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रिपोर्ट (डेस्क): पाकिस्तान की धरती से भारत की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालिया सामने आए एक वीडियो और खुफिया संकेतों ने आशंका बढ़ा दी है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों के बीच नए सिरे से तालमेल बन रहा है। बताया जा रहा है कि हमास और लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडरों के बीच एक गुप्त मुलाकात हुई है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां बेहद संवेदनशील मान रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, वायरल हो रहे एक वीडियो में हमास का एक कमांडर और लश्कर-ए-तैयबा का कुख्यात कमांडर राशिद अली संधू पाकिस्तान के गुजरांवाला में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान साथ दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और सतर्कता दोनों बढ़ गई हैं।

क्या है पूरा मामला?

वीडियो फुटेज में दोनों कमांडरों की मौजूदगी को केवल औपचारिक मुलाकात मानने से इनकार किया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि यह मुलाकात आतंकी नेटवर्क के विस्तार, संसाधनों की साझेदारी और संभावित ऑपरेशनल सहयोग से जुड़ी हो सकती है। खास तौर पर भारत के खिलाफ किसी बड़ी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा।

पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल

भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मुद्दा उठाता रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को संरक्षण देता है। गुजरांवाला जैसे शहर में खुले तौर पर ऐसे तत्वों का एक मंच पर दिखना, पाकिस्तान की आतंकी ढांचे पर कार्रवाई को लेकर उसकी नीयत पर सवाल खड़े करता है।

भारत की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

सूत्रों का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद भारत की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। सीमा क्षेत्रों के साथ-साथ संवेदनशील शहरों में निगरानी बढ़ाई गई है। एजेंसियां वीडियो की प्रामाणिकता, समय-सीमा और मीटिंग के वास्तविक उद्देश्य की गहन जांच कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय चिंता भी बढ़ी

हमास और लश्कर-ए-तैयबा—दोनों ही संगठन कई देशों द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सूची में शामिल हैं। ऐसे में इनके बीच कथित संपर्क की खबरें न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी गंभीर चिंता का विषय मानी जा रही हैं।

हालांकि अभी तक किसी ठोस आतंकी हमले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सामने आए संकेतों ने खतरे की घंटी जरूर बजा दी है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और आधिकारिक प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि यह मुलाकात महज एक कार्यक्रम तक सीमित थी या इसके पीछे भारत विरोधी किसी बड़ी साजिश की नींव रखी जा चुकी है।

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