पटना। मकर संक्रांति के अवसर पर बिहार की राजनीति में उस समय नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया, जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के आवास पर आयोजित पारंपरिक दही-चूड़ा भोज में शामिल हुए। इस मुलाकात को केवल सामाजिक शिष्टाचार तक सीमित मानने के बजाय राजनीतिक गलियारों में इसे संभावित सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा के यहां आयोजित इस भोज में एनडीए के कई दिग्गज नेता मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री संतोष सुमन और भाजपा के वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव ने तेज प्रताप यादव का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने सार्वजनिक मंच से तेज प्रताप यादव को एनडीए में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे दिया, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई।
भोज के दौरान माहौल पूरी तरह सौहार्दपूर्ण नजर आया। नेताओं के बीच अनौपचारिक बातचीत हुई और पारंपरिक व्यंजनों के साथ राजनीतिक संकेत भी दिए गए। संतोष सुमन ने कहा कि “राजनीति में दरवाजे कभी बंद नहीं होते, जो विकास और बिहार के हित में सोचता है, उसका स्वागत है।” वहीं रामकृपाल यादव ने भी तेज प्रताप की मौजूदगी को “सकारात्मक संकेत” करार दिया।
तेज प्रताप यादव ने हालांकि एनडीए में शामिल होने को लेकर कोई सीधा बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि मकर संक्रांति जैसे पर्व पर सामाजिक सौहार्द और आपसी संवाद राजनीति से ऊपर होते हैं। उनके इस बयान को राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल संयोग नहीं हो सकती। हाल के दिनों में राजद के भीतर चल रही अंदरूनी चर्चाओं और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों के बीच तेज प्रताप यादव की यह मौजूदगी कई अटकलों को जन्म दे रही है। हालांकि, फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुल मिलाकर, दही-चूड़ा की इस थाली ने बिहार की राजनीति में नए संकेत जरूर दे दिए हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि यह मुलाकात केवल त्योहार की सौहार्दपूर्ण परंपरा थी या किसी बड़े सियासी बदलाव की भूमिका।