नई दिल्ली, 12 दिसंबर: दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में अनियमित फीस वसूली और मनमानी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस तय करने और रेगुलेशन में ट्रांसपेरेंसी) एक्ट, 2025 को नोटिफाई कर दिया है। नया कानून लागू होते ही अब राजधानी के निजी स्कूलों को फीस संरचना में पारदर्शिता रखनी होगी और बिना अनुमति मनचाही फीस बढ़ाना संभव नहीं होगा।
कौन-कौन से नियम बदले?
तय हेड्स के तहत ही फीस वसूली:
प्राइवेट स्कूल अब केवल सरकार द्वारा तय किए गए हेड्स में ही फीस ले सकेंगे।
कैपिटेशन फीस पर पूरी तरह रोक:
एडमिशन के नाम पर अतिरिक्त राशि लेने पर सख्त प्रतिबंध रहेगा।
फीस बढ़ाने से पहले मंजूरी अनिवार्य:
स्कूलों को हर प्रकार की फीस वृद्धि के लिए शिक्षा विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होगी।
फाइनेंशियल ऑडिट का प्रावधान:
स्कूलों को सालाना वित्तीय रिपोर्ट सरकार के सामने प्रस्तुत करनी होगी, ताकि फीस वसूली और खर्च में पारदर्शिता बनी रहे।
पेरेंट्स के लिए राहत:
किसी भी विवाद की स्थिति में अभिभावक सीधे ग्रिवेंस रिड्रेसल कमेटी से शिकायत कर सकेंगे।
सरकार का कहना
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य अभिभावकों को राहत देना और स्कूलों में जवाबदेही तय करना है, ताकि शिक्षा व्यापार न बने।
नए कानून के लागू होने से उम्मीद जताई जा रही है कि दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस प्रणाली अधिक पारदर्शी और नियंत्रित होगी।