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गंडक दियारा से वाशिंगटन डीसी तक: नीरज कुमार सिंह ने शिक्षा और सामाजिक बदलाव में रचा वैश्विक इतिहास

बिहार के छोटे से गांव का युवा बना अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की आवाज, शिक्षा को बताया सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी ताकत छपरा, 22 जनवरी (विशेष रिपोर्ट): बिहार की मिट्टी में जन्मे और सीमित संसाधनों में पले-बढ़े नीरज कुमार सिंह ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच बड़ी हो, लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी वैश्विक मंच तक पहुंचा जा सकता है। सारण जिले के पानापुर प्रखंड अंतर्गत गंडक दियारा क्षेत्र के पकड़ी नरोत्तम गांव के सतजोड़ा बाजार निवासी नीरज कुमार सिंह आज न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। एक साधारण ग्रामीण परिवार में जन्मे नीरज, पिता प्रमोद सिंह और माता गीता देवी के सपूत हैं। बचपन से ही उन्होंने शिक्षा को अपने जीवन का सबसे मजबूत आधार माना। उनका दृढ़ विश्वास रहा है कि शिक्षा समाज को बदलने का सबसे सशक्त माध्यम है, और इसी सोच ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। अमेरिका में भारत की दमदार मौजूदगी हाल ही में नीरज कुमार सिंह ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित मैरियट मार्क्विस होटल में आयोजित SSWR 2026 वार्षिक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में दुनिया भर से शिक्षा, सामाजिक कार्य, शोध और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। सम्मेलन के दौरान सामाजिक विकास, नई वैश्विक चुनौतियों और शोध आधारित समाधानों पर गहन चर्चा हुई, जिसमें नीरज के विचारों को विशेष सराहना मिली। उनकी प्रस्तुति ने यह दिखाया कि भारत का युवा वैश्विक विमर्श में कितनी मजबूती से अपनी बात रख सकता है। 12 देशों में सामाजिक और शैक्षणिक नेतृत्व नीरज कुमार सिंह अब तक 12 देशों में, जिनमें 10 दक्षिण एशियाई देश शामिल हैं, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं। उनका मुख्य फोकस शिक्षा की समान पहुंच, युवाओं का सशक्तिकरण और नीति स्तर पर बदलाव लाना रहा है। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, एमआईटी, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो और CSWE 2025 जैसे विश्व के प्रतिष्ठित मंचों पर अपने शोध, अनुभव और जमीनी कार्यों को साझा किया है। शैक्षणिक सफर भी उतना ही प्रेरणादायक नीरज का शैक्षणिक जीवन उनकी संघर्षगाथा का अहम हिस्सा है। बी.एससी. के बाद उन्होंने राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान से सामाजिक कार्य में मास्टर डिग्री प्राप्त की। इसके पश्चात टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई से डिप्लोमा किया। आगे चलकर उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (Penn GSE), अमेरिका से इंटरनेशनल एजुकेशनल डेवलपमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की, जहां उन्होंने शिक्षा नीति, समानता और वैश्विक शिक्षा पर गहन अध्ययन किया। संयुक्त राष्ट्र से लेकर जमीनी स्तर तक योगदान नीरज कुमार सिंह ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में यूथ डेलीगेट के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का मान बढ़ाया। वर्तमान में वे ‘द सोशल वर्क नेबरहुड’, यूएसए में मेंटोर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे नई पीढ़ी के सामाजिक कार्यकर्ताओं को दिशा और मार्गदर्शन दे रहे हैं। अब तक वे 100 से अधिक परियोजनाओं और 50 से ज्यादा NGO, सरकारी विभागों व अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ काम कर चुके हैं। कोविड काल में भी निभाई अहम भूमिका कोविड-19 महामारी के दौरान नीरज कुमार सिंह ने USAID की MRITE परियोजना के तहत उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके प्रयासों से 25 लाख से अधिक लोगों तक टीकाकरण से जुड़ी सहायता पहुंचाई गई, जो उनके सामाजिक सरोकार और जिम्मेदारी को दर्शाता है। युवाओं के लिए संदेश नीरज कुमार सिंह की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि शिक्षा, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण साथ हो, तो सफलता की कोई सीमा नहीं होती। गंडक दियारा के छोटे से गांव से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचने वाले नीरज आज सचमुच बिहार का लाल और भारत की शान बन चुके हैं।

क्रिकेट जगत में हड़कंप: बांग्लादेश ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से नाम वापस ले लिया — भारत में खेलना अस्वीकार

ढाका/नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में एक ऐतिहासिक और विवादित क्षण तब देखने को मिला जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने ICC टी-20 वर्ल्ड कप 2026 से अपना नाम वापस ले लिया। यह निर्णय भारत में होने वाले टूर्नामेंट के अपने मैचों को खेलने से इनकार करने के बाद आया है, जिससे क्रिकेट की प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में बड़ा भूचाल आ गया है। विवाद की शुरुआत और ICC का रुख 22 जनवरी तक चल रहे गतिरोध का मूल कारण था बांग्लादेश का भारत में मैच खेलने से इंकार। BCB ने यह मांग की थी कि उनके सभी मैच भारत से श्रीलंका में शिफ्ट किए जाएं, लेकिन ICC ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया और मूल शेड्यूल को बरकरार रखने का निर्णय किया। ICC ने कहा कि विस्तृत सुरक्षा आकलन और स्वतंत्र जांच ने यह पुष्टि की है कि भारत में किसी भी प्रकार का “विश्वसनीय खतरा” मौजूद नहीं है और इसलिए मैचों का स्थान बदलना संभव नहीं है। ICC ने बांग्लादेश को 24 घंटे का “अंतिम निर्णय” देने की भी मांग की थी — या तो टीम भारत में खेलने के लिए राज़ी हो, या फिर उसे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़े। बांग्लादेश की प्रतिक्रिया BCB ने प्रेस रिलीज़ में कहा कि वे भारत में विश्व कप खेलने से मना करते हैं और उनका फैसला “क्रिकेट के भविष्य की चिंता” पर आधारित है। बांग्लादेश का मानना है कि क्रिकेट की लोकप्रियता को यह निर्णय झटका देगा और लगभग 20 करोड़ लोगों को खेल से अलग रखेगा।” BCB ने दावा किया कि ICC ने हर स्थिति पर भारत के पक्ष में निर्णय लिया, और मामला कोई “एकल क्रिकेट मुद्दा” नहीं है, बल्कि यह व्यापक निर्णय-निर्माण असंतुलन का प्रतीक है। BCB अध्यक्ष ने कहा: “हम वर्ल्ड कप खेलना चाहते हैं और ICC से बातचीत जारी रखेंगे, लेकिन भारत में खेलना स्वीकार नहीं करेंगे। हमें क्रिकेट के भविष्य की चिंता है और हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।” बांग्लादेश सरकार और बोर्ड ने मुख्य रूप से सुरक्षा और राजनैतिक तनाव को कारण बताया। इस विवाद के बीच बंग्लादेश के प्रमुख खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान के IPL से हटाए जाने का मामला भी सामने आया, जिससे दोनों देशों के बीच क्रिकेट-राजनीति की जटिलता बढ़ी। बांग्लादेश ने ICC के फैसलों को पक्षपातपूर्ण बताया, और कहा कि ऐसा निर्णय खेल की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के खिलाफ है। ICC ने लगातार कहा कि कोई भी सुरक्षा खतरा नहीं पाया गया है और आयोजक देशों (भारत/श्रीलंका) ने आवश्यक सुरक्षा आश्वासन दिए हैं। ICC का मानना है कि शेड्यूल में बदलाव व्यावहारिक रूप से असंभव है और भविष्य के टूर्नामेंट्स के लिए खराब मिसाल कायम कर सकता है। ICC ने स्पष्ट किया है कि यदि बांग्लादेश की टीम भारत में खेलने से इनकार करती है, तो उसे टूर्नामेंट से हटा दिया जाएगा, और उसकी जगह स्कॉटलैंड जैसी अन्य टीम को शामिल किया जा सकता है, जिससे 2026 टी-20 विश्व कप का आकार बदल सकता है। इस फैसले का क्रिकेट-अर्थव्यवस्था, खिलाड़ियों के करियर और द्विपक्षीय क्रिकेट रिश्तों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। बांग्लादेश के खिलाड़ी मैच फीस और बोनस से वंचित हो सकते हैं जबकि बोर्ड भी ICC के भविष्य के फैसलों में अलग तरीके से प्रभावित हो सकता है।

‘बॉर्डर 2’ पर सनी देओल की हुंकार, खाड़ी देशों में मचा सियासी तूफान—पाकिस्तान कनेक्शन बनी बैन की वजह?

डेस्क रिपोर्ट | एंटरटेनमेंट: बॉलीवुड और सियासत का टकराव कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब पर्दे पर देशभक्ति का ज्वार उमड़ता है और पाकिस्तान की भूमिका सवालों के घेरे में आती है, तो उसकी गूंज भारत से बाहर भी सुनाई देती है। कुछ ऐसा ही माहौल इस वक्त सनी देओल स्टारर ‘बॉर्डर 2’ को लेकर बनता दिख रहा है। चर्चा है कि खाड़ी (गल्फ) देशों में इस बहुप्रतीक्षित फिल्म की रिलीज पर बैन लगाया जा सकता है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री में हलचल तेज हो गई है। सनी की दहाड़ और सरहद की कहानी ‘बॉर्डर’ भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में रही है, जिसने देशभक्ति को सिर्फ संवाद नहीं, बल्कि भावना बना दिया। सनी देओल की गूंजती आवाज़, सीमा पर तैनात जवानों का साहस और पाकिस्तान की आक्रामक नीति—इन सबने मिलकर पहली ‘बॉर्डर’ को कल्ट क्लासिक बना दिया था। अब ‘बॉर्डर 2’ उसी विरासत को आगे बढ़ाने का दावा कर रही है। बताया जा रहा है कि फिल्म में एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव, सैन्य कार्रवाई और ऐतिहासिक घटनाओं की झलक दिखाई गई है—जो कुछ देशों को नागवार गुजर रही है।  गल्फ देशों की नाराज़गी क्यों? खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय दर्शक रहते हैं और हिंदी फिल्मों का वहां अच्छा बाज़ार है। लेकिन जैसे ही किसी फिल्म में पाकिस्तान की आलोचना या उसकी “पोल-खोल” होती है, कुछ देशों में सेंसर सख्त हो जाता है। सूत्रों के मुताबिक, ‘बॉर्डर 2’ में पाकिस्तान को आक्रामक और नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जिसे लेकर आपत्ति जताई जा रही है। इसी कारण फिल्म की रिलीज पर रोक या भारी कट्स की संभावना पर चर्चा शुरू हो गई है। यह पहली बार नहीं है जब किसी देशभक्ति फिल्म को विदेशों में विरोध का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले भी कई हिंदी फिल्मों को गल्फ देशों में या तो बैन किया गया या फिर बड़े बदलावों के बाद रिलीज की अनुमति मिली। फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव क्रिएटिव फ्रीडम बनाम सियासी संवेदनशीलता का है, जहां निर्माता सच्चाई और राष्ट्रभाव दिखाना चाहते हैं, जबकि कुछ देश कूटनीतिक संतुलन साधने में लगे रहते हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ बैन की खबरें हैं, वहीं भारत में फिल्म को लेकर उत्साह और भी बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर “सनी की दहाड़” और “बॉर्डर 2 देशभक्ति का तूफान” जैसे ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। फैंस का मानना है कि अगर फिल्म पर कहीं रोक लगती है, तो यह उसकी लोकप्रियता को और बढ़ाएगी।

भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला वसंत पंचमी पर एक ही परिसर में पूजा और नमाज़

धार (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम और संतुलन साधने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने वसंत पंचमी के अवसर पर धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए हिंदू और मुस्लिम—दोनों समुदायों को पूजा और नमाज़ की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, हिंदू श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां वाग्देवी (सरस्वती) की पूजा कर सकेंगे, जबकि मुस्लिम समुदाय निर्धारित समय पर नमाज़ अदा करेगा। इस फैसले को धार्मिक सौहार्द और संवैधानिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वसंत पंचमी पर एक ही परिसर में पूजा और नमाज़ विवाद चला आ रहा है। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती मंदिर मानता है, वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह एक ऐतिहासिक मस्जिद (कमाल मौला मस्जिद) है। वर्षों से यह परिसर न्यायिक और प्रशासनिक निगरानी में रहा है, जहां अलग-अलग दिनों में पूजा और नमाज़ की अनुमति दी जाती रही है। वसंत पंचमी का विशेष महत्व वसंत पंचमी को मां सरस्वती की आराधना का प्रमुख पर्व माना जाता है। इसी कारण हिंदू पक्ष की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही थी कि इस दिन पूजा पर कोई प्रतिबंध न हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस धार्मिक भावना को स्वीकार करते हुए पूरे दिन पूजा की अनुमति दी है। प्रशासन को सख्त निर्देश कोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सीसीटीवी निगरानी, और पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति उत्पन्न न हो। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे आस्था की जीत बताया। वहीं मुस्लिम पक्षने भी कोर्ट के आदेश को मानते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है

दावोस से भारत के लिए बड़ा संकेत: ट्रंप बोले— ‘प्रधानमंत्री मोदी शानदार नेता, भारत के साथ जल्द होगी बड़ी ट्रेड डील’

दावोस। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान मनी कंट्रोल को दिए गए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को और मज़बूत करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच जल्द ही एक “अच्छी डील” होने की पूरी संभावना है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का ज़िक्र करते हुए कहा, “हम प्रधानमंत्री मोदी का बहुत सम्मान करते हैं। मोदी एक शानदार इंसान हैं और मेरे अच्छे दोस्त भी हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और अमेरिका भारत को एक अहम रणनीतिक और आर्थिक साझेदार मानता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े कुछ लंबित मुद्दों पर सकारात्मक बातचीत चल रही है। ट्रंप के अनुसार, दोनों देश ऐसे समझौते पर काम कर रहे हैं जिससे न सिर्फ़ द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा, बल्कि निवेश, तकनीक और रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रेड डील होती है, तो इसका सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों, आईटी सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मिल सकता है। वहीं अमेरिका के लिए भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाज़ार और भरोसेमंद रणनीतिक सहयोगी बनकर उभरेगा। दावोस जैसे वैश्विक मंच से भारत के पक्ष में दिया गया ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यह संदेश साफ़ करता है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है। ट्रंप के इस बयान के बाद यह उम्मीद और मज़बूत हुई है कि आने वाले समय में भारत-अमेरिका संबंध और प्रगाढ़ होंगे। चाहे वह रक्षा सहयोग हो, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप या फिर व्यापार—दोनों देश वैश्विक मंच पर एक-दूसरे के भरोसेमंद सहयोगी के रूप में आगे बढ़ते दिख रहे हैं। कुल मिलाकर, दावोस से ट्रंप का यह संदेश भारत के लिए राजनीतिक और आर्थिक—दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

तूफानी बल्लेबाज़ी से भारत का दमदार आग़ाज़, कीवियों को 48 रन से हराकर सीरीज़ में बढ़त

भारतीय क्रिकेट टीम ने पांच मैचों की टी20 सीरीज़ की शुरुआत शानदार जीत के साथ करते हुए न्यूज़ीलैंड को पहले ही मुकाबले में करारा झटका दिया। युवा जोश और अनुभवी ताक़त के बेहतरीन मेल ने इस मैच को पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। टॉस के बाद पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत की शुरुआत आक्रामक रही। अभिषेक शर्मा ने एक बार फिर अपने बेखौफ अंदाज़ से दर्शकों का दिल जीत लिया। उन्होंने मात्र कुछ ही ओवरों में मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट्स खेलते हुए 84 रनों की विस्फोटक पारी खेली। उनकी इस पारी ने भारतीय पारी को मज़बूत आधार दिया। मध्यक्रम में रिंकू सिंह ने अपनी पहचान के अनुरूप जिम्मेदारी और आक्रमण का शानदार संतुलन दिखाया। उन्होंने 44 रनों की तेज़ तर्रार पारी खेलते हुए कीवी गेंदबाज़ों की लय पूरी तरह बिगाड़ दी। वहीं कप्तान हार्दिक पांड्या ने भी 25 रनों का अहम योगदान देकर रन गति को आख़िरी ओवरों तक तेज़ बनाए रखा। इन सभी पारियों के दम पर भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 238 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। 239 रनों के मुश्किल लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूज़ीलैंड की टीम शुरुआत से ही दबाव में नज़र आई। भारतीय गेंदबाज़ों ने सधी हुई लाइन-लेंथ और आक्रामक रणनीति के साथ कीवी बल्लेबाज़ों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। लगातार अंतराल पर विकेट गिरने से न्यूज़ीलैंड की पारी पटरी से उतरती चली गई। पूरी कोशिशों के बावजूद कीवी टीम 20 ओवरों में 7 विकेट खोकर केवल 190 रन ही बना सकी। अंततः भारत ने यह मुकाबला 48 रनों से अपने नाम कर लिया और पांच मैचों की सीरीज़ में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। यह जीत न सिर्फ स्कोरबोर्ड पर भारत की मजबूती दिखाती है, बल्कि टीम के युवा खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और गहराई को भी रेखांकित करती है। सीरीज़ की शुरुआत में मिली इस जीत से भारतीय खेमे का मनोबल ऊंचा है और आने वाले मुकाबलों में टीम इसी लय को बरकरार रखने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

बसंत पंचमी 2026: ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना का महापर्व

भारत की सनातन संस्कृति में सरस्वती पूजा का विशेष स्थान है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ज्ञान, विवेक, सृजन और संस्कार का उत्सव है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व बसंत पंचमी के नाम से भी प्रसिद्ध है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व शुक्रवार, 23 जनवरी को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। बसंत पंचमी: ऋतु परिवर्तन का प्रतीक बसंत पंचमी से ही प्रकृति में बदलाव स्पष्ट दिखाई देने लगता है। खेतों में सरसों पीले फूलों से लहलहाने लगती है, पेड़ों पर नई कोपलें फूट पड़ती हैं और वातावरण में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। यही कारण है कि इस दिन पीले रंग को विशेष महत्व दिया गया है, जो उत्साह, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। सरस्वती पूजा 2026: तिथि और समय * पर्व की तिथि: शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 * पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026, तड़के लगभग 02:28 बजे * पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026, रात लगभग 01:46 बजे शुभ पूजा मुहूर्त प्रातः 07:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक यह समय सरस्वती पूजा के लिए सर्वाधिक शुभ और फलदायी माना गया है। पौराणिक और धार्मिक महत्व शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के समय जब चारों ओर नीरवता और अज्ञान देखा, तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ। माँ सरस्वती ने वीणा के मधुर स्वर से सृष्टि में ज्ञान, वाणी और चेतना का संचार किया। माँ सरस्वती को— * विद्या की देवी * वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री * बुद्धि, विवेक और स्मरण शक्ति की प्रतीक माना जाता है। इसलिए यह दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, शिक्षकों, लेखकों, कलाकारों, संगीतकारों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। सरस्वती पूजा की संपूर्ण विधि (विस्तार से) 1. प्रातः स्नान और संकल्प पूजा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण कर पूजा का संकल्प लें। 2.पूजा स्थल की तैयारी घर या विद्यालय में साफ-सुथरी जगह पर पीले कपड़े का आसन बिछाएं। माँ सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। 3. मूर्ति स्थापना और आवाहन दीप प्रज्वलित कर माँ सरस्वती का ध्यान करें और उन्हें आसन पर विराजमान होने का आवाहन करें। 4. पूजन सामग्री अर्पण * पीले फूल * अक्षत (चावल) * चंदन, हल्दी, कुमकुम * फल, मिठाई, विशेषकर केसर युक्त या पीले रंग की मिठाई 5. पुस्तक और वाद्य यंत्र पूजन किताबें, कॉपियाँ, कलम, पेंसिल, वाद्य यंत्र (वीणा, हारमोनियम आदि) माँ के चरणों में रखे जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन पढ़ाई नहीं की जाती, बल्कि ज्ञान के साधनों की पूजा की जाती है। 6. मंत्र जाप और स्तुति “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। सरस्वती वंदना, स्तोत्र और भजन का पाठ करें।  7. आरती और प्रसाद अंत में आरती कर प्रसाद वितरित करें। प्रसाद में खीर, बूंदी या पीले चावल का विशेष महत्व होता है। बसंत पंचमी के दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है, जिसे विद्यारंभ संस्कार कहा जाता है। बच्चे से “ॐ”, “अ”, “क” जैसे अक्षर लिखवाए जाते हैं। यह परंपरा आज भी कई परिवारों में श्रद्धा से निभाई जाती है। विद्यालयों और समाज में उत्सव देश के कई हिस्सों, विशेषकर पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा) में सरस्वती पूजा बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। विद्यालयों और कॉलेजों में— * भव्य पंडाल * सांस्कृतिक कार्यक्रम * गीत, संगीत और नृत्य   का आयोजन होता है। 23 जनवरी 2026 को मनाई जाने वाली सरस्वती पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और चेतना का उत्सव है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सच्ची प्रगति का मार्ग शिक्षा, विवेक और सद्बुद्धि से होकर ही जाता है। माँ सरस्वती की कृपा से जीवन में अज्ञान का अंधकार दूर हो और ज्ञान का प्रकाश फैले—इसी कामना के साथ यह पर्व मनाया जाता है।

मेनोपॉज नहीं, पहचान का मोड़ है यह दौर — 40 के बाद महिलाओं में क्यों बदलने लगता है स्वभाव और सोच?

अक्सर महिलाएं मेनोपॉज को केवल पीरियड्स के बंद हो जाने तक सीमित समझ लेती हैं। लेकिन हकीकत इससे कहीं गहरी और असरदार है। मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का वह चरण है, जहां शरीर ही नहीं, मन, सोच और व्यवहार तक बदलाव के दौर से गुजरते हैं। यही वजह है कि कई महिलाएं खुद से सवाल करने लगती हैं — “क्या मैं बदल रही हूं?” मेनोपॉज क्या सिर्फ शारीरिक बदलाव है? नहीं। मेनोपॉज हार्मोनल बदलावों की एक जटिल प्रक्रिया है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन तेजी से घटते हैं, जिसका सीधा असर दिमाग, भावनाओं और ऊर्जा स्तर पर पड़ता है। क्यों बदलने लगती है पर्सनैलिटी? मेनोपॉज के समय दिखने वाले कुछ आम लेकिन अनदेखे बदलाव— * मूड स्विंग्स: छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या अचानक उदासी * थकान और सुस्ती: बिना ज्यादा काम किए भी थक जाना * नींद की समस्या: रात को नींद न आना या बार-बार टूटना * चिंता और चिड़चिड़ापन: हर बात पर बेचैनी महसूस होना * आत्मविश्वास में कमी: खुद को पहले जैसा न महसूस करना ये लक्षण धीरे-धीरे महिला के व्यवहार और फैसलों को प्रभावित करने लगते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि उनकी पर्सनैलिटी बदल रही है। वजन बढ़ना और शरीर से नाराज़गी मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है। पेट और कमर के आसपास वजन बढ़ना आम बात है। इससे महिलाएं अपने शरीर को लेकर असहज महसूस करने लगती हैं, जिसका असर आत्मसम्मान पर पड़ता है। रिश्तों पर भी पड़ता है असर भावनात्मक असंतुलन का असर पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों पर भी दिखता है। कई महिलाएं खुद को कम समझी जाने वाली या अकेली महसूस करने लगती हैं। चुप रहना समाधान नहीं सबसे बड़ी गलती यही होती है कि महिलाएं इन बदलावों को “उम्र का असर” मानकर सहती रहती हैं। जबकि मेनोपॉज के लक्षणों पर खुलकर बात करना, डॉक्टर से सलाह लेना और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। * संतुलित आहार और कैल्शियम युक्त भोजन * नियमित वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज * पर्याप्त नींद और तनाव कम करने की कोशिश * जरूरत हो तो काउंसलिंग या मेडिकल सलाह मेनोपॉज कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का नया अध्याय है। यह दौर आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि खुद को नए सिरे से समझने और अपनाने का मौका है। जरूरी है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज न करें, क्योंकि सही जानकारी और देखभाल से यह सफर आसान और सशक्त बन सकता है।

स्पोर्ट्स डेस्क: टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) को बड़ा और सख्त संदेश दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि बांग्लादेश की टीम भारत में आकर टूर्नामेंट खेलने से इनकार करती है, तो उसे टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। ICC ने इस मामले में बांग्लादेश को 24 घंटे की अंतिम मोहलत दी है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 की मेज़बानी भारत सहित संयुक्त आयोजन ढांचे के तहत तय है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने कथित तौर पर भारत में खेलने को लेकर आपत्तियां जताई थीं और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की मांग की थी। हालांकि, ICC ने इन मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया है। ICC का स्पष्ट रुख है कि टूर्नामेंट तय शेड्यूल और मेज़बानी व्यवस्था के अनुसार ही खेला जाएगा। ICC अधिकारियों के अनुसार, किसी भी सदस्य बोर्ड को सुरक्षा या लॉजिस्टिक्स के नाम पर एकतरफा शर्तें थोपने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यदि बांग्लादेश टीम निर्धारित स्थल पर खेलने से इनकार करती है, तो इसे ICC नियमों का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके तहत टीम को टूर्नामेंट से बाहर किया जा सकता है। इस फैसले के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड पर भारी दबाव बन गया है। एक ओर टीम और खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर है, तो दूसरी ओर वैश्विक मंच पर क्रिकेट की साख का सवाल। सूत्रों का कहना है कि BCB के भीतर आपात बैठकें चल रही हैं और सरकार व सुरक्षा एजेंसियों से भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। ICC के इस कड़े रुख से क्रिकेट जगत में हलचल मच गई है। कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बांग्लादेश बाहर होता है, तो यह न सिर्फ टीम के लिए बल्कि टूर्नामेंट की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए भी बड़ा झटका होगा। फिलहाल, सबकी निगाहें अगले 24 घंटे पर टिकी हैं। क्या बांग्लादेश ICC की शर्तें मानकर भारत में खेलने को तैयार होगा, या फिर टी20 वर्ल्ड कप 2026 उसके बिना ही खेला जाएगा—इसका फैसला जल्द सामने आने वाला है।

प्रयागराज में ट्रेनिंग फ्लाइट हादसे का शिकार, जलकुंभी में गिरा दो-सीटर विमान

प्रयागराज में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रशिक्षण उड़ान पर निकला एक दो-सीटर निजी विमान अचानक दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा केपी कॉलेज मैदान के पीछे स्थित इलाके में हुआ, जहां विमान पास के जलाशय में उगी घनी जलकुंभी के बीच जा गिरा। राहत की बात यह रही कि विमान में सवार दोनों पायलट पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी तरह की जानमाल की हानि नहीं हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विमान नियमित ट्रेनिंग सेशन के तहत उड़ान भर रहा था। उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी खराबी या संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसके चलते पायलट को आपात स्थिति में लैंडिंग का प्रयास करना पड़ा। इसी दौरान विमान नियंत्रण खो बैठा और पास के जलाशय में गिर गया। जलकुंभी और कीचड़ की वजह से विमान की गति काफी हद तक कम हो गई, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए। दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और प्राथमिक चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें पूरी तरह स्वस्थ बताया गया। आसपास मौजूद लोगों ने भी राहत की सांस ली, क्योंकि दुर्घटनास्थल के पास रिहायशी इलाका और खेल का मैदान मौजूद है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। विमान के तकनीकी रिकॉर्ड, मौसम की स्थिति और प्रशिक्षण प्रक्रिया की भी समीक्षा की जाएगी। नागरिक उड्डयन से जुड़े अधिकारी भी मामले की विस्तृत जांच में जुट गए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। इस घटना ने एक बार फिर प्रशिक्षण उड़ानों के दौरान सुरक्षा मानकों और तकनीकी जांच की अहमियत को रेखांकित कर दिया है। हालांकि, समय पर पायलट की सूझबूझ और परिस्थितियों के अनुकूल स्थान पर विमान गिरने से एक बड़ी त्रासदी टल गई।