जींद।भारतीय रेलवे के हरित परिवहन अभियान को बड़ी सफलता मिली है। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद पहुंच चुकी है और इसके जींद–सोनीपत रूट पर इसी महीने से संचालन की तैयारी है। यह अत्याधुनिक ट्रेन चेन्नई में निर्मित की गई है, जो 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। खास बात यह है कि यह ट्रेन बिना शोर और बिना प्रदूषण के चलेगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।
पर्यावरण के अनुकूल तकनीक
हाइड्रोजन ट्रेन में पारंपरिक डीज़ल या बिजली के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है। इस तकनीक में ऊर्जा उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है और केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) निकलती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह ट्रेन पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम करेगी और भविष्य में ग्रीन ट्रांसपोर्ट का मजबूत विकल्प बनेगी।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
यह ट्रेन एक साथ 2638 यात्रियों को सफर कराने की क्षमता रखती है। इसमें आधुनिक कोच, बेहतर वेंटिलेशन, आरामदायक सीटें और उन्नत सुरक्षा मानक शामिल किए गए हैं। कम शोर के कारण यात्रियों को शांत और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
जींद–सोनीपत रूट पर होगा ट्रायल और संचालन
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, जींद–सोनीपत सेक्शन को हाइड्रोजन ट्रेन के लिए चुना गया है, जहां पहले चरण में ट्रायल रन किए जाएंगे। ट्रायल सफल रहने पर नियमित संचालन शुरू किया जाएगा। यह रूट उत्तर भारत में हरित रेलवे परियोजना का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
चेन्नई में निर्मित इस ट्रेन को मेक इन इंडिया पहल के तहत विकसित किया गया है। इससे देश में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में ऐसी ट्रेनों के निर्माण की राह आसान होगी। रेलवे का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अन्य चुनिंदा रूटों पर भी हाइड्रोजन ट्रेनों का विस्तार करना है।
भविष्य की रेल यात्रा की झलक
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें भारतीय रेलवे के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती हैं। बढ़ती ईंधन लागत और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच यह तकनीक टिकाऊ और किफायती समाधान के रूप में उभर रही है।