नई दिल्ली, 16 अगस्त : राजधानी दिल्ली इस वक्त बाढ़ के बड़े खतरे का सामना कर रही है। यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और खतरे के निशान को पार करने की कगार पर पहुँच चुका है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश के बाद हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है और प्रशासन ने लोगों को अलर्ट कर दिया है।

तेजी से बढ़ा जलस्तर

शनिवार को यमुना का जलस्तर 205.22 मीटर तक पहुंच गया, जबकि खतरे का निशान 205.33 मीटर है। यानी अब यह सिर्फ कुछ सेंटीमीटर नीचे रह गया है। यदि जलस्तर में और इज़ाफ़ा होता है तो पानी निचले इलाकों में प्रवेश कर जाएगा।

प्रशासन सतर्क, लोगों को चेतावनी

दिल्ली प्रशासन ने तुरंत अलर्ट जारी करते हुए यमुना किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। निगम बोध घाट के पास बने घरों के ठीक नीचे तक पानी पहुँच चुका है। अगर जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो अगले कुछ घंटों में घरों तक पानी घुसने की संभावना है।

डीएम ऑफिस और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए हैं। एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें राहत और बचाव कार्य के लिए अलर्ट पर हैं।

क्यों बढ़ रहा है खतरा?

दरअसल, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से यमुना का प्रवाह तेज़ हो गया है। हथिनीकुंड बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने से दिल्ली तक इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि राजधानी में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

निचले इलाकों पर संकट

सबसे ज्यादा संकट शास्त्री पार्क, निगम बोध घाट, मजनू का टीला, ओखला और आईटीओ के आसपास के निचले इलाकों पर मंडरा रहा है। यहाँ रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है।

अधिकारियों की अपील

दिल्ली जल बोर्ड और आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी की गई एडवाइजरी का पालन करें।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी हालात पर नज़र रखने के लिए अधिकारियों के साथ बैठक की है और कहा कि “यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सरकार पूरी तरह अलर्ट है। लोगों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है।”

खतरे का मापक कैसे तय होता है?

गौरतलब है कि दिल्ली में यमुना का खतरनाक जलस्तर 204.50 मीटर माना जाता है। वहीं खतरे का निशान 205.33 मीटर है। शास्त्री पार्क के पास बना पुराना लोहे का पुल इस माप का आधार होता है। जैसे ही पानी इस पुल की ऊंचाई को छू लेता है, बाढ़ की आशंका को गंभीर माना जाता है।

आगे क्या?

मौसम विभाग का अनुमान है कि उत्तराखंड और हिमाचल में बारिश अभी और होगी, जिससे हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में यमुना का जलस्तर और बढ़ेगा और दिल्ली में बाढ़ की स्थिति बन सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *