- बिहार: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में किए जा रहे कथित बदलावों के खिलाफ कांग्रेस ने बिहार में व्यापक आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी ने इसे ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए 10 जनवरी से 25 फरवरी तक 47 दिनों के ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की घोषणा की है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार मनरेगा की मूल भावना को कमजोर कर रही है। बजट में कटौती, काम के दिनों में कमी, भुगतान में देरी और नियमों को जटिल बनाकर गरीबों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि इससे गांवों में बेरोजगारी और पलायन की समस्या और गंभीर होगी।
आंदोलन की रूपरेखा
कांग्रेस द्वारा घोषित कार्यक्रम के तहत आंदोलन को चरणबद्ध और व्यापक बनाया जाएगा। इसमें राज्य से लेकर पंचायत स्तर तक गतिविधियां होंगी।
* जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों को उजागर किया जाएगा।
* उपवास और धरना-प्रदर्शन के जरिए विरोध दर्ज कराया जाएगा।
* पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान, चौपालें और नुक्कड़ सभाएं आयोजित होंगी।
* ग्रामीण इलाकों में कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर संपर्क कर मनरेगा के महत्व और सरकार की नीतियों से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जाएगी।
* आंदोलन के अंतिम चरण में विधानसभा घेराव और अखिल भारतीय रैलियों का आयोजन किया जाएगा।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए जीवनरेखा है। यह न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार निजीकरण और खर्च में कटौती की नीति के चलते इस योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में बढ़ रही है।
राजनीतिक संदेश
इस आंदोलन के जरिए कांग्रेस बिहार में ग्रामीण मुद्दों को केंद्र में लाकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि मनरेगा जैसे मुद्दे पर जनआंदोलन खड़ा कर वह ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है।
कुल मिलाकर, ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के जरिए कांग्रेस ने केंद्र सरकार को सीधे चुनौती दी है। आने वाले 47 दिन बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ाने वाले माने जा रहे हैं।