नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की कानून-व्यवस्था एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गई है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। केजरीवाल के अनुसार, जनवरी महीने के शुरुआती मात्र 15 दिनों में दिल्ली से 807 लोग लापता हो गए, जिनमें सबसे बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की बताई जा रही है।

अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि दिल्ली की कानून-व्यवस्था “पूरी तरह चरमरा चुकी है” और मौजूदा हालात में आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र की भाजपा सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

“दिल्ली की कानून व्यवस्था ICU में है” — AAP का आरोप

आम आदमी पार्टी ने एक बयान में कहा कि दिल्ली की कानून व्यवस्था इस समय आईसीयू में पहुंच चुकी है। पार्टी का आरोप है कि राजधानी में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार और पुलिस व्यवस्था हालात को संभालने में नाकाम साबित हो रही है।

केजरीवाल ने कहा, “जब राजधानी में 15 दिनों में सैकड़ों लोग गायब हो रहे हों और उनमें महिलाएं व बच्चे शामिल हों, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह साफ दिखाता है कि दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।”

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर गहराता संकट

AAP नेताओं का कहना है कि लापता लोगों में महिलाओं और बच्चों की संख्या अधिक होना, दिल्ली की सामाजिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। पार्टी ने सवाल उठाया कि आखिर राजधानी में महिलाएं और बच्चे सुरक्षित क्यों नहीं हैं और लापता मामलों में त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

भाजपा पर राजनीतिक हमला तेज

इस मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर सीधा राजनीतिक हमला बोला है। AAP का कहना है कि दिल्ली पुलिस केंद्र सरकार के अधीन है, इसलिए कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी भाजपा की बनती है। पार्टी ने मांग की है कि सरकार इन मामलों पर जवाबदेही तय करे और लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाए।

इस बयान के बाद राजधानी की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गूंज सकता है। अब देखना होगा कि भाजपा और दिल्ली पुलिस इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और लापता लोगों के मामलों में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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