नई दिल्ली, 02 मार्च: भारत में यात्री वाहनों (पीवी) की बिक्री में 2025-26 में 4-7 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में कोरोना महामारी के बाद रिकवरी देखी जा रही है। आईसीआरए की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहिया वाहनों की बिक्री में भी तेजी देखने को मिलेगी, ग्रामीण इलाकों में बढ़ती मांग के चलते 2025 में 11-14 फीसदी और 2026 में 6-9 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है।

रिपोर्ट में वाणिज्यिक वाहनों (सीवी) की बिक्री में भी 2026 में बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है। आईसीआरए की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2024 में पैसेंजर वाहनों की बिक्री 4.2 मिलियन यूनिट के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। 2025 में थोक बिक्री स्थिर रही, जिसका कारण ऑटोमोबाइल निर्माताओं का स्थिर उत्पादन था। इसके बावजूद, उद्योग की बिक्री में लगभग 2 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस साल पैसेंजर वाहनों की बिक्री बेहतर होने की संभावनाओं के पीछे बेहतर आर्थिक गतिविधियों, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च, माल की अच्छी उपलब्धता, स्क्रैपेज पॉलिसी और पर्यावरण के अनुकूल वाहनों की ओर बढ़ता रुझान जैसे कारण बताए गए हैं।

आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार, मांग को प्रभावित करने वाले ज्यादातर फैक्टर, जैसे लोगों की डिस्पोजेबल इनकम, नए मॉडल की लॉन्चिंग और वाहनों के रखरखाव का खर्च, सब अनुकूल बने हुए हैं। हालांकि सेल्स बेस पहले से ही ऊंचा है, फिर भी आईसीआरए का मानना है कि 2026 में पैसेंजर वीइकल इंडस्ट्री 4-7 फीसदी की दर से बढ़ेगा। वाणिज्यिक वाहनों के सेक्टर में भी 2026 में ग्रोथ की उम्मीद है। तेज होती आर्थिक गतिविधियां, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च, माल की अच्छी उपलब्धता और स्क्रैपेज पॉलिसी जैसे फैक्टर इस ग्रोथ को सपोर्ट करेंगे। पुराने सरकारी वाहनों को हटाकर नए वाहन खरीदने से बसों की बिक्री में तेजी आएगी।

Rajnish Pandey
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