नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में शिरकत करते हुए देश को मानसिक उपनिवेशवाद से मुक्त करने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, विचारक और राजनेता C. Rajagopalachari (राजाजी) के जीवन और आदर्शों को याद करते हुए कहा कि उनके विचार आज भी देश को आत्मगौरव और सांस्कृतिक स्वाभिमान की दिशा में प्रेरित करते हैं।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि जब राजाजी ‘गवर्नमेंट हाउस’ (जो अब Rashtrapati Bhavan के नाम से जाना जाता है) पहुंचे थे, तब उन्होंने अपने कक्ष में Ramakrishna Paramahamsa और Mahatma Gandhi के चित्र स्थापित किए थे। यह केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं था, बल्कि यह स्पष्ट संदेश था कि भले ही उस समय भारत औपचारिक रूप से डोमिनियन था, किंतु भारतीयों के हृदय में ‘स्वराज’ पूर्ण रूप से स्थापित हो चुका था।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि राजाजी ने अपने आचरण से यह दिखाया कि सच्ची स्वतंत्रता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानसिक और सांस्कृतिक भी होती है। उन्होंने ‘मानसिक उपनिवेशवाद’ से मुक्ति का जो आदर्श प्रस्तुत किया, वही आज देशव्यापी अभियान के रूप में दिखाई देता है—जहां भारतवासी अपनी विरासत पर गर्व करते हुए औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेषों को समाप्त करने का संकल्प ले रहे हैं।
प्रदर्शनी में जीवंत होगी राजाजी की विरासत
‘राजाजी उत्सव’ के अंतर्गत 24 फरवरी से 1 मार्च 2026 तक राष्ट्रपति भवन में राजाजी के जीवन और कार्यों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में उनके सार्वजनिक जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान, प्रशासनिक दृष्टिकोण तथा वैचारिक लेखन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज, चित्र और संस्मरण प्रदर्शित किए जाएंगे।
यह आयोजन केवल एक स्मरण समारोह नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण की मूल भावनाओं से जोड़ने का प्रयास भी है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि राजाजी के आदर्श—सादगी, नैतिकता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक चेतना—आने वाले समय में भी राष्ट्र को मार्गदर्शन देते रहेंगे।
‘राजाजी उत्सव’ के माध्यम से एक बार फिर यह संदेश दिया गया है कि स्वतंत्रता की असली ताकत हमारे विचारों, मूल्यों और आत्मगौरव में निहित है।