छपरा, 28 फरवरी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वादश अंजनी कुमार गोड़ की अदालत ने मढ़ौरा थाना कांड संख्या 28/2007 से जुड़े बहुचर्चित हत्या मामले में चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने सत्र वाद संख्या 600/27 में सजा के बिंदु पर सुनवाई पूरी करने के बाद मढ़ौरा थाना क्षेत्र के भोथहा निवासी रविंद्र सिंह, गुड्डू सिंह, विजय सिंह और सुभाष सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 के तहत दोषी ठहराते हुए प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषीगण सामूहिक रूप से हत्या के अपराध में संलिप्त पाए गए हैं। अर्थदंड की राशि अदा नहीं करने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त कारावास की सजा भी भुगतनी होगी।

2007 में हुई थी घटना

अभियोजन के अनुसार, मढ़ौरा थाना क्षेत्र के भोथहा गांव निवासी बालेंद्र सिंह ने 4 फरवरी 2007 को सदर अस्पताल छपरा में अपना फर्द बयान दर्ज कराया था। उन्होंने बताया था कि 3 फरवरी 2007 की संध्या लगभग 7 बजे वे अपने दरवाजे पर रामविचार सिंह और राजेश कुमार सिंह के साथ आग ताप रहे थे। इसी दौरान सभी आरोपी वहां पहुंचे और जान से मारने की नीयत से लाठी, डंडा और चाकू से हमला कर दिया।

हमले के दौरान जब उनके पुत्र राजेश कुमार सिंह और भाई रामविचार सिंह बचाने आए तो आरोपियों ने उन्हें भी गंभीर रूप से घायल कर दिया। शोर-शराबा सुनकर जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो आरोपी फरार हो गए।

घायलों को तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल छपरा लाया गया, जहां चिकित्सकों ने रामविचार सिंह को मृत घोषित कर दिया।

छह गवाहों की हुई गवाही

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक विमल चंद्र सिंह एवं उनके सहयोगी ओम प्रकाश राय ने सरकार की ओर से पैरवी की। अदालत में चिकित्सक और अनुसंधानकर्ता सहित कुल छह गवाहों की गवाही कराई गई। पुलिस ने 24 नवंबर 2007 को आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया था।

लगभग 19 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।

Rajnish Pandey
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