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नई दिल्ली, 29 मई : कांग्रेस की प्रवक्ता रागिनी नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने सिंदूर दिखाया. उन्होंने कहा, मेरे हाथ और मांग में सिंदूर है. इसका भारतीय महिला के लिए क्या महत्व है ये मैं बीजेपी के नेता को बताना चाहती हूं. सुहाग का, प्रेम का, सात जन्मों के साथ का. सुहाग की रक्षा के लिए, सिंदूर भारतीय नारी की आन – शान है. इसी के साथ कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर अटैक करते हुए कहा, अपनी राजनीतिक और कुटनीतिक विफलता को छिपाने के लिए बीजेपी सिंदूर को ढाल बनाने जा रही है.

दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को मोदी सरकार घर-घर तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है. इसी के तहत महिलाओं को तोहफे के रूप में सिंदूर दिया जाएगा. बीजेपी के सीनियर नेता ने बताया कि 9 जून से बीजेपी के कार्यकर्ता महिलाओं को घर-घर जाकर सिंदूर बांटेंगे. बीजेपी के सीनियर नेता ने बताया कि 9 जून से इसकी शुरुआत होगी. इसी दिन नरेंद्र मोदी ने बतौर देश के पीएम तीसरी बार शपथ ली थी. कांग्रेस ने बीजेपी के इस अभियान पर अटैक करते हुए कहा, बीजेपी घर-घर जाकर सिंदूर वितरण कार्यक्रम करने जा रही है. अपने लिए पुष्पवर्षा करवाते हैं. सोफिया कुरैशी के परिवार से अपने ऊपर पुष्पवर्षा करवाते हैं मोदी जी.

कांग्रेस ने कहा, इसको लेकर हमारे तीन सवाल है—

-पराए आदमी के जरिए दिया गया ये सिंदूर किसके काम आएगा? और किसके लिए काम आएगा? भारतीय नारी को तो सिंदूर पति और ससुराल से मिलता है. ये सिंदूर जो बाटेंगे उस पर भी मोदी जी की तस्वीर छपी होगी.

-किस मुंह से बीजेपी और आरएसएस के नेता घर-घर जाएंगे, किस मुंह से बांटेंगे. जब मारे गए लोगों की पत्नियां और परिवार ये पूछ रहे हैं कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकी कब मारे जाएंगे. बीजेपी के जो नेता सवाल उठा रहे है उनको बरखास्त तक नहीं किया गया तो फिर किस मुंह से लोगों के पास जाएंगे.

-कोविड-19 के दौरान जो लोग मरे हैं उनकी पत्नियों को भी बीजेपी वाले क्या सिंदूर देने जाएंगे. जिन 3 काले कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों की जान चली गई उनकी पत्नियों को भी बीजेपी वाले क्या सिंदूर देने जाएंगे. मजदूर जो मर रहे है उनका क्या? बेरोजगारी के कारण जो लोग रोजाना आत्महत्या कर रहे हैं उनकी पत्नियों को भी सिंदूर देने जाएंगे?

पहलगाम के नाम पर वोट बंटोरे जाएंगे”

कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर सवाल दागते हुए पूछा, बीजेपी के विधायक आर एस पठानिया ने विवादित बयान दिया है कि वायु सेना नालायक है. वायु सेना सो रही थी. इस पर मोदी जी चुप क्यों है. सांप सूंघ गया है मोदी जी को. जब जरूरत है तो पुलवामा और पहलगाम के नाम पर वोट बंटोरे जाएंगे.

रागिनी नायक ने आगे कहा, एक चुटकी सिंदूर की कीमत तुम क्या जानो मोदी बाबू. सिंदूर का स्वरूप और उसका रंग भारत के अलग-अलग प्रांतों में अलग हो सकता है, लेकिन एक भारतीय सनातनी विवाहित महिला के लिए सिंदूर का क्या महत्व है और इसकी क्या पहचान है- मैं बीजेपी और संघ के लोगों को समझाना चाहती हूं. क्योंकि मुझे लगता है इन लोगों को सिंदूर का महत्व समझ नहीं आता.

समझाया सिंदूर का महत्व

कांग्रेस प्रवक्ता ने सिंदूर का महत्व समझाते हुए कहा, सिंदूर प्रतीक है- सुहाग का, सम्मान का, सौभाग्य का, प्रेम के बंधन का, विश्वास के राग का, सुख-दुख के मेल का, 7 जन्मों के साथ का और बुरी नजर को भस्म करने वाली एक चुटकी आग का. जो सिंदूर विवाहित महिला की मांग को सजाता है, जो भारत की नारी शक्ति की आन-बान और शान है. उसी मांग के सिंदूर का दुरुपयोग आत्ममुग्धता की पराकाष्ठा से लिप्त नरेंद्र मोदी अपनी ओछी राजनीति में इस्तेमाल करेंगे और इसकी घोषणा मोदी सरकार कर चुकी है. उन्होंने आगे कहा, ये बेहद शर्म की बात है कि अपनी राजनीतिक और कूटनीतिक विफलता को छिपाने के लिए मोदी सरकार मांग के सिंदूर को ढाल बनाना चाहती है. सेना के पराक्रम और बहादुरी का श्रेय बटोरने के लिए मोदी सरकार और कितना नीचे गिरेगी?

कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी को टारगेट करते हुए कहा, जब देश के हर जिले, हर नुक्कड़ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर और सेना की वर्दी में स्वांग रचकर नरेंद्र मोदी का मन नहीं भरा, तो अब बीजेपी ने घोषणा की है वे घर-घर जाकर सिंदूर बांटेगी. वहीं इनकी सियासत देखिए कि ये घर-घर जाकर उस दिन से सिंदूर बांटना शुरू करेंगे, जिस दिन नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. सिंदूर पर सियासत का इससे घटिया उदाहरण आपको देखने को नहीं मिल सकता.

बीजेपी से पूछे सवाल

रागिनी नायक ने कहा, मैं ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अलावा भी मोदी सरकार से कुछ पूछना चाहती हूं. मैं पूछना चाहती हूं कि,

-नोटबंदी के दौरान जिन 200 लोगों की अपना ही पैसा निकालते हुए जान चली गई, उनकी विधवाओं की सिंदूर की गवाही कौन देगा?

-कोविड के दौरान मरघटों में जो 24 घंटे लाशें जलती थीं, गंगा जी का घाट जिन लाशों से पट गया, उनकी उजड़ी मांग की गवाही कौन देगा?

-तीन काले कानून के खिलाफ जो 700 किसान शहीद हो गए, उनकी पत्नियां भी अपनी सूनी मांग लिए बैठी हैं, क्या आप उनके घर सिंदूर लेकर जाएंगे?

-हर दिन कई किसान और मजदूर खुदकुशी कर रहे हैं, उनकी पत्नियों के बारे में तो आप बात तक नहीं करते.

-आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से परेशान होकर देश में हर साल 12,000 लोग आत्महत्या कर लेते हैं, उनकी पत्नियां भी विधवा होती हैं, क्या आप उनके घर जाएंगे?

-इस महंगाई में जो महिलाएं अपना मंगलसूत्र गिरवी रखकर दो वक्त की रोटी खा रही हैं, क्या आप उनके घर भी सिंदूर लेकर जाएंगे?

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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