छपरा। खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) का अधिकारी बताकर लंबे समय तक सामाजिक और सार्वजनिक मंचों पर सक्रिय रहने वाले रितेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति पर फर्जी पहचान के सहारे लोगों को गुमराह करने का आरोप है, उसे “राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड” जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाज़ा गया। इस खुलासे के बाद अब मामला केवल एक व्यक्ति की कथित धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सम्मान देने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता पर भी बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

मुख्य अतिथि से ‘प्रेरणा दूत’ तक का सफर

सूत्रों के अनुसार रितेश कुमार छपरा स्थित फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया संस्था से जुड़े कई कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होता रहा। मंच से उसे आईएएस अधिकारी के रूप में परिचय कराया गया और युवाओं के लिए “प्रेरणास्रोत” बताया गया। यही नहीं, संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उसकी मौजूदगी को विशेष उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया।

किस आधार पर मिला राष्ट्रीय सम्मान?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि—

  • “राष्ट्रीय प्रेरणा दूत अवार्ड” देने के लिए कौन-से मापदंड तय किए गए थे?
  • रितेश कुमार ने ऐसा कौन-सा उल्लेखनीय सामाजिक या राष्ट्रीय योगदान दिया, जिसके चलते उसे यह सम्मान दिया गया?
  • क्या अवार्ड से पहले उसके दस्तावेज़, प्रशासनिक सेवा से जुड़े दावे और पहचान की किसी स्तर पर जांच की गई?

यदि बिना सत्यापन के किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर का सम्मान दे दिया गया, तो यह न केवल लापरवाही है, बल्कि समाज के साथ विश्वासघात भी माना जाएगा।

संस्थाओं की भूमिका भी कटघरे में

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में दोष केवल फर्जी पहचान रखने वाले व्यक्ति का नहीं होता। सम्मान देने वाली संस्थाओं की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। जब जांच-पड़ताल के बजाय प्रभाव, पहचान या प्रचार के आधार पर अवार्ड दिए जाते हैं, तो सम्मान की गरिमा और उद्देश्य दोनों पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।

फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया से जवाब की अपेक्षा

मामले के सामने आने के बाद अब फेस ऑफ फ्यूचर इंडिया संस्था से पारदर्शिता की उम्मीद की जा रही है। संस्था को यह स्पष्ट करना चाहिए कि—

  • अवार्ड चयन की पूरी प्रक्रिया क्या थी
  • किन प्रमाणों और मानकों के आधार पर रितेश कुमार को चुना गया
  • भविष्य में इस तरह की चूक न हो, इसके लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे

मुद्दा सिर्फ फर्जी आईएएस का नहीं

यह प्रकरण सिर्फ एक व्यक्ति के फर्जी होने का मामला नहीं है। यह सवाल है सम्मान की विश्वसनीयता, सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी और जनता को गुमराह किए जाने की उस व्यवस्था का, जिस पर अब गंभीर मंथन ज़रूरी हो गया है।

जब तक इन सवालों के ठोस और पारदर्शी जवाब नहीं मिलते, तब तक यह मामला केवल एक खबर नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी बना रहेगा।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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