नई दिल्ली/क्वेटा: पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से भारत के समर्थन में एक तीखा और भावनात्मक संदेश सामने आया है। बलूचिस्तान के प्रमुख नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक ओपन लेटर लिखकर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और बलूच जनता की आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की अपील की है। पत्र में उन्होंने पाकिस्तान को “दमनकारी राज्य” बताते हुए उसके कथित अत्याचारों और पाकिस्तान-चीन के खतरनाक रणनीतिक गठजोड़ का विस्तार से जिक्र किया है।

“हम भारत के साथ हैं”

अपने पत्र में मीर यार बलूच ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि बलूच जनता भारत को अपना स्वाभाविक मित्र मानती है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान में दशकों से मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है—जबर्दस्ती गुमशुदगी, सैन्य कार्रवाई और संसाधनों की लूट आम बात बन चुकी है। पत्र में यह भी कहा गया कि “पाकिस्तान को उखाड़ फेंकने” की भावना बलूच समाज में इसलिए पनप रही है क्योंकि वहां लोकतांत्रिक अधिकारों और आत्मनिर्णय की मांग को लगातार दबाया जा रहा है।

पाकिस्तान-चीन गठजोड़ पर आरोप

मीर यार बलूच ने अपने पत्र में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना के नाम पर बलूचिस्तान की जमीन और संसाधनों का दोहन किया जा रहा है, जबकि स्थानीय लोगों को न तो पर्याप्त रोजगार मिला और न ही सुरक्षा।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि चीन भविष्य में पाकिस्तान में अपनी सेना की तैनाती कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन और अधिक बिगड़ सकता है। उनके मुताबिक, यह गठजोड़ न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए खतरा है।

भारत से क्या अपेक्षा?

पत्र में भारत से यह अपेक्षा जताई गई है कि वह:

* बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाए,

* संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक संस्थाओं में बलूच आवाज़ को समर्थन दे,

* और क्षेत्र में शांति व स्थिरता के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाए।

कूटनीतिक हलकों में हलचल

इस ओपन लेटर के सामने आने के बाद कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस पत्र पर आधिकारिक प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान मुद्दा पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील है और ऐसे बयानों से भारत-पाकिस्तान संबंधों में नई बहस छिड़ सकती है।

गौरतलब है कि बलूचिस्तान लंबे समय से अस्थिरता और विद्रोह का केंद्र रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद यह क्षेत्र विकास और बुनियादी सुविधाओं में पीछे है। बलूच नेताओं का आरोप रहा है कि इस असंतोष की जड़ें राजनीतिक उपेक्षा और सैन्य दमन में हैं।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *