सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायक माना जाता है। विशेषकर जया एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की भक्ति से जोड़कर मान्यता दी जाती है कि इससे जीवन के सारे दुख नष्ट होते हैं, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और आत्मा को शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग सरल होता है।
जया एकादशी कब है? (तिथि एवं समय)
* जया एकादशी व्रत का दिन:गुरुवार, 29 जनवरी 2026
* **एकादशी तिथि आरंभ: 28 जनवरी 2026 शाम लगभग 4:35 बजे
* एकादशी तिथि समाप्त: 29 जनवरी 2026 दोपहर लगभग 1:55 बजे
* परान (व्रत तोड़ने का शुभ समय):30 जनवरी 2026 सुबह 7:10 — 9:20 बजे के बीच
यह व्रत माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि पर रखा जाता है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है।
शुभ मुहूर्त — पूजा के उत्तम समय
पंचांग के अनुसार जया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
* सुबह पूजा का अच्छा समय:7:11 बजे से 8:32 बजे तक
* दोपहर तक दूसरा शुभ समय:*11:14 बजे से 1:55 बजे तक
इन समयों में भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना और मंत्र जाप कर सकते हैं।
पूजा विधि — कैसे करें जया एकादशी पूजा
1. प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
3. घी का दीपक जलाएँ, इत्र-अक्षत, तिल, दही, फूल आदि अर्पित करें।
4. भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते, पंचामृत और फल अर्पित करें।
5. “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या विष्णु सहस्रनाम आदि मंत्रों का उच्चारण ध्यानपूर्वक करें।
6. दिनभर निर्जला व्रत या फलाहार व्रत रखें तथा मन को शुद्ध रखें।
7. परान (व्रत तोड़ने) के समय सुबह स्नान के बाद ही दान या ब्राह्मण भोजन अर्पित करना शुभ है।
धार्मिक महत्व
जया एकादशी व्रत को संपूर्ण कर लेने से मान्यता है कि:
* जीवन के सारे दुख, विघ्न और पापों का नाश होता है।
* भक्त की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और धार्मिक प्रगति संभव होती है।
* पवित्र व्रत से आत्मा का शुद्धिकरण और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है।
* एकादशी व्रत से न केवल भौतिक शुभ फल बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
समापन संदेश
जया एकादशी का व्रत सनातन परंपरा में न केवल एक धार्मिक परंपरा है बल्कि जीवन को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने वाला एक सशक्त साधन भी माना जाता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धा और विधिपूर्वक उपासना करने से जीवन में सकारात्मकता और दैवी कृपा का प्रवेश होता है।
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