नई दिल्ली/पटना। लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने इस बहुचर्चित मामले में बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव समेत कुल 46 आरोपियों पर आरोप तय कर दिए हैं। वहीं, सबूतों के अभाव में 52 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। अदालत के इस फैसले से मामला एक बार फिर सियासी और कानूनी सुर्खियों में आ गया है।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला?
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन ली गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि ये जमीनें बेहद कम कीमत पर या नाममात्र के सौदों में लालू परिवार से जुड़े लोगों के नाम कराई गईं।
जांच के दौरान कई रजिस्ट्री दस्तावेज, बैंक लेन-देन और बयान अदालत के समक्ष पेश किए गए, जिनके आधार पर आरोप तय किए गए हैं।
अदालत का फैसला
अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं।
* 46 आरोपियों पर आरोप तय: इनमें तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव सहित परिवार से जुड़े अन्य लोग और कथित लाभार्थी शामिल हैं।
* 52 आरोपियों को बरी: अदालत ने माना कि इनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें मुकदमे से मुक्त किया जाता है।
राजनीतिक हलचल तेज
फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्ष ने इसे “भ्रष्टाचार के खिलाफ न्याय की जीत” बताया, जबकि राजद नेताओं ने कहा कि वे अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे और सच सामने आएगा।
तेजस्वी यादव के करीबी सूत्रों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और अंतिम फैसले में उन्हें न्याय मिलेगा।
आगे की प्रक्रिया
अब आरोप तय होने के बाद मामले में नियमित सुनवाई शुरू होगी। अभियोजन पक्ष गवाहों और दस्तावेजों के जरिए अपने आरोप साबित करने की कोशिश करेगा, जबकि बचाव पक्ष आरोपों को निराधार बताकर चुनौती देगा।
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मुकदमा लंबा चल सकता है और इसके राजनीतिक असर बिहार की आने वाली सियासी रणनीतियों पर भी दिख सकते हैं।
नज़र आगे की सुनवाई पर
लैंड फॉर जॉब केस अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। अदालत में पेश होने वाली गवाही और सबूत यह तय करेंगे कि यह मामला लालू परिवार के लिए कितना भारी पड़ता है या फिर उन्हें राहत मिलती है। फिलहाल, आरोप तय होने से उनकी कानूनी चुनौतियां और बढ़ गई हैं।