सुनवाई के दौरान केंद्र को कमेटी बनाने का आदेश, नियमों पर अस्थायी रोक
नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत में अहम सुनवाई शुरू हो गई है। इन नियमों के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है और साथ ही कहा है कि “हम इस पर रोक लगा रहे हैं।”
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख उन लाखों छात्रों, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो UGC के नए नियमों को लेकर आशंकित और नाराज़ थे।
क्या है मामला?
UGC के नए नियमों को लेकर आरोप है कि वे **शिक्षा व्यवस्था की स्वायत्तता, छात्रों के अधिकारों और विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। कई शैक्षणिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन नियमों को लागू करने से पहले न तो पर्याप्त परामर्श किया गया और न ही सभी पक्षों की राय ली गई।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट शब्दों में कहा कि इतने संवेदनशील विषय पर एकतरफा फैसला स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने निर्देश दिया कि
- केंद्र सरकार एक स्वतंत्र और संतुलित कमेटी का गठन करे
- कमेटी सभी हितधारकों—छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालयों—की राय सुने
- तब तक इन नियमों को लागू नहीं किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि शिक्षा से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और सहमति बेहद ज़रूरी है।
छात्रों और शिक्षकों में राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद देशभर के छात्र संगठनों और शिक्षक संघों ने राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि अदालत का हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करेगा कि शिक्षा नीति मनमाने ढंग से नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत तय हो।
अब सबकी नजर केंद्र सरकार द्वारा बनाई जाने वाली कमेटी पर है। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। तब तक UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक जारी रहेगी।