उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा के दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। अभिनेत्री द्वारा महाकाल मंदिर में भस्म आरती में भाग लेने और जलाभिषेक करने के बाद कुछ धार्मिक संगठनों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी कड़ी में बरेलवी मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने नुसरत के खिलाफ फतवा जारी कर दिया है, जिससे मामला और गरमा गया है।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने बयान में कहा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा ‘नाजायज’ है और किसी भी मुसलमान का इसमें शामिल होना शरीयत के खिलाफ माना जाता है। उन्होंने कहा कि नुसरत भरूचा का महाकाल मंदिर में पूजा करना इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन है। मौलाना ने यहां तक कहा कि अभिनेत्री शरीयत की नजर में गुनहगार हैं।
फतवे में यह भी कहा गया है कि नुसरत भरूचा को अल्लाह से तौबा करनी चाहिए और दोबारा कलमा पढ़ना चाहिए, ताकि वे इस्लाम के दायरे में वापस आ सकें। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक वर्ग मौलाना के बयान का समर्थन कर रहा है, तो वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे व्यक्तिगत आस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं।
उधर, महाकाल मंदिर में दर्शन को लेकर नुसरत भरूचा की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, अभिनेत्री के समर्थकों का कहना है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां हर व्यक्ति को अपनी आस्था के अनुसार पूजा करने की आज़ादी है। उनका तर्क है कि किसी धार्मिक स्थल पर दर्शन करना निजी विश्वास का मामला है और इसे किसी एक धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर धर्म, व्यक्तिगत आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई बहस को जन्म दे दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या किसी सार्वजनिक हस्ती की निजी धार्मिक गतिविधियों पर इस तरह के फतवे सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं। फिलहाल, महाकाल दर्शन का यह मामला धार्मिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र में बना हुआ है।