नई दिल्ली, 03 मार्च: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल ने महिलाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाने, उनकी गरिमा सुनिश्चित करने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर सोमवार को बल दिया।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के ‘महिलाओं से संबंधित साइबर कानून’ और ‘साइबर जागरूकता कार्यक्रम’ से जुड़े अंतिम विधि समीक्षा परामर्श में अपने संबोधन के दौरान साइबर अपराधों के बढ़ते खतरे पर बोलते हुए मेघवाल ने नागरिकों, विशेषकर महिलाओं से मजबूत पासवर्ड अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि सोशल मीडिया पर सीमित मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी साझा करें।

मेघवाल ने कहा, ‘‘मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें और ऑनलाइन माध्यम से न्यूनतम व्यक्तिगत विवरण साझा करें। साइबर अपराध ऐसे हैं कि हम अक्सर अनजाने में फंस जाते हैं। अजनबियों के साथ लंबी बातचीत से बचें और ऑनलाइन अज्ञात लोगों के साथ बातचीत करते समय सतर्क रहें। यदि कोई साइबर अपराध होता है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।’’

कानून मंत्री ने डिजिटल जगत में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से प्रेरित गलत सूचना अभियान, साइबर बदमाशी, फर्जी प्रोफाइलिंग और वीडियो से छेड़छाड़ शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने जो नये कानून बनाए हैं, वे इन मुद्दों का व्यापक रूप से समाधान करते हैं। हमने एआई-आधारित गलत सूचना, ‘डिजिटल अरेस्ट’ और अन्य साइबर अपराधों से निपटने के लिए प्रावधान शामिल किए हैं।’’

मंत्री ने महिलाओं के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाने, उनकी गरिमा सुनिश्चित करने और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘साइबर सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और महिलाओं के साथ इसके संबंध को समझना आवश्यक है। महिलाओं को बिना किसी डर के देश की प्रगति में योगदान देना जारी रखना चाहिए। साइबर अपराधों को उनकी तरक्की के मार्ग में अवरोधक नहीं बनने देना चाहिए।’’

मेघवाल ने ‘साइबर सहेली’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया, जिसका उद्देश्य परिवारों को साइबर सुरक्षा के बारे में शिक्षित करना है। उन्होंने कहा, ‘‘साइबर खतरों से डरने की कोई जरूरत नहीं है। ‘साइबर सहेली’ सभी के लिए एक मार्गदर्शक और सहायता प्रणाली के रूप में काम करेगी।’’

मंत्री ने हाल ही में विधायिका में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण सहित अन्य विधायी उपायों की प्रशंसा की और इसे लैंगिक समानता के लिए एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने कहा था, किसी समाज की प्रगति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसकी महिलाओं ने कितनी प्रगति की है। जब महिलाएं अपने लिए उचित स्थान और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेंगी, तो कोई भी तकनीकी चुनौती ऐसी नहीं होगी, जिससे निपटने में वे सक्षम नहीं होंगी। महिलाएं देश और समाज को आगे ले जाएंगी।’’

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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