पटना। बिहार में नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा Z श्रेणी से घटाकर Y+ कर दी गई है। इसके साथ ही राज्य में विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव हुआ है—कुछ को Z श्रेणी प्रदान की गई है, जबकि कुछ नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। यह निर्णय राज्य की सुरक्षा समीक्षा समिति की ताज़ा रिपोर्ट और मौजूदा खतरे के आकलन के आधार पर लिया गया बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, नेताओं की सुरक्षा समय-समय पर खतरे के आकलन (Threat Perception) के अनुसार तय की जाती है। हालिया समीक्षा में:
- राजनीतिक गतिविधियों की प्रकृति
- सार्वजनिक कार्यक्रमों की संख्या
- खुफिया इनपुट
- बीते समय की घटनाओं जैसे मानकों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा श्रेणियों का पुनर्निर्धारण किया गया।
तेजस्वी यादव की सुरक्षा में बदलाव
तेजस्वी यादव की सुरक्षा को Z से Y+ किए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इसे रूटीन समीक्षा का हिस्सा बताया जा रहा है। Y+ श्रेणी में भी पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान होते हैं, जिनमें प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी और आवश्यक एस्कॉर्ट शामिल रहते हैं।
इस फेरबदल में:
- बीजेपी और जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेताओं को Z श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।
- वहीं, कुछ ऐसे नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह हटाई गई है, जिनके लिए खतरे का स्तर न्यूनतम पाया गया।
सरकार का कहना है कि सुरक्षा संसाधनों का तर्कसंगत और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
सुरक्षा में कटौती और बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी*भी शुरू हो गई है। विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहा है, जबकि सरकार इसे निष्पक्ष और पेशेवर प्रक्रिया का परिणाम बता रही है।
राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि:
- सुरक्षा श्रेणी स्थायी नहीं होती।
- किसी भी समय नए इनपुट मिलने पर फिर से समीक्षा की जा सकती है।
- नेताओं की व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ जनहित और संसाधनों का संतुलन जरूरी है।