नई दिल्ली, 21 अप्रैल : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत की नौकरशाही और नीति निर्माण प्रक्रिया पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकती तथा उनकी सरकार जिन नीतियों पर काम कर रही है, वे अगले 1,000 वर्ष के भविष्य को आकार देंगी।

मोदी ने औद्योगीकरण और उद्यमिता की गति को नियंत्रित करने वाले नियामक के रूप में नौकरशाही की पुरानी भूमिका का जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्र इस मानसिकता से आगे बढ़ चुका है और अब ऐसा माहौल बना रहा है जो आम नागरिकों के बीच उद्यमिता को प्रोत्साहित करता है एवं उन्हें बाधाओं से निपटने में मदद करता है।

मोदी ने यहां विज्ञान भवन में सिविल सेवा दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सिविल सेवाओं को अपने में बदलाव कर नियम पुस्तिकाओं का मात्र रखवाला न बनकर, विकास का सूत्रधार बनना चाहिए।

उन्होंने नौकरशाहों को दिए गए लगभग 40 मिनट के अपने भाषण के दौरान भारत के समाज, युवाओं, किसानों और महिलाओं की आकांक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके सपने अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच गए हैं। उन्होंने इन असाधारण आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए असाधारण गति की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, ”आज हम जिन नीतियों पर काम कर रहे हैं और जो निर्णय ले रहे हैं, वे आगामी 1,000 वर्ष के भविष्य को आकार देंगे।”

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सामूहिक प्रयास एवं दृढ़ संकल्प के महत्व को रेखांकित किया और सभी से इस साझा दृष्टिकोण की दिशा में हर दिन और हर पल अथक परिश्रम करने का आग्रह किया।

मोदी ने वैश्विक स्तर पर हो रहे त्वरित बदलावों का उल्लेख करते हुए हर दो से तीन साल में ‘गैजेट’ के तेजी से बदल जाने को रेखांकित किया और इस बात का जिक्र किया कि बच्चे इन परिवर्तनों के बीच कैसे बड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”भारत की नौकरशाही, कामकाज के तरीके और नीति निर्माण की प्रक्रिया पुराने ढर्रें पर नहीं चल सकती।”

मोदी ने कहा कि भारत का आकांक्षी समाज – युवा, किसान एवं महिलाएं – और इसके सपने अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा, ”इन असाधारण आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए असाधारण गति आवश्यक है।”

प्रधानमंत्री ने आने वाले वर्षों के लिए ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, खेलों के क्षेत्र में प्रगति और अंतरिक्ष अन्वेषण में उपलब्धियों समेत विभिन्न क्षेत्रों में भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को रेखांकित किया। उन्होंने हर क्षेत्र में भारत का परचम लहराने के महत्व पर बल दिया।

उन्होंने भारत को शीघ्र अति शीघ्र विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में सिविल सेवकों की बड़ी जिम्मेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सिविल सेवा दिवस का विषय ‘भारत का समग्र विकास’ है जो देश के लोगों के प्रति एक प्रतिबद्धता एवं वादा है।

मोदी ने कहा कि भारत के समग्र विकास का तात्पर्य है कि कोई भी गांव, कोई भी परिवार और कोई भी नागरिक पीछे न छूटे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन की गुणवत्ता इस बात से निर्धारित होती है कि योजनाएं लोगों तक कितनी गहराई से पहुंचती हैं और उनका जमीनी स्तर पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में भारत धीमी गति के परिवर्तन से आगे बढ़कर अब प्रभावशाली बदलाव देख रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि देश का शासन मॉडल अब अगली पीढ़ी के सुधारों पर केंद्रित है तथा सरकार एवं आम नागरिकों के बीच की खाई को पाटने के लिए प्रौद्योगिकी एवं नई प्रक्रियाओं का लाभ उठाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ”भारत शासन, पारदर्शिता और नवोन्मेष में नए मानक स्थापित कर रहा है।”

उन्होंने कहा, ”भारत अब न केवल अपने विकास के लिए बल्कि शासन, पारदर्शिता और नवोन्मेष के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने के लिए भी जाना जाता है।”

मोदी ने भारत की जी-20 अध्यक्षता को इन प्रगतियों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया और कहा कि जी-20 के इतिहास में पहली बार 60 से अधिक शहरों में 200 से अधिक बैठक आयोजित की गईं।

उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के दृष्टिकोण ने इस आयोजन को जन आंदोलन में बदल दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ”विश्व ने भारत के नेतृत्व को स्वीकार किया है। भारत सिर्फ भाग नहीं ले रहा है, बल्कि नेतृत्व भी कर रहा है।”

मोदी ने सरकारी दक्षता के बारे में बढ़ती चर्चा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संबंध में भारत अन्य देशों से 10-11 वर्ष आगे है।

Rajnish Pandey
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