किया। बचाव दल ने घायल यात्रियों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है और राहत कार्य जारी है। स्थानीय पुलिस प्रमुख थचापोन चिनावोंग ने पुष्टि की कि अब तक 22 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं और घायलों की संख्या कम से कम 30 है, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई यात्री ट्रेन के मलबे में दबे हो सकते हैं। इस रेल मार्ग पर भारी क्रेन के गिरने से पैसेंजर ट्रेन की विंध्यगति थम गई और राहत-बचाव कार्य में स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और चिकित्सा टीमें जुटी हुई हैं। दुर्घटना की वजहों की जांच अधिकारियों द्वारा शुरू कर दी गई है, जिसमें निर्माण साइट पर सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच शामिल है।

दिल्ली में घर और जमीन खरीदना होगा और महंगा, सर्किल रेट में 40% तक बढ़ोतरी की तैयारी

नई दिल्ली। दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह खबर झटका देने वाली है। रेखा गुप्ता सरकार ने राजधानी में रिहायशी संपत्तियों और कृषि भूमि के सर्किल रेट में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी कर ली है। प्रस्ताव के अनुसार सर्किल रेट में 10 से 40 प्रतिशत तक इजाफा किया जा सकता है, जिससे घर, फ्लैट और जमीन खरीदना सीधे तौर पर महंगा हो जाएगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सर्किल रेट बढ़ने का सीधा असर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क पर पड़ेगा। यानी खरीदारों को अब पहले की तुलना में ज्यादा टैक्स चुकाना होगा। लंबे समय से दिल्ली में सर्किल रेट में बदलाव नहीं किया गया था, जबकि बाजार भाव लगातार बढ़ते रहे। इसी अंतर को खत्म करने के लिए सरकार यह कदम उठाने जा रही है। श्रेणियों में होंगे बदलाव, बनेंगी उप-श्रेणियां प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि मौजूदा प्रॉपर्टी श्रेणियों को और स्पष्ट करने के लिए नई उप-श्रेणियां बनाई जाएं। इससे अलग-अलग इलाकों, कॉलोनियों और सुविधाओं के आधार पर सर्किल रेट तय किए जा सकेंगे। माना जा रहा है कि पॉश इलाकों में बढ़ोतरी ज्यादा हो सकती है, जबकि सामान्य और बाहरी क्षेत्रों में सीमित बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। सरकार का तर्क सरकार का कहना है कि सर्किल रेट और वास्तविक बाजार कीमतों के बीच बड़ा अंतर है, जिससे राजस्व को नुकसान हो रहा है। सर्किल रेट बढ़ने से सरकारी आय में इजाफा होगा और प्रॉपर्टी सौदों में पारदर्शिता आएगी। आम लोगों पर पड़ेगा असर हालांकि, इस फैसले से मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई लागत के कारण कुछ समय के लिए प्रॉपर्टी बाजार में सुस्ती भी आ सकती है। कब होगा लागू? फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है। संबंधित विभागों और हितधारकों से राय लेने के बाद सरकार अंतिम फैसला लेगी। यदि मंजूरी मिलती है तो आने वाले महीनों में नए सर्किल रेट लागू किए जा सकते हैं। कुल मिलाकर, दिल्ली में प्रॉपर्टी खरीदने की सोच रहे लोगों को जल्द फैसला लेना पड़ सकता है, क्योंकि सर्किल रेट बढ़ते ही घर और जमीन की कीमतें और जेब पर बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है।

माघ मेला में अफरा-तफरी: सेक्टर-5 के शिविर में भीषण आग, मची भगदड़; दमकल ने पाया काबू

प्रयागराज। माघ मेला क्षेत्र में मंगलवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सेक्टर-5 स्थित एक शिविर में अचानक भीषण आग लग गई। आग की तेज लपटें और धुएं का गुबार दूर से ही दिखाई देने लगा, जिससे मेले में मौजूद श्रद्धालुओं और कल्पवासियों में दहशत फैल गई। हालात बिगड़ते देख लोग अपने-अपने तंबू छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे, जिससे कुछ देर के लिए भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, मेला प्रशासन और अग्निशमन विभाग की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कई दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग को फैलने से रोक लिया गया, जिससे आसपास के अन्य शिविरों को बड़ा नुकसान होने से बचा लिया गया। प्रशासन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या किसी ज्वलनशील सामग्री का संपर्क माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन शिविर में रखा सामान और तंबू पूरी तरह जलकर खाक हो गए। मेला प्रशासन ने मौके पर मौजूद लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अग्नि सुरक्षा मानकों को और सख्ती से लागू किया जाएगा तथा शिविरों में बिजली और गैस के उपयोग की नियमित जांच की जाएगी। घटना के बाद माघ मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और चौकसी और मजबूत कर दी गई है, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कर सकें।

‘ग्रीन फाइल’ से सत्ता की सियासत तक: बंगाल में ममता बनर्जी बनाम ईडी आमने-सामने, 2026 चुनाव से क्या है कनेक्शन?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कथित ‘ग्रीन फाइल’ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। ईडी द्वारा राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) पर की गई छापेमारी और इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप ने इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह कार्रवाई केवल जांच तक सीमित है या फिर इसके तार 2026 के विधानसभा चुनाव से जुड़े हुए हैं। क्या है ‘ग्रीन फाइल’ विवाद सूत्रों के मुताबिक, ‘ग्रीन फाइल’ उन दस्तावेजों और डिजिटल जानकारियों को कहा जा रहा है, जिनमें कथित तौर पर चुनावी रणनीति, फंडिंग और राजनीतिक अभियानों से जुड़ी अहम जानकारियां दर्ज हैं। ईडी का आरोप है कि कोयला तस्करी से जुड़े अवैध धन का एक हिस्सा आई-पैक तक पहुंचा और उसका इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों में किया गया। आई-पैक पर ईडी की कार्रवाई ईडी ने कोयला तस्करी मामले की जांच के सिलसिले में आई-पैक से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके पास ऐसे सबूत हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि अवैध फंड को राजनीतिक सलाह और चुनावी प्रबंधन में लगाया गया। इसी कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं और ईडी की टीम से सवाल-जवाब किए। ममता बनर्जी का पलटवार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईडी की कार्रवाई को “राजनीतिक बदले की भावना” से प्रेरित बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। ममता ने कहा कि बंगाल में लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमला किया जा रहा है। भाजपा का आरोप वहीं भाजपा ने ममता बनर्जी के हस्तक्षेप पर कड़ा एतराज जताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जांच एजेंसी को अपना काम करने से रोका गया और इससे साफ होता है कि सरकार कुछ छिपाना चाहती है। भाजपा ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले, चाहे वे कितने भी बड़े पद पर क्यों न हों।  2026 चुनाव से कनेक्शन? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा विवाद 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल को प्रभावित कर सकता है। एक तरफ ममता बनर्जी इसे केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई के रूप में पेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा इसे भ्रष्टाचार और अवैध फंडिंग का मामला बता रही है। ऐसे में ‘ग्रीन फाइल’ बंगाल की राजनीति में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकती है। फिलहाल ईडी अपनी जांच पर कायम है और आने वाले दिनों में और पूछताछ व कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे जनसमर्थन जुटाने के अवसर के रूप में देख रही है। साफ है कि ‘ग्रीन फाइल’ विवाद ने बंगाल की राजनीति को एक बार फिर तीखे टकराव के रास्ते पर ला खड़ा किया है, जिसका असर 2026 के चुनावी रण में साफ नजर आ सकता है।

दही-चूड़ा भोज से सियासी संदेश! विजय सिन्हा के घर पहुंचे तेज प्रताप यादव, एनडीए से मिला खुला ऑफर

पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की राजनीति में उस समय नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए। इस मुलाकात को केवल सामाजिक शिष्टाचार तक सीमित मानने के बजाय राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के यहां आयोजित इस भोज में एनडीए के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री संतोष सुमन और भाजपा के वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव ने तेज प्रताप यादव का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने सार्वजनिक मंच से तेज प्रताप यादव को एनडीए में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे दिया, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई। भोज के दौरान माहौल पूरी तरह सौहार्दपूर्ण नजर आया। नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई और पारंपरिक व्यंजनों के साथ राजनीतिक संकेत भी दिए गए। संतोष सुमन ने कहा कि “राजनीति में दरवाजे कभी बंद नहीं होते, जो विकास और बिहार के हित में सोचता है, उसका स्वागत है।” वहीं रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप की मौजूदगी को “सकारात्मक संकेत” करार दिया। तेज प्रताप यादव ने हालांकि एनडीए में शामिल होने को लेकर कोई सीधा बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि मकर संक्रांति जैसे पर्व पर सामाजिक सौहार्द और आपसी संवाद राजनीति से ऊपर होते हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल संयोग नहीं हो सकती। हाल के दिनों में राजद के भीतर चल रही अंदरूनी चर्चाओं और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों के बीच तेज प्रताप यादव की यह मौजूदगी कई अटकलों को जन्म दे रही है। हालांकि, फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुल मिलाकर, दही-चूड़ा की इस थाली ने बिहार की राजनीति में नए संकेत जरूर दे दिए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह मुलाकात केवल त्योहार की सौहार्दपूर्ण परंपरा थी या किसी बड़े सियासी बदलाव की भूमिका।

डिलीवरी बॉय की सुरक्षा को प्राथमिकता: 10 मिनट डिलीवरी मॉडल पर लगी रोक, केंद्र के निर्देश के बाद क्विक कॉमर्स कंपनियों का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के सख्त रुख और श्रम मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद देश की प्रमुख क्विक कॉमर्स कंपनियों ने 10 मिनट में डिलीवरी देने वाली सेवा को बंद करने का फैसला किया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया की पहल के बाद ब्लिंकिट, जेप्टो, जोमैटो और स्विगी ने इस अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी मॉडल को समाप्त करने पर सहमति जताई है। यह कदम डिलीवरी पार्टनर्स की सुरक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। मंत्रालय के अनुसार, 10 मिनट में डिलीवरी के दबाव के कारण डिलीवरी कर्मियों पर तेज रफ्तार से वाहन चलाने, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी और लगातार मानसिक तनाव जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं। कई मामलों में सड़क दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य से जुड़ी शिकायतें भी बढ़ी थीं। इन्हीं चिंताओं को देखते हुए सरकार ने क्विक कॉमर्स कंपनियों के साथ बैठक कर इस मॉडल की समीक्षा की। श्रम मंत्रालय का स्पष्ट संदेश केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने स्पष्ट किया कि रोजगार सृजन के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की कारोबारी प्रतिस्पर्धा में कर्मचारियों की जान और सेहत से समझौता नहीं किया जा सकता। मंत्रालय ने कंपनियों को निर्देश दिया कि वे डिलीवरी टाइमलाइन को यथार्थवादी बनाएं और डिलीवरी पार्टनर्स पर अनावश्यक दबाव न डालें। कंपनियों ने मानी बात सरकारी निर्देशों के बाद क्विक कॉमर्स कंपनियों ने आश्वासन दिया है कि अब डिलीवरी समय को बढ़ाया जाएगा और काम के घंटे, बीमा कवर, हेल्थ सेफ्टी और ब्रेक जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कंपनियों का कहना है कि वे एक सुरक्षित और टिकाऊ डिलीवरी मॉडल की ओर बढ़ेंगी। डिलीवरी पार्टनर्स में राहत इस फैसले से डिलीवरी पार्टनर्स में राहत की भावना देखी जा रही है। उनका कहना है कि 10 मिनट की डिलीवरी के कारण उन पर अत्यधिक दबाव रहता था, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता था। नए फैसले से न सिर्फ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि कामकाजी माहौल भी बेहतर होगा। आगे क्या होगा? सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में गिग वर्कर्स के लिए एक व्यापक नीति लागू की जा सकती है, जिसमें न्यूनतम सुरक्षा मानक, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल होंगी। कुल मिलाकर, 10 मिनट डिलीवरी मॉडल पर लगी यह रोक क्विक कॉमर्स सेक्टर में मानवीय और जिम्मेदार कार्य संस्कृति की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

आवारा कुत्तों के हमलों पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश, काटने की घटना में राज्य सरकारें देंगी मुआवजा

नई दिल्ली। देशभर में लगातार सामने आ रही आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि कुत्ते के काटने से यदि कोई व्यक्ति घायल होता है या उसकी जान जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होगी और पीड़ित या मृतक के परिजनों को मुआवजा देना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा केवल पशु नियंत्रण का नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और जीवन के अधिकार से जुड़ा हुआ है। अदालत ने विशेष तौर पर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर उनकी जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती। लापरवाही पर राज्य जिम्मेदार अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि यदि आवारा कुत्तों के हमले में बच्चे या बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल होते हैं या उनकी मौत हो जाती है, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही माना जाएगा। ऐसे मामलों में राज्य सरकारें यह नहीं कह सकतीं कि यह नगर निगम या स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है। स्थानीय निकायों को निर्देश शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे नगर निगमों और नगर पालिकाओं के माध्यम से आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करें। अदालत ने यह भी कहा कि इन योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। पीड़ितों को मिलेगी राहत इस फैसले के बाद कुत्ते के हमलों के शिकार लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब पीड़ितों को इलाज के खर्च और अन्य नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकारों से सीधे मुआवजा मिल सकेगा। जन सुरक्षा की दिशा में अहम कदम विशेषज्ञों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य सरकारों को जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल पीड़ितों को न्याय मिलेगा, बल्कि प्रशासन पर भी दबाव बनेगा कि वह आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए ठोस और प्रभावी कदम उठाए।