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नई दिल्ली, 15 फरवरी 2026 (रविवार)। संवत 2082 एवं अंग्रेजी वर्ष 2026 में फाल्गुनी महाशिवरात्रि एवं देवाधिदेव महादेव के प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर वैदिक आध्यात्मिक संस्कृति उत्थान (वसु) संस्था द्वारा “पाँचवाँ एक दिवसीय अभिषेकात्मक पार्थिवार्चन रुद्र महायज्ञ” का भव्य आयोजन किया गया। यह धार्मिक अनुष्ठान मोहन गार्डन स्थित सतसाहेब गार्डन एवं पार्टी लॉन में संपन्न हुआ, जहाँ सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन प्रारंभ
प्रातः 09 बजे वैदिक विधि-विधान के साथ पूजन कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पार्थिव शिवलिंग की स्थापना कर श्रद्धालुओं ने अपने परिवार सहित यजमान बनकर रुद्राभिषेक किया। पूरे परिसर में ‘हर हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से आध्यात्मिक वातावरण भक्तिमय हो उठा।
महायज्ञ में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस वर्ष विशेष रूप से यूट्यूब चैनल के माध्यम से ऑनलाइन पूजन की व्यवस्था की गई, जिससे दूर क्षेत्रों में रहने वाले सनातनी परिवार भी घर बैठे इस पुण्य अनुष्ठान से जुड़ सके।
दोपहर 03 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। भजन-कीर्तन एवं धार्मिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने शिव भक्ति पर आधारित प्रस्तुतियाँ देकर माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पंडित बृजकेश मिश्र, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारत हिन्द महासभा उपस्थित रहे।विशेष अतिथि के रूप में डॉ. पवन आर्य, राष्ट्रीय प्रभारी, ने सहभागिता की।
यज्ञ के यजमान के रूप में वैदिक ऋषिकेश तिवारी (संपूर्णानंद, वाराणसी) ने वैदिक अनुष्ठानों का संचालन कराया। वहीं संस्था के संस्थापक आचार्य धनंजय तिवारी ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वसु संस्था सनातन धर्म की रक्षा, उसके प्रसार एवं नई पीढ़ी को सनातन परंपराओं से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
सनातन संस्कृति के उत्थान का संकल्प
वसु संस्था द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला यह रुद्र महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रहा है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का भी सशक्त माध्यम साबित हो रहा है। संस्था का उद्देश्य सनातन धर्म के मूल्यों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया तथा विश्व कल्याण एवं राष्ट्र की समृद्धि की कामना के साथ महायज्ञ का समापन हुआ।