RJD के सभी 25 विधायक BJP में होंगे शामिल! बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव का बड़ा दावा, तेजस्वी यादव पर साधा निशाना

पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के मंत्री रामकृपाल यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि पार्टी के सभी 25 विधायक जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है और विपक्ष ने इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति करार दिया है। रामकृपाल यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि RJD के विधायक पार्टी की आंतरिक कलह और नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में RJD में टूट देखने को मिलेगी और उसके सभी विधायक BJP का दामन थामेंगे। मंत्री के इस बयान को आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। तेजस्वी यादव पर तंज मंत्री रामकृपाल यादव ने RJD नेता तेजस्वी यादव पर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि तेजस्वी सिर्फ बयानबाजी की राजनीति करते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर उनका संगठन कमजोर हो चुका है। रामकृपाल यादव के मुताबिक, तेजस्वी यादव अपने विधायकों को साथ रखने में नाकाम रहे हैं और यही वजह है कि पार्टी में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि RJD अब सिर्फ परिवारवाद और खोखले वादों की पार्टी बनकर रह गई है, जिससे विधायक और कार्यकर्ता दोनों ही निराश हैं। राजनीतिक हलकों में तेज प्रतिक्रिया रामकृपाल यादव के इस बयान के बाद RJD की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान बिहार की राजनीति में दबाव बनाने और विपक्ष को घेरने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं RJD समर्थकों का कहना है कि यह दावा पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक है। फिलहाल रामकृपाल यादव के इस बड़े दावे ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है और अब सबकी निगाहें RJD की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।

‘आदमी से जीत सकता हूं, मशीन से नहीं’—चुनाव हारने के बाद खेसारी लाल यादव का बड़ा बयान, फिर गरमाई सियासत

बिहार/ सारण: छपरा विधानसभा सीट से चुनाव हारने के बाद भोजपुरी सुपरस्टार और प्रत्याशी खेसारी लाल यादव का एक बयान एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। हार के बाद मीडिया से बातचीत में खेसारी ने कहा, “मैं आदमी से जीत सकता हूं, लेकिन मशीन से नहीं।” उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक बहस तेज हो गई है। खेसारी लाल यादव ने स्पष्ट किया कि उनका राजनीति में आने का कोई पूर्व नियोजित इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें चुनावी मैदान में उतरना पड़ा। इस दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया—खासकर यह कि कौन अपना है और कौन पराया। ‘चुनाव ने पहचान करा दी’ खेसारी ने कहा कि चुनाव के दौरान उन्हें कई तरह के अनुभव हुए। कुछ लोग जो शुरुआत में साथ नजर आ रहे थे, वे वक्त आने पर पीछे हट गए, जबकि कुछ ऐसे लोग भी सामने आए जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के उनका साथ दिया। उन्होंने कहा, “यह चुनाव मेरे लिए सिर्फ हार-जीत का सवाल नहीं था, बल्कि रिश्तों और भरोसे की परीक्षा भी थी।” ईवीएम पर इशारों में सवाल अपने बयान में खेसारी ने भले ही सीधे तौर पर ईवीएम पर आरोप न लगाया हो, लेकिन ‘मशीन से नहीं जीत सकता’ कहकर उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उनके समर्थकों का कहना है कि खेसारी को जनता का समर्थन मिला, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में नहीं गया। वहीं, विपक्षी दल इस बयान को हार की हताशा बता रहे हैं। राजनीति को लेकर आगे क्या? भविष्य की राजनीति को लेकर पूछे गए सवाल पर खेसारी लाल यादव ने फिलहाल कोई ठोस ऐलान नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह जनता के बीच रहेंगे और अपने काम के जरिए लोगों से जुड़े रहेंगे। “राजनीति में रहना है या नहीं, यह वक्त बताएगा। अभी मैं अपनी जनता और अपने काम पर ध्यान दूंगा,” उन्होंने कहा। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं खेसारी का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। समर्थक जहां इसे सिस्टम पर सवाल उठाने वाला साहसिक बयान बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे चुनावी हार का बहाना करार दे रहे हैं। कुल मिलाकर, चुनाव हारने के बाद खेसारी लाल यादव का यह बयान न सिर्फ चर्चा में है, बल्कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में नई बहस को भी जन्म दे सकता है।

बिहार की सियासत में उथल-पुथल: नितिन नबीन को दिल्ली की राह, कुशवाहा बाहर! चिराग की निर्णायक भूमिका

पटना, 22 दिसंबर: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है। राजधानी पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में जोड़-घटाव का खेल तेज हो चुका है। इस सियासी बिसात पर जहां भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन की राज्यसभा में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है, वहीं उपेंद्र कुशवाहा की विदाई की अटकलें भी जोर पकड़ चुकी हैं। इसी बीच, चिराग पासवान के लिए यह चुनाव महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उनकी राजनीतिक ताकत और भविष्य की दिशा तय करने वाली अग्निपरीक्षा बनता जा रहा है। नितिन नबीन को दिल्ली भेजने की तैयारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी बिहार कोटे से राज्यसभा की एक सीट पर नितिन नबीन को भेजने की रणनीति पर अंतिम चरण में है। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनकी मजबूत पकड़ और लंबे अनुभव को देखते हुए पार्टी उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका सौंपना चाहती है। माना जा रहा है कि यह फैसला बिहार भाजपा के भीतर संतुलन साधने और संगठन को नई धार देने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।  कुशवाहा के लिए सियासी संकट दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी राज्यसभा सीट बचाने की है। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों में उनके पक्ष में आवश्यक संख्या बल जुटा पाना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस बार कुशवाहा का राज्यसभा से बाहर होना लगभग तय है। यह उनकी सक्रिय राजनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। चिराग पासवान की होगी असली परीक्षा राज्यसभा चुनाव चिराग पासवान के लिए बेहद अहम है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता के रूप में यह चुनाव उनके राजनीतिक वजन को परखने का मौका है। सवाल यह है कि चिराग किस खेमे के साथ खड़े होते हैं और उनके समर्थन से सत्ता समीकरण कितना प्रभावित होता है। इस चुनाव के जरिए चिराग यह दिखाने की कोशिश करेंगे कि वे सिर्फ विरासत के नेता नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने वाले सियासी खिलाड़ी हैं।

बिहार हिजाब विवाद की आंच झारखंड तक: इरफान अंसारी के बयान से JMM ने बनाई दूरी

नुसरत को नौकरी ऑफर बना सियासी मुद्दा पटना, 21 दिसंबर: बिहार के एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नुसरत परवीन के साथ कथित तौर पर हिजाब खींचे जाने की घटना ने न सिर्फ राज्य की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि इसकी गूंज अब झारखंड तक सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह राज्य से उठे इस विवाद पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी की प्रतिक्रिया ने नई सियासी बहस छेड़ दी है। मामले के सामने आने के बाद मंत्री इरफान अंसारी ने डॉक्टर नुसरत परवीन के समर्थन में बयान देते हुए झारखंड में नौकरी देने का ऑफर दिया। उनका कहना था कि अगर बिहार में उन्हें असुरक्षित महसूस हो रहा है, तो झारखंड सरकार उनके लिए अवसर उपलब्ध करा सकती है। यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसे एक मानवीय पहल के तौर पर देखा गया। हालांकि, बयान के सियासी मायने निकलते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इससे खुद को अलग कर लिया। पार्टी नेतृत्व ने साफ शब्दों में कहा कि यह इरफान अंसारी का व्यक्तिगत बयान है, न कि सरकार या पार्टी का आधिकारिक रुख। JMM नेताओं का कहना है कि किसी भी राज्य के प्रशासनिक या संवैधानिक मामलों पर प्रतिक्रिया देते समय संस्थागत प्रक्रिया का पालन जरूरी है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को दो राज्यों की राजनीति के टकराव के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान भावनात्मक मुद्दों पर सियासत चमकाने की कोशिश हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह अल्पसंख्यक सुरक्षा और महिला सम्मान का सवाल है। उधर, बिहार सरकार ने पूरे मामले की जांच की बात कही है और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, डॉक्टर नुसरत परवीन की ओर से अब तक किसी राजनीतिक ऑफर पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कुल मिलाकर, हिजाब विवाद ने एक बार फिर देश में धार्मिक स्वतंत्रता, महिला सम्मान और राजनीति की सीमाओं पर बहस तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या दोनों राज्यों की सियासत में कोई ठोस मोड़ लाता है।

‘नीतीश पिता की तरह, बाप-बेटी के बीच विवाद नहीं हो सकता’ — बिहार हिजाब मामले पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का बयान

पटना, 20 दिसंबर: बिहार में हिजाब को लेकर उठे विवाद पर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बड़ा बयान देते हुए इसे विवाद मानने से साफ इनकार किया है। राज्यपाल ने कहा कि इस पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और इसे राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और छात्रा नुसरत परवीन के संबंध को पिता-पुत्री जैसा भावनात्मक रिश्ता बताया। ‘यह विवाद नहीं, संवेदनशील समझ का विषय’ राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि जहां पिता और बेटी का रिश्ता होता है, वहां विवाद की कोई गुंजाइश नहीं रहती। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मामले में एक अभिभावक की तरह संवेदनशीलता दिखाई है और छात्रा की भावनाओं का सम्मान किया है। राजनीति से दूर रखने की अपील राज्यपाल ने कहा कि इस विषय को अनावश्यक रूप से राजनीतिक बहस में घसीटा जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने कहा कि समाज में सौहार्द और आपसी समझ बनाए रखना जरूरी है और ऐसे मामलों में संयम बरतना चाहिए।  नीतीश कुमार की भूमिका की सराहना आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा सामाजिक संतुलन और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने दोहराया कि यह मामला प्रशासनिक या वैचारिक टकराव का नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से जुड़ा विषय है। हिजाब मुद्दे पर बढ़ी चर्चा गौरतलब है कि हाल के दिनों में बिहार में हिजाब को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हुई थी। राज्यपाल के इस बयान के बाद मामला शांत होने और विवाद पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है। राज्यपाल के मुताबिक, ऐसे संवेदनशील मुद्दों को टकराव की नजर से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और सामाजिक समरसता के नजरिए से देखा जाना चाहिए।

एक्सप्रेस-वे निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा बिहार, UP की तर्ज पर बनेगी विशेष अथॉरिटी

पटना, 20 दिसंबर: बिहार सरकार ने राज्य में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए बिहार सरकार केंद्र सरकार पर निर्भर नहीं रहेगी। राज्य में कुल पांच एक्सप्रेस-वे का निर्माण सरकार स्वयं कराएगी। इसके लिए उत्तर प्रदेश की तर्ज पर एक विशेष अथॉरिटी का गठन किया जाएगा, जो इन परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी का काम करेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित अथॉरिटी को एक्सप्रेस-वे निर्माण से जुड़ी सभी शक्तियां दी जाएंगी, ताकि परियोजनाओं में देरी न हो और काम समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके। इस पहल से न सिर्फ राज्य की आंतरिक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। बताया जा रहा है कि जिन पांच एक्सप्रेस-वे की योजना बनाई जा रही है, वे राज्य के प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों को आपस में जोड़ेंगे। इससे यात्रा का समय कम होगा और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से बिहार को बुनियादी ढांचे के विकास में नई गति मिलेगी और राज्य देश के विकसित एक्सप्रेस-वे नेटवर्क वाले राज्यों की कतार में शामिल हो सकेगा।

घर में नहीं था राशन का एक दाना, एक चौकी पर सोते थे 6 लोग; बच्चों संग सुसाइड करने वाले अमरनाथ की दर्दनाक कहानी

मुजफ्फरपुर ,16 दिसंबर: बिहार के मुजफ्फरपुर से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां अत्यंत गरीबी से जूझ रहे एक पिता ने अपने पांच मासूम बच्चों के साथ आत्महत्या की कोशिश की। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि दो बच्चों की जान फांसी का फंदा गले में पूरी तरह न कस पाने के कारण बच गई। मृतक की पहचान अमरनाथ के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि घर में खाने के लिए एक दाना तक मौजूद नहीं था। छह लोगों का पूरा परिवार एक ही टूटी-फूटी चौकी पर सोने को मजबूर था। रोजी-रोटी के साधन खत्म हो चुके थे और कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, अमरनाथ काफी समय से मानसिक तनाव में था। गरीबी, बच्चों की भूख और भविष्य की चिंता ने उसे इस हद तक तोड़ दिया कि उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है। बचाए गए दोनों बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। यह घटना समाज और सिस्टम दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है—कि आखिर कोई पिता अपने ही बच्चों के साथ मौत को गले लगाने पर क्यों मजबूर हो जाता है।

संजय सरावगी बने बिहार बीजेपी के अध्यक्ष, केंद्रीय नेतृत्व ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

पटना, 15 दिसंबर: भारतीय जनता पार्टी ने बिहार में संगठन को नई दिशा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय नेतृत्व ने संजय सरावगी को बिहार प्रदेश बीजेपी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ ही पार्टी ने आगामी चुनावों और संगठनात्मक मजबूती के संकेत दे दिए हैं। संजय सरावगी वर्तमान में दरभंगा शहरी विधानसभा सीट से विधायक हैं और उनकी गिनती पार्टी के अनुभवी व जमीनी नेताओं में होती है। उनका राजनीतिक सफर छात्र जीवन से ही शुरू हुआ। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े रहे और 1995 में भारतीय जनता पार्टी की औपचारिक सदस्यता ली। पार्टी संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद संजय सरावगी को अब प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी गई है। केंद्रीय नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से बिहार में बीजेपी और अधिक मजबूत होगी। नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि संजय सरावगी के नेतृत्व में बीजेपी बिहार में संगठन को बूथ स्तर तक और सशक्त करने पर जोर देगी।

नालंदा में सरकारी जमीन की अवैध बिक्री का आरोप, बाहरी लोगों की संदिग्ध गतिविधियों से दहशत

नालंदा, 14 दिसंबर: बिहार के नालंदा जिले में भू-माफिया द्वारा सरकारी जमीन की अवैध बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोग मिलकर सरकारी भूमि को निजी बताकर बेच रहे हैं। इस पूरे मामले ने इलाके में सनसनी फैला दी है। ग्रामीणों के अनुसार, जमीन खरीदने के लिए आने वाले लोगों की भाषा और बोली बिहार की नहीं लगती। वे अक्सर देर रात इलाके में पहुंचते हैं और सुबह होने से पहले गायब हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि इन गतिविधियों से किसी बड़ी साजिश या अवैध कारोबार की आशंका गहराती जा रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि भू-माफिया जमीन की घेराबंदी कर उसे निजी संपत्ति बताने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ जगहों पर अस्थायी निर्माण और माप-जोख का काम भी रात के अंधेरे में किया गया है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, संबंधित राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस तरह की किसी अवैध बिक्री की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। अधिकारियों ने दावा किया कि यदि शिकायत लिखित रूप में आती है तो मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, प्रशासन की निष्क्रियता और बाहरी लोगों की संदिग्ध आवाजाही से स्थानीय लोग भयभीत हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी जमीन को बचाया जा सके और इलाके में सुरक्षा बहाल हो।

तेज प्रताप यादव ने बढ़ाई सियासी हलचल, दो राज्यों से चुनाव लड़ने का किया दावा; बहन की सुरक्षा की भी उठाई मांग

पटना, 12 दिसंबर: राजद नेता तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर बिहार की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। बुधवार को उन्होंने बड़ा राजनीतिक बयान देते हुए कहा कि वे आने वाले चुनावों में दो राज्यों से उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन दो राज्यों से वे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। तेज प्रताप ने इसके साथ ही अपनी बहन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनकी बहन के साथ हाल ही में हुई एक घटना के बाद सुरक्षा बढ़ाने की आवश्यकता है। इस संबंध में उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। राजनीतिक हलकों में तेज प्रताप के इस बयान को 2025 के चुनावी समर से पहले एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। राजद खेमे में भी उनके इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे प्रचार पाने की कोशिश बताया, जबकि समर्थक इसे तेज प्रताप की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता से जोड़कर देख रहे हैं।