नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता दायरा जहां तकनीक की दुनिया में क्रांति ला रहा है, वहीं अब इसका असर आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखने लगा है। इंडस्ट्री से आ रही ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, AI से जुड़े डेटा सेंटर्स और सर्वर्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ है कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी चिप्स की सप्लाई घटती जा रही है, जिससे आने वाले समय में स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और लैपटॉप की कीमतों में इजाफा तय माना जा रहा है।
7 से 10 फीसदी तक बढ़ सकती हैं कीमतें
रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यदि मेमोरी चिप्स की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इस साल इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में 7 से 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मेमोरी चिप्स की लागत बढ़ने से कंपनियों का प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ रहा है, जिसका बोझ आखिरकार उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।
AI बना वजह, कंज्यूमर चिप्स पीछे
AI टेक्नोलॉजी के तेजी से विस्तार के कारण डेटा सेंटर्स और सर्वर्स के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) और सर्वर-ग्रेड DRAM की मांग लगातार बढ़ रही है। चिप बनाने वाली कंपनियां अब ज्यादा मुनाफे वाले इन प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं। नतीजतन, स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाली कंज्यूमर-ग्रेड मेमोरी चिप्स का प्रोडक्शन घट गया है।
300% से 400% तक उछलीं मेमोरी चिप्स की कीमतें
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ समय से मेमोरी चिप्स की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। कुछ मामलों में इनकी कीमतें 300% से 400% तक बढ़ चुकी हैं। इसका सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर पड़ा है, जिससे कंपनियों के पास अपने प्रोडक्ट्स महंगे करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
बदल सकता है टीवी खरीदने का ट्रेंड
टीवी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए एक्सपर्ट्स का मानना है कि उपभोक्ता अब 65 इंच जैसे बड़े स्क्रीन वाले मॉडल्स से दूरी बना सकते हैं। आने वाले समय में 55 इंच या उससे छोटे साइज के टीवी की डिमांड बढ़ सकती है। यानी, बड़े स्क्रीन टीवी का मौजूदा ट्रेंड धीरे-धीरे बदलने के संकेत दे रहा है।
छोटे ब्रांड्स पर ज्यादा असर
बड़े टेक ब्रांड्स मेमोरी चिप्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे सप्लायर्स पर दबाव और बढ़ जाता है। इसका नुकसान छोटे ब्रांड्स को उठाना पड़ता है, जिनके लिए चिप्स की उपलब्धता और भी मुश्किल हो जाती है। इसका असर पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार पर पड़ सकता है और प्रतिस्पर्धा असंतुलित हो सकती है।
कुल मिलाकर, AI की तेज़ तरक्की जहां तकनीकी भविष्य को नया आकार दे रही है, वहीं इसका आर्थिक असर अब आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता दिख रहा है। आने वाले महीनों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अपनी जेब पर पड़ने वाले इस असर के लिए तैयार रहना पड़ सकता है।