नीतीश कुमार का सख्त संदेश: गुणवत्ता और समयबद्धता से पूरा हो कुर्जी-आनंदपुरी नाला प्रोजेक्ट

पटना। राजधानी में जलजमाव की पुरानी समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज आशियाना-दीघा रोड स्थित राजीव नगर के पास निर्माणाधीन कुर्जी नाला (राजीव नगर नाला) निर्माण योजना तथा आनंदपुरी नाला का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि दोनों परियोजनाओं को उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ निर्धारित समय सीमा में हर हाल में पूरा किया जाए। निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की प्रगति, तकनीकी मानकों, जल निकासी क्षमता और सुरक्षा उपायों की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राजधानी पटना में हर वर्ष बरसात के दौरान जलजमाव से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नाला निर्माण की ये योजनाएं शहर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इनकी गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। जलजमाव से राहत की बड़ी उम्मीद कुर्जी नाला और आनंदपुरी नाला परियोजनाएं शहर के उन इलाकों को सीधे राहत देंगी, जहां मानसून के समय पानी भर जाने से यातायात और जनजीवन प्रभावित होता है। अधिकारियों के अनुसार, नालों की चौड़ाई और गहराई को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि तेज बारिश की स्थिति में भी जल निकासी सुचारु रूप से हो सके। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि परियोजना पूर्ण होने के बाद न केवल जलजमाव की समस्या से निजात मिलेगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य की स्थिति में भी सुधार आएगा। जल निकासी व्यवस्था सुदृढ़ होने से सड़कों की क्षति भी कम होगी और रखरखाव का खर्च घटेगा। इस परियोजना की एक खास विशेषता यह है कि नाले के ऊपर टू-लेन सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है। इससे स्थानीय लोगों को वैकल्पिक और सुगम यातायात मार्ग उपलब्ध होगा। आशियाना-दीघा रोड और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक दबाव को कम करने में यह सड़क महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर के विकास कार्यों में समन्वय और दीर्घकालिक सोच जरूरी है। नाला और सड़क—दोनों को एकीकृत योजना के रूप में विकसित किया जा रहा है ताकि बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पटना को साफ-सुथरा, सुव्यवस्थित और आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। नाला निर्माण, सड़क विस्तार और जल निकासी व्यवस्था में सुधार जैसे कदम उसी दिशा में प्रयास हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाए और स्थानीय नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। साथ ही, निर्माण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को भी कहा गया। राजधानी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही इन परियोजनाओं से आने वाले समय में जलजमाव की समस्या में कमी आने की उम्मीद है। यदि योजनाएं तय समय पर पूर्ण होती हैं, तो यह पटना के शहरी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

शाह का राहुल पर पलटवार: “किसानों को गुमराह करना बंद करें, हर ट्रेड डील में डेयरी पूरी तरह सुरक्षित”

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे देश के किसानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के नाम पर गुमराह कर रहे हैं। शाह ने स्पष्ट किया कि इंग्लैंड, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए सभी मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) में किसानों और विशेषकर डेयरी क्षेत्र के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिन भी व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, उनमें देश के कृषि और डेयरी सेक्टर को प्राथमिकता दी गई है। “किसानों को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हर समझौते में स्पष्ट प्रावधान हैं, जिनसे भारतीय डेयरी उद्योग पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा,” उन्होंने कहा। “डेयरी को खत्म करने का झूठा नैरेटिव” गृह मंत्री ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि ट्रेड डील के कारण भारतीय डेयरी उद्योग को नुकसान होगा। शाह ने इसे “झूठा और भ्रामक” बताते हुए कहा, “हम डेयरी क्षेत्र को समाप्त करने वाले नहीं, बल्कि उसे वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए रास्ता बनाने वाले लोग हैं। सरकार ने हर समझौते में डेयरी सेक्टर को पूर्ण सुरक्षा दी है।” उन्होंने दावा किया कि भारत ने संवेदनशील कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क और गैर-टैरिफ सुरक्षा उपायों को बरकरार रखा है, ताकि देश के छोटे और मध्यम किसानों के हित सुरक्षित रहें। सरकार का कहना है कि इन समझौतों से भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार खुलेंगे, निर्यात बढ़ेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अधूरी जानकारी के आधार पर भ्रम फैला रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल में व्यापार और कृषि नीति एक प्रमुख मुद्दा बन सकती है, खासकर तब जब डेयरी और कृषि क्षेत्र करोड़ों परिवारों की आजीविका से जुड़ा है। इधर कांग्रेस लगातार सरकार से व्यापार समझौतों की शर्तों को सार्वजनिक करने और संसद में विस्तृत चर्चा की मांग कर रही है। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि भारत की आर्थिक प्रगति और किसानों के हित, दोनों को संतुलित रखते हुए ही निर्णय लिए जा रहे हैं। स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों को लेकर सियासी घमासान आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिसमें किसान हित और डेयरी क्षेत्र केंद्र में रहेंगे।

दिल्ली में हर भूखंड को मिलेगी डिजिटल पहचान: ULPIN और ड्रोन सर्वे से बदलेगी भूमि व्यवस्था की तस्वीर

नई दिल्ली। रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने राजधानी की भूमि व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब दिल्ली के हर भूखंड को 14 अंकों वाला यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN) प्रदान किया जाएगा। यह नंबर प्रत्येक जमीन की स्थायी और सुरक्षित डिजिटल पहचान के रूप में कार्य करेगा। सरकार का उद्देश्य है कि राजधानी में भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों को अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। हर इंच जमीन का होगा डिजिटल रिकॉर्ड नई व्यवस्था के तहत: प्रत्येक भूखंड का रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहेगा। भूमि विवादों में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।  फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक लगेगी। केवल एक ULPIN नंबर से जमीन की पूरी जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी। ULPIN प्रणाली के लागू होने से जमीन की खरीद-बिक्री, नामांतरण और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अधिक सरल और तेज़ होने की उम्मीद है। इससे न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, बल्कि नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा। ड्रोन सर्वेक्षण से तैयार होगा डिजिटल लैंड मैप सरकार दिल्ली का नया डिजिटल लैंड मैप तैयार करने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण भी कराएगी। अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से तैयार यह नक्शा प्रत्येक भूखंड की सटीक स्थिति और सीमांकन को दर्ज करेगा। ड्रोन सर्वे से तैयार डेटा को भूमि रिकॉर्ड प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे जमीन की वास्तविक स्थिति और कागजी रिकॉर्ड में किसी प्रकार का अंतर न रहे। यह पहल दिल्ली को एक आधुनिक, तकनीक-सक्षम और पारदर्शी भूमि प्रबंधन प्रणाली की ओर ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भूमि पहचान प्रणाली से: निवेश को बढ़ावा मिलेगा, कानूनी विवादों में कमी आएगी, और संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं में गति आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह कदम नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। दिल्ली में लागू की जा रही यह नई व्यवस्था आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

महाशिवरात्रि पर दिल्ली की मुख्यमंत्री ने उदयपुर में किया शिव अभिषेक, लोककल्याण की कामना

उदयपुर/नई दिल्ली। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री ने राजस्थान के उदयपुर स्थित अम्बेरी में प्राचीन श्री अमरख महादेव मंदिर में देवाधिदेव महादेव की विधिवत पूजा-अर्चना की। शताब्दियों पुराना यह धाम तप, वैराग्य और शिव चेतना का सजीव केंद्र माना जाता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक और विशेष पूजन कर देश और दिल्लीवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर शिवत्व के जागरण का अवसर है। शिव ही शून्य हैं, शिव ही अनंत हैं, और वही सृजन, संतुलन तथा परिवर्तन के आधार हैं। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद दिल्ली और समस्त देशवासियों पर बना रहे तथा सभी को सेवा, समर्पण और लोककल्याण के मार्ग पर अडिग रहने की शक्ति प्राप्त हो। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम अम्बेरी स्थित यह प्राचीन शिवधाम अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां साधकों ने वर्षों तक कठोर तपस्या कर शिव कृपा प्राप्त की। महाशिवरात्रि पर मंदिर परिसर में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। इस अवसर पर कैबिनेट सहयोगी श्री आशीष सूद, श्री रविन्द्र इन्द्राज, विधायक श्री अनिल शर्मा सहित भारतीय जनता पार्टी, राजस्थान के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से प्रदेश और देश की उन्नति के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में सेवा और सुशासन को ही सर्वोपरि बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य जन-जन तक विकास पहुंचाना है। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर उन्होंने सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और जनहितकारी नीतियों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। धार्मिक आस्था और जनसेवा के इस समागम ने महाशिवरात्रि के पर्व को और भी सार्थक बना दिया, जहां आध्यात्मिकता के साथ लोककल्याण की भावना स्पष्ट रूप से झलकती रही।

ढाका या मुंबई? 17 फरवरी को पीएम मोदी के कार्यक्रमों का टकराव, बांग्लादेश शपथ समारोह पर संशय

नई दिल्ली/मुंबई/ढाका। 17 फरवरी को दक्षिण एशिया की कूटनीति में एक दिलचस्प मोड़ देखने को मिल सकता है। बांग्लादेश में नई सरकार के गठन के अवसर पर होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में भारत के प्रधानमंत्री को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया है। वहीं, उसी दिन मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय बैठक पहले से निर्धारित है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री का ढाका दौरा संभवतः टल सकता है। बांग्लादेश में नई शुरुआत बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के बाद नई सरकार के गठन की तैयारी पूरी हो चुकी है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे तारिक रहमान ने क्षेत्रीय सहयोग की भावना के तहत कई देशों के नेताओं को आमंत्रित किया है, जिनमें भारत भी शामिल है। भारत और बांग्लादेश के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में शपथ समारोह में भारत की भागीदारी पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। मुंबई में फ्रांस के साथ अहम वार्ता दूसरी ओर, 17 फरवरी को मुंबई में भारत और फ्रांस के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। राष्ट्रपति मैक्रों की इस यात्रा को रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और निवेश जैसे मुद्दों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा है और इसमें दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा संभव है। सूत्रों के अनुसार, यदि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से ढाका नहीं जा पाते हैं तो भारत की ओर से किसी वरिष्ठ मंत्री या विशेष दूत को शपथ समारोह में भेजा जा सकता है। अतीत में भी ऐसे अवसरों पर भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। कूटनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि भारत किसी भी स्थिति में बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को प्राथमिकता देता है। इसलिए प्रतिनिधित्व के स्तर पर कोई कमी नहीं रखी जाएगी

17 फरवरी को तारिक रहमान लेंगे प्रधानमंत्री पद की शपथ, पीएम मोदी को भी भेजा गया न्योता

नई दिल्ली/ढाका। दक्षिण एशिया की राजनीति में 17 फरवरी का दिन ऐतिहासिक साबित होने जा रहा है। बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह शपथ ग्रहण समारोह मंगलवार सुबह बांग्लादेश संसद भवन के दक्षिणी प्लाजा में आयोजित किया जाएगा, जहां मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। भव्य समारोह की तैयारी, 13 देशों को भेजा गया निमंत्रण सूत्रों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण अवसर के लिए अब तक 13 देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जा चुका है। इनमें भारत, चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं। समारोह को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि दक्षिण एशिया और खाड़ी देशों के कई शीर्ष नेताओं की संभावित उपस्थिति से बांग्लादेश की नई सरकार के वैश्विक संबंधों की दिशा का संकेत मिलेगा। पीएम मोदी को विशेष आमंत्रण बांग्लादेश ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी 17 फरवरी को मुंबई में पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों में व्यस्त रहेंगे। ऐसे में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर या उपराष्ट्रपति द्वारा किए जाने की संभावना जताई जा रही है। भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले वर्षों में मजबूत होते संबंधों को देखते हुए यह दौरा कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुबह सांसदों की शपथ, शाम को मंत्रिमंडल का गठन बांग्लादेश राष्ट्रीय परिषद (बीएनपी) के प्रवक्ता ने बताया कि 17 फरवरी का दिन देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। सुबह नव-निर्वाचित सांसद शपथ लेंगे, जबकि शाम को नए मंत्रिमंडल का गठन कर सभी मंत्री शपथ ग्रहण करेंगे। इस दिन ढाका में विशेष सुरक्षा और प्रोटोकॉल व्यवस्था की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश की विदेश नीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों की नई दिशा तय हो सकती है। खासतौर पर भारत, चीन और खाड़ी देशों के साथ संतुलित कूटनीति बनाए रखना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 17 फरवरी को कितने दक्षिण एशियाई नेता ढाका पहुंचते हैं और इस ऐतिहासिक अवसर पर कौन-कौन अपनी उपस्थिति दर्ज कराता है। ढाका का यह समारोह न सिर्फ बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के कूटनीतिक समीकरणों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

Bigg Boss 13 फेम हिमांशी खुराना को जान से मारने की धमकी

चंडीगढ़/मुंबई। मनोरंजन जगत से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ‘बिग बॉस 13’ से लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री और सिंगर हिमांशी खुराना को कथित तौर पर गैंगस्टर जीशान अख्तर की ओर से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई है। इस मामले में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसने पूरे फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। ऑडियो रिकॉर्डिंग में धमकी का दावा सूत्रों के अनुसार, वायरल हो रही ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर आरोपी ने खुद को जीशान अख्तर बताते हुए हिमांशी से बड़ी रकम की मांग की है। पैसे न देने की स्थिति में गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है। हालांकि, इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है। पुलिस में शिकायत, सुरक्षा कड़ी हिमांशी खुराना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के तार पाकिस्तान से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। मनोरंजन जगत में चिंता इस घटना के बाद मनोरंजन जगत में चिंता का माहौल है। कलाकारों और प्रोडक्शन हाउस से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती रंगदारी और धमकी की घटनाएं चिंता का विषय हैं। इंडस्ट्री से जुड़े कई लोगों ने कलाकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय में कई सेलेब्रिटीज को इस तरह की धमकियां मिल चुकी हैं। ऐसे मामलों में अक्सर सोशल मीडिया या कॉल के माध्यम से रंगदारी मांगी जाती है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि यह मामला किसी संगठित गिरोह से जुड़ा है या नहीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कॉल डिटेल्स और ऑडियो फॉरेंसिक जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

सारण में मछुआरों को बड़ी सौगात: मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के तहत 37 मत्स्य शिकार व विपणन किट का वितरण

छपरा, 14 फरवरी। जिले के मछुआ समुदाय की आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला पदाधिकारी, सारण श्री वैभव श्रीवास्तव ने आज मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना के अंतर्गत 37 लाभुकों के बीच मत्स्य शिकार एवं विपणन किट का वितरण किया। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों एवं लाभार्थियों के बीच उत्साह का वातावरण देखा गया। मुख्यमंत्री मछुआ कल्याण योजना का उद्देश्य जिले के मछुआरों और मत्स्य विक्रेताओं को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके कार्य को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और हाइजीनिक बनाना है। योजना के तहत मत्स्य शिकारमाही करने तथा मछली के विपणन के लिए आवश्यक उपकरणों को एक पैकेज के रूप में उपलब्ध कराया जाता है, ताकि जल स्रोतों से बाजार तक मछली की गुणवत्ता और स्वच्छता बनी रहे। क्या-क्या मिला किट में लाभार्थियों को फेंका जाल, गिल नेट, हांडी, तराजू तथा इंसुलेटेड आइस बॉक्स सहित अन्य आवश्यक सामग्री एक संपूर्ण किट के रूप में प्रदान की गई। इन सामग्रियों की मदद से मछुआरे मछली को सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर बाजार तक पहुंचा सकेंगे। विशेष रूप से इंसुलेटेड आइस बॉक्स के उपयोग से मछली ताजी एवं स्वच्छ अवस्था में उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी। शत-प्रतिशत अनुदान का लाभ इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि लाभार्थियों को किट पूर्णतः शत-प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराई जाती है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरों और मत्स्य विक्रेताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता।  आय में वृद्धि और बेहतर बाजार व्यवस्था जिला पदाधिकारी ने कहा कि इस पहल से मछुआरों को आजीविका का एक अतिरिक्त एवं सशक्त साधन प्राप्त होगा, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होगी। साथ ही उपभोक्ताओं को भी ताजी, सुरक्षित और उचित मूल्य पर मछली उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सड़क किनारे, चौक-चौराहों और हाट-बाजारों में मत्स्य विपणन करने वाले मछुआरों एवं वेंडरों को चिन्हित कर योजना का लाभ दिया जा रहा है। यह पहल न केवल मछुआ समुदाय की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि जिले में मत्स्य विपणन की व्यवस्था को भी अधिक सुव्यवस्थित और स्वच्छ बनाएगी। कार्यक्रम में उप मत्स्य निदेशक सारण परिक्षेत्र, छपरा श्री सुमन कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी छपरा श्री प्रदीप कुमार सहित श्रीमती अमृता रंजन, श्री राजू कुमार, श्रीमती चंचला, श्रीमती आस्था मिश्रा एवं अन्य मत्स्य विकास पदाधिकारी उपस्थित रहे।

IGI एयरपोर्ट पर एंटी स्मॉग फॉगर सिस्टम का शुभारंभ, 120 मिस्ट गन से वायु गुणवत्ता सुधार की नई पहल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (IGI एयरपोर्ट) परिसर में अत्याधुनिक Anti Smog Fogger System का उद्घाटन किया। इस परियोजना के अंतर्गत एयरपोर्ट क्षेत्र में 120 मिस्ट गनों की स्थापना की गई है, जो धूल और सूक्ष्म कणों को नियंत्रित करने में सहायक होंगी। यह पहल राजधानी में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों का उदाहरण मानी जा रही है। एयरपोर्ट परिसर में धूल के स्तर को कम करने के उद्देश्य से यह प्रणाली नियमित अंतराल पर फाइन वॉटर मिस्ट का छिड़काव करेगी, जिससे हवा में मौजूद प्रदूषक कण नीचे बैठेंगे और वातावरण अपेक्षाकृत स्वच्छ रहेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अवसर पर कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए बहुआयामी रणनीति पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सभी स्टेकहोल्डर्स—सरकारी एजेंसियों, निजी कंपनियों और नागरिकों—के साथ समन्वय स्थापित कर राजधानी को स्वच्छ और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। एयरपोर्ट क्षेत्र में डस्ट मिटिगेशन के लिए GMR Group द्वारा की गई इस पहल की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ का सफल उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के तकनीकी उपायों को शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है। कार्यक्रम में सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, विधायक कैलाश गहलोत सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

‘अस्सी’ रिव्यू: हर 20 मिनट की चीख और सिस्टम से सीधा सवाल

Movie review: क्या आप जानते हैं कि जब आप यह लेख पढ़ना शुरू करते हैं और जब तक इसे खत्म करेंगे, तब तक देश के किसी कोने में एक और मासूम की चीख सन्नाटे में दब चुकी होगी? आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर 20 मिनट में एक रेप रिपोर्ट दर्ज होता है। सुनने में यह सिर्फ एक ‘नंबर’ लगता है, लेकिन 20 फरवरी को रिलीज़ हो रही फिल्म ‘अस्सी’ इसी नंबर के पीछे छिपे उस असहनीय दर्द को परदे पर उतारती है, जिसे समाज अक्सर कालीन के नीचे सरका देता है। निर्देशक अनुभव सिन्हा और अभिनेत्री तापसी पन्नू की जोड़ी पहले भी ‘मुल्क’ और ‘थप्पड़’ जैसी फिल्मों के जरिए सामाजिक मुद्दों पर तीखा प्रहार कर चुकी है। अब ‘अस्सी’ के माध्यम से यह जोड़ी एक बार फिर न्याय व्यवस्था, समाज और हमारी सामूहिक संवेदनहीनता पर सवाल खड़े करती है। फिल्म को टी-सीरीज ने प्रोड्यूस किया है। कहानी: एक रात, जो जिंदगी बदल देती है फिल्म की कहानी परिमा (कानी कुस्रुति) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पेशे से एक स्कूल टीचर है। दिल्ली जैसे महानगर में वह अपने पति विनय (मोहम्मद जीशान अय्यूब) और छोटे बेटे ध्रुव (अद्विक जायसवाल) के साथ एक सादा और संतुलित जीवन जी रही है। लेकिन एक रात, स्कूल की पार्टी से घर लौटते समय पांच लोग उसका अपहरण करते हैं, कार में सामूहिक बलात्कार करते हैं और उसे अधमरी हालत में रेलवे ट्रैक पर फेंक देते हैं। सुबह के साथ अस्पताल और पुलिस की औपचारिकताएं शुरू होती हैं, आरोपी पकड़े जाते हैं और यहीं से शुरू होती है असली लड़ाई—अदालत की लड़ाई। परिमा की ओर से केस लड़ने के लिए सामने आती हैं वकील रावी (तापसी पन्नू)। लेकिन यह लड़ाई केवल कानूनी दांव-पेंच तक सीमित नहीं है; यह आत्मसम्मान, परिवार, बच्चे के मनोविज्ञान और समाज की मानसिकता से जूझने की जंग है। फिल्म का नाम ‘अस्सी’ क्यों है? इसका रहस्य निर्देशक अंत तक संभालकर रखते हैं—एक ऐसा प्रतीक, जो आंकड़े को संवेदना में बदल देता है। सिर्फ कोर्टरूम ड्रामा नहीं, सामाजिक दस्तावेज ‘अस्सी’ को महज कोर्टरूम ड्रामा कहना इसके प्रभाव को कम आंकना होगा। फिल्म में हर 20 मिनट पर स्क्रीन पर एक स्लेट उभरती है, जो दर्शकों को याद दिलाती है कि जब आप एयर-कंडीशंड थिएटर में बैठे हैं, बाहर एक और रेप रिपोर्ट हो चुका है। यह सिनेमाई तकनीक दर्शक को कहानी से बाहर नहीं जाने देती—वह आंकड़े और वास्तविकता के बीच फंसा रहता है। अनुभव सिन्हा इस बार किसी भी तरह की सिनेमाई चाशनी से बचते हैं। शुरुआती दृश्य ही इतना विचलित करने वाला है कि दर्शक असहज हो जाए। यहां दर्द को ‘एस्थेटिक’ नहीं बनाया गया, उसे उसी कड़वाहट के साथ दिखाया गया है। राइटिंग: फिल्म की असली ताकत फिल्म के लेखक गौरव सोलंकी ने अपने संवादों से व्यवस्था की परतें उधेड़ दी हैं। बिना शोर मचाए, बिना भावुकता के अतिरेक के, संवाद सीधे और सटीक वार करते हैं। कोर्टरूम में नाटकीय चीख-पुकार नहीं, बल्कि संयमित तर्क हैं। जज का ‘डेकोरम’ याद दिलाना इस बात का संकेत है कि फिल्म वास्तविकता की जमीन पर खड़ी है। बीच में ‘छतरी मैन’ वाला सब-प्लॉट कहानी की गति को थोड़ा धीमा करता है, लेकिन लेखन की मजबूती फिल्म को भटकने नहीं देती। यहां साबित होता है कि मजबूत स्क्रिप्ट ही सिनेमा की असली हीरो होती है। अभिनय: सन्नाटे की भाषा कानी कुस्रुति ने परिमा के किरदार को जिया है, निभाया नहीं। उनके चेहरे पर पसरा सन्नाटा हजार संवादों पर भारी पड़ता है। आंखों की थकान और टूटा हुआ आत्मविश्वास दर्शक को भीतर तक झकझोर देता है। तापसी पन्नू एक बार फिर वकील के रूप में कमांडिंग दिखती हैं। उनके तर्कों में दृढ़ता है, लेकिन संवेदना भी। वह ‘मसीहा’ नहीं बनतीं, बल्कि एक प्रोफेशनल वकील के रूप में सिस्टम के भीतर रहकर लड़ाई लड़ती नजर आती हैं। छोटे अद्विक जायसवाल ने जिस मासूमियत से एक पीड़िता के बच्चे के मानसिक संघर्ष को दिखाया है, वह चौंकाता है। इसके अलावा नसीरुद्दीन शाह, मनोज पाहवा, कुमुद मिश्रा, रेवती और सीमा पाहवा जैसे दिग्गज कलाकार फिल्म को भावनात्मक गहराई देते हैं। हर किरदार अपनी जगह सटीक बैठता है।