नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया, जब नितिन नवीन ने पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में औपचारिक रूप से पदभार संभाला। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं उपस्थित रहे और उन्होंने अपने संबोधन से न केवल माहौल को भावुक बनाया, बल्कि पार्टी की संगठनात्मक संस्कृति का भी सशक्त संदेश दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने नितिन नवीन को बधाई देते हुए कहा,“आज नितिन नवीन मेरे बॉस हैं और मैं उनका कार्यकर्ता हूं।”
पीएम मोदी का यह बयान मंच से उतरकर सियासी गलियारों तक गूंजता रहा। इसे भाजपा की उस परंपरा के रूप में देखा जा रहा है, जहां पद से पहले संगठन और व्यक्ति से पहले विचारधारा को महत्व दिया जाता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी इसलिए बनी है क्योंकि यहां नेतृत्व अहंकार नहीं, सेवा भाव से चलता है। अध्यक्ष का पद केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि करोड़ों कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने आगे कहा कि नितिन नवीन का संगठनात्मक अनुभव, जमीन से जुड़ा स्वभाव और कार्यकर्ताओं से संवाद करने की क्षमता पार्टी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।
नितिन नवीन ने पदभार ग्रहण करते हुए कहा कि यह उनके लिए सम्मान के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि—
“मैं इस पद को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम मानता हूं। संगठन को और मजबूत करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी।”
नवीन ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में पार्टी का फोकस युवाओं, महिलाओं, किसानों और अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक संगठन की पकड़ मजबूत करने पर रहेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का “मैं कार्यकर्ता हूं” वाला बयान केवल विनम्रता नहीं, बल्कि 2029 और उससे आगे की राजनीति के लिए संगठन को केंद्र में रखने की रणनीति का संकेत है। यह संदेश साफ है कि भाजपा में व्यक्ति नहीं, संगठन चलता है।
देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं में इस बदलाव को लेकर खासा उत्साह देखा गया। सोशल मीडिया से लेकर पार्टी कार्यालयों तक, नितिन नवीन के नेतृत्व में नए जोश और नई दिशा की चर्चा है।
नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि भाजपा की उस परंपरा की पुनर्पुष्टि है जहां *नेता भी कार्यकर्ता होता है प्रधानमंत्री मोदी का बयान इस बात का प्रतीक है कि सत्ता के शिखर पर बैठा व्यक्ति भी संगठन के अनुशासन में खुद को सबसे नीचे खड़ा मानता है—और यही भाजपा की असली ताकत है।