युद्ध की स्थिति को देखते हुए 14 मई तक कोई आन्दोलन नहीं

प्रबन्धन निजीकरण का निर्णय निरस्त कर कार्य का वातावरण बनाए

उत्तरप्रदेश/ लखनऊ, 9 मई: विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने सीमाओं पर युद्ध की स्थिति को देखते हुए 14 मई तक कोई आन्दोलन न करने का निर्णय लिया है। संघर्ष समिति ने प्रबन्धन से भी कहा है कि युद्ध की स्थिति को देखते हुए वह भी निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कार्यवाही करे जिससे कार्य का स्वस्थ वातावरण बन सके। सात दिवसीय क्रमिक अनशन का कार्यक्रम आज प्रातः 10ः00 बजे संपन्न हो गया।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि सीमाओं पर युद्ध की परिस्थितियों को देखते हुए संघर्ष समिति ने क्रमिक अनशन कार्यक्रम संपन्न होने के बाद फिलहाल 14 मई तक कोई आंदोलन न करने का निर्णय लिया है। संघर्ष समिति ने युद्ध के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के प्रति पूरा समर्थन व्यक्त करते हुए आशा व्यक्ति की है कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन भी निजीकरण की कार्यवाही निरस्त करेगा और युद्ध के दौरान कार्य का स्वस्थ वातावरण निर्मित करेगा।

संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाए तो बिजली कर्मचारी और अभियंता पहले की तरह पूरी तरह से सहयोग कर युद्ध के दौरान भीषण गर्मियों में बिजली की व्यवस्था पूरी तरह सामान्य बनाए रखने की चुनौती को स्वीकार करते हैं।

02 मई से चल रहे सात दिवसीय क्रमिक अनशन का कार्यक्रम आज प्रातः 10ः00 बजे संपन्न हो गया। क्रमिक अनशन के दौरान लगभग 1000 से अधिक बिजली कर्मचारी और अभियंता क्रमिक अनशन पर बैठे। इस दौरान अनशनकारियों के समर्थन में लगभग 2000 से अधिक बिजली कर्मी सम्मिलित हुए। सबसे प्रमुख बात यह रही कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के बिजली कर्मी और अभियंता अनशन में शामिल हुए।

क्रमिक अनशन के बावजूद राष्ट्रीय भावना से ओत प्रोत बिजली कर्मियों ने 07 मई को तिरंगा रैली निकाली और आज समापन के समय राष्ट्रीय ध्वज लेकर राष्ट्रगान के साथ क्रमिक अनशन समाप्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *