Highlights

वित्त मंत्री के साथ हुए समझौते का पालन कर बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर सुधार कार्यक्रम चलाये जाये 

निजीकरण का विफल प्रयोग उप्र पर न थोपा जाये

पावर कारपोरेशन प्रबन्धन के सामने पीपीटी प्रेजेन्टेशन के माध्यम से संघर्ष समिति ने सुधार के व्यापक प्रस्ताव रखे 

उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त करने हेतु 14 मई को अगली बैठक 

उत्तरप्रदेश/लखनऊ, 12 मई: पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल और शीर्ष प्रबन्धन के साथ आज हुई लम्बी वार्ता में संघर्ष समिति ने एक घण्टे से अधिक के पीपीटी प्रेजेन्टेशन द्वारा यह बताया कि निजीकरण का प्रयोग आगरा, ग्रेटर नोएडा और उड़ीसा में पूरी तरफ विफल हो चुका है। अतः निजीकरण के इस विफल प्रयोग को उप्र की गरीब जनता पर न थोपा जाये। संघर्ष समिति ने कहा कि 06 अक्टूबर 2020 को वित्त मंत्री मा. श्री सुरेश खन्ना एवं तत्कालीन ऊर्जा मंत्री मा. श्री श्रीकान्त शर्मा के साथ हुए समझौते का पालन करते हुए बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर विद्युत वितरण निगमों की मौजूदा व्यवस्था में ही सुधार कार्यक्रम चलाये जायें। इस हेतु संघर्ष समिति ने वित्त मंत्री के सामने रखे गये सुधार प्रस्ताव को प्रबन्धन को देते हुए कहा कि निजीकरण का निर्णय वापस लेकर इस प्रस्ताव पर प्रबन्धन को तत्काल आगे वार्ता शुरू करनी चाहिए। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि वार्ता का समुचित वातावरण बनाने हेतु आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तत्काल वापस ली जायें।

संघर्ष समिति ने कहा कि मा. वित्त मंत्री श्री सुरेश खन्ना जी ने वार्ता के दौरान संघर्ष समिति द्वारा दिये गये सुधार प्रस्ताव की सराहना करते हुए यह निर्देश दिया था कि संघर्ष समिति के साथ प्रस्ताव पर वार्ता कर सुधार हेतु उनका सहयोग लिया जाये। वार्ता में उपस्थित तत्कालीन मुख्य सचिव श्री आर के तिवारी ने भी संघर्ष समिति के प्रस्ताव की प्रशंसा की थी। अत्यन्त दुर्भाग्य का विषय है कि आज तक उसके बाद एक बार भी सुधार प्र्रस्ताव पर वार्ता नहीं की गयी और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा निर्णय थोप दिया गया जो बिजली कर्मियों को कदापि स्वीकार नहीं है। संघर्ष समिति ने कहा कि अब समय आ गया है कि प्रबन्धन सुधार प्र्रस्ताव पर बिजली कर्मियों का सहयोग लेकर सुधार करें और निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाये।

संघर्ष समिति ने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से प्रबन्धन को बताया कि 05 अप्रैल 2018 और 06 अक्टूबर 2020 को मा. मंत्रियों के साथ हुए समझौते में स्पष्ट लिखा है कि ‘‘बिजली कर्मियों को विश्वास में लिये बिना उप्र में ऊर्जा क्षेत्र में कहीं पर भी किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जायेगा’’। अतः मा. मंत्रियों के साथ हुए समझौते का पालन करते हुए निजीकरण का निर्णय तत्काल वापस लिया जाये। संघर्ष समिति ने 19 मार्च 2023 को मा. ऊर्जा मंत्री द्वारा की गयी घोषणा के अनुपालन में आन्दोलन के कारण की गयी समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने की मांग की।

पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस लेने पर 14 मई को पुनः एक विस्तृत बैठक करने को कहा। प्रबन्धन ने संघर्ष समिति द्वारा दिये गये पीपीटी प्रेजेन्टेशन की सराहना की और कहा कि इसका विस्तृत अध्ययन कर आगे वार्ता की जायेगी।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र द्वारा दिये गये पीपीटी प्रेजेन्टेशन में ऊर्जा निगमों में घाटे के लिए अनेक बिन्दु गिनाये गये। मुख्यतया बहुत मंहगे बिजली खरीद करार और सरकारी विभागों का राजस्व बकाया घाटे के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार ठहराया गया। प्रेजेन्टेशन के अनुसार विद्युत उत्पादन निगम से विद्युत वितरण निगमों को रू 4.17 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। सेण्ट्रल सेक्टर से औसतन रू 4.78 प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है। निजी घरानों से रू 5.45 प्रति यूनिट की दर से तथा शॉर्ट टर्म पॉवर परचेज के माध्यम से रू 7.31 प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदी जा रही है। अन्य माध्यमों से रू 14.204 प्रति यूनिट की दर तक बिजली खरीदी जा रही है।

संघर्ष समिति ने बताया कि उपरोक्त मंहगी बिजली क्रय करारों से विद्युत वितरण निगमों को उत्पादन निगम की तुलना में लगभग रू 9521 करोड़ का अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। प्रेजेन्टेशन के जरिये यह भी बताया गया कि ऐसे कई बिजली क्रय करार हैं जिनसे वर्ष 2024-25 में एक यूनिट भी बिजली नहीं खरीदी गयी किन्तु लगभग रू 6761 करोड़ का भुगतान करना पड़ा।

इस प्रकार मात्र मंहगे बिजली क्रय करारों के चलते विद्युत वितरण निगमों को कुल लगभग रू 16282 करोड़ रूपये का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है जो घाटे का एक सबसे बड़ा कारण है, जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की है।

प्रेजेन्टेशन में यह बताया गया कि वर्तमान में सरकारी विभागों पर लगभग रू 14 हजार करोड़ बिजली राजस्व का बकाया है। यह धनराशि सभी विद्युत वितरण कम्पनियों के पॉवर कारपोरेशन द्वारा दर्शाये गये वार्षिक घाटे से कहीं अधिक है। संघर्ष समिति ने कहा कि यदि बहुत मंहगे बिजली खरीद करार रद्द कर दिये जायें और सरकारी विभागों का बिजली राजस्व का बकाया मिल जाये तो विद्युत वितरण निगम मुनाफे में आ जायेंगे और घाटे के नाम पर किसी निजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी।

संघर्ष समिति ने राजस्व वसूली में कानून व्यवस्था को सबसे बड़ी बाधा बताया। संघर्ष समिति ने कहा कि राजस्व वसूली के दौरान मार-पीट होने पर पॉवर कारपोरेशन के शीर्ष प्रबन्धन और जिला प्रशासन से अधिकांशतया समय पर मदद नहीं मिलती। संघर्ष समिति ने बिजली के इन्फ्रास्ट्रचर से कई हजार करोड़ रूपये की नॉन टैरिफ आय के कई सुझाव दिये। उदाहरण के तौर पर सब स्टेशनों पर चार्जिंग स्टेशन की स्थापना, खम्भों पर टेण्डर के जरिये नॉन टैरिफ इनकम, अनुपयोगी जमीनों पर लीज के माध्यम से वाणिज्यिक गतिविधियां, बैटरी स्टोरेज की स्थापना तथा अनुपयोगी जमीनों और छतों पर सोलर पैनल की स्थापना आदि कई सुझाव दिये गये।

संघर्ष समिति ने उप्र में आगरा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे निजीकरण के प्रयोग को आकड़े देकर यह साबित कर दिया कि निजीकरण पॉवर कारपोरेशन के लिए घाटे का सौदा है। आगरा में निजीकरण से पॉवर कारपोरेशन को प्रति वर्ष लगभग एक हजार करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा है।

वार्ता में प्रबन्धन की ओर से पावॅर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल, प्रबन्ध निदेशक पंकज कुमार, निदेशक कमलेश बहादुर सिंह, निदेशक जी डी द्विवेदी और प्रबन्धन के अन्य लोग थे।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र की ओर से शैलेन्द्र दुबे, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद, ओ पी सिंह, डी के मिश्रा, श्रीचन्द, सरजू त्रिवेदी, मो इलियास, देवेन्द्र पाण्डेय, प्रेम नाथ राय, आशीष भारती, राम सहारे वर्मा, पी एस बाजपेई, दीपक चक्रवर्ती, आर सी पाल, सनाउल्लाह, कपिल मुनि, आशीष त्रिपाठी, अमिताभ सिन्हा, आलोक कुमार श्रीवास्तव मुख्यतया उपस्थित थे।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *