नई दिल्ली, 17 फरवरी 2026। राष्ट्रीय राजधानी इस सप्ताह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की वैश्विक हलचल का केंद्र बनी हुई है। सोमवार से शुक्रवार (16–20 फरवरी) तक आयोजित हो रहा इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 न केवल तकनीकी दुनिया के दिग्गजों को एक मंच पर ला रहा है, बल्कि नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और आम नागरिकों के बीच संवाद का सेतु भी बना रहा है।
भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय तथा इंडिया एआई मिशन की पहल पर आयोजित यह पांच दिवसीय शिखर सम्मेलन “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की थीम के साथ एआई को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
ग्लोबल साउथ की पहली बड़ी एआई पहल
सरकार इस समिट को ग्लोबल साउथ में आयोजित पहली बड़ी वैश्विक एआई शिखर बैठक के रूप में प्रस्तुत कर रही है। यहां चर्चा केवल एआई के संभावित खतरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी केंद्रित है कि कैसे एआई के लाभ गरीब और मध्यम वर्ग तक पहुंचाए जाएं।
सरकार का मानना है कि यह पहल “एआई डिवाइड” यानी तकनीक-संपन्न और तकनीक-वंचित वर्गों के बीच की खाई को पाटने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इस समिट में 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहे हैं।
- 20 देशों के प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति
- अनेक देशों के मंत्री
- वैश्विक कंपनियों के 50 से अधिक सीईओ
- एआई इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 500 विशेषज्ञ, जिनमें इनोवेटर्स, रिसर्चर और सीटीओ शामिल
भारत की ओर से उद्योग जगत के कई बड़े नाम संभावित रूप से भाग ले रहे हैं, जिनमें
- मुकेश अंबानी (आरआईएल)
- नटराजन चंद्रशेखरन (टाटा संस)
- नंदन नीलेकणी (इंफोसिस)
- सुनील भारती मित्तल (भारती समूह)
- के कृतिवासन (टीसीएस)
- रोशनी नादर (एचसीएल टेक)
- सलिल पारेख (इंफोसिस) जैसे दिग्गज शामिल हो सकते हैं।
300 से अधिक एआई प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी
एक्सपो में 300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स प्रदर्शित किए जा रहे हैं। यहां आम लोग और विशेषज्ञ यह जान सकेंगे कि एआई में वर्तमान में क्या नई प्रगति हो रही है और भविष्य में कौन से बड़े बदलाव संभावित हैं।
नीति, रिसर्च और इंडस्ट्री का संगम
यह समिट केवल तकनीकी प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इसमें नीति-निर्माण, रिसर्च सहयोग, औद्योगिक साझेदारी और सार्वजनिक सहभागिता को जोड़ने का प्रयास किया गया है। विशेषज्ञ एआई से जुड़ी नैतिकता, डेटा सुरक्षा, जवाबदेही और मानव निगरानी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं।
चुनौतियों पर खुली बहस
एआई से जुड़े जोखिम, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और रोजगार पर प्रभाव जैसे विषयों पर विस्तृत विमर्श हो रहा है। उद्देश्य है—एआई को सुरक्षित, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना।
वैश्विक पृष्ठभूमि: कैसे आगे बढ़ा एआई विमर्श?
- यूनाइटेड किंगडम (2023): पहली एआई समिट, जिसमें गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और जवाबदेही पर जोर दिया गया।
- दक्षिण कोरिया (मई 2024): एआई जोखिम के वैज्ञानिक आकलन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता रेखांकित की गई।
- पेरिस (फरवरी 2025): एआई को सार्वजनिक हित और टिकाऊ विकास से जोड़ने पर बल दिया गया।
दिल्ली समिट इन सभी चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए एआई को सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के औजार के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
आम नागरिकों के लिए क्या मायने?
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई अब केवल बड़ी कंपनियों की तकनीक नहीं रह गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, छोटे व्यवसाय और सरकारी सेवाओं में इसका उपयोग आम लोगों के जीवन को आसान बना सकता है।
यदि नीति और तकनीक का संतुलित उपयोग हुआ, तो यह समिट भारत को एआई नवाचार और जिम्मेदार तकनीकी नेतृत्व के वैश्विक मानचित्र पर मजबूत स्थान दिला सकता है।