ढाका, 12 फरवरी 2026। महीनों तक चली हिंसा, सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बाद बांग्लादेश में आखिरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया ने फिर रफ्तार पकड़ी है। साल 2024 में हुए तख्तापलट और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत आने के बाद पैदा हुए सत्ता संकट के बीच गुरुवार को देशभर में आम चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया।
सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी गईं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान कराने का दावा किया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
सत्ता परिवर्तन की पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में 2024 का वर्ष राजनीतिक उथल-पुथल का साल रहा। व्यापक विरोध प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा और वे भारत आ गईं। इसके बाद देश में अंतरिम व्यवस्था लागू की गई, जिसने चुनाव कराने का रास्ता साफ किया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक साख की परीक्षा भी है। जनता पिछले दो वर्षों की अस्थिरता, आर्थिक दबाव और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से उबरने के लिए एक स्थिर सरकार की तलाश में है।
किसके बीच है मुख्य मुकाबला?
इस बार चुनावी मैदान में सबसे प्रमुख टक्कर जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के बीच मानी जा रही है।
- जमात-ए-इस्लामी ने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है और वह खुद को बदलाव की ताकत के रूप में पेश कर रही है।
- वहीं बीएनपी आर्थिक सुधार, संस्थागत स्थिरता और लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली को अपना मुख्य एजेंडा बता रही है।
हालांकि अन्य छोटे दल और स्वतंत्र उम्मीदवार भी मैदान में हैं, लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि असली मुकाबला इन्हीं दो दलों के बीच सिमट सकता है।
सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नजर
पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रखी गई है। राजधानी ढाका सहित कई संवेदनशील जिलों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर भारत और दक्षिण एशियाई देशों की नजर भी इस चुनाव पर टिकी हुई है। बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता का असर क्षेत्रीय कूटनीति और व्यापार पर भी पड़ सकता है।
मतदाताओं के बीच महंगाई, बेरोजगारी और सुरक्षा प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या पहली बार मतदान कर रही है, जो बदलाव और पारदर्शिता की मांग कर रही है।
एक स्थानीय मतदाता ने कहा, “हम हिंसा नहीं, विकास चाहते हैं। इस बार हम सोच-समझकर वोट दे रहे हैं।”
मतदान शाम तक जारी रहेगा और शुरुआती रुझान देर रात तक आने की संभावना है। परिणाम चाहे जो भी हो, यह चुनाव बांग्लादेश के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
दो वर्षों की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अब जनता की उंगली पर लगी स्याही यह तय करेगी कि देश किस दिशा में आगे बढ़ेगा—स्थिरता की ओर या फिर एक नए राजनीतिक संघर्ष की ओर।