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काराकस/वॉशिंगटन। वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के एक बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर अमेरिकी हमले की भी पुष्टि करने का दावा किया।

ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद वेनेजुएला सरकार ने कड़ा ऐतराज जताया और इसे “झूठा, भड़काऊ और असत्यापित” बताया। काराकस में जारी आधिकारिक बयान में सरकार ने अमेरिकी पक्ष से मादुरो के “प्रूफ ऑफ लाइफ” यानी उनके जीवित और सुरक्षित होने के प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की है। वेनेजुएला का कहना है कि इस तरह के दावे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश हैं।

धमाकों के बाद बढ़ा तनाव

काराकस में धमाकों की पुष्टि स्थानीय अधिकारियों ने की है, हालांकि हताहतों और नुकसान के सटीक आंकड़ों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियों ने शहर के कई इलाकों में अलर्ट बढ़ा दिया है और संवेदनशील ठिकानों की कड़ी निगरानी की जा रही है।

वेनेजुएला का खंडन

वेनेजुएला के उपराष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि राष्ट्रपति मादुरो देश में ही हैं और सरकार सामान्य रूप से काम कर रही है। अधिकारियों ने ट्रंप के दावे को “राजनीतिक प्रचार” बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें।

अमेरिकी दावे पर सवाल

अमेरिकी प्रशासन की ओर से अभी तक ट्रंप के दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज, तस्वीर या वीडियो जारी नहीं किया गया है। इसी कारण वेनेजुएला ने ‘प्रूफ ऑफ लाइफ’ की मांग को दोहराया है। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि बिना ठोस सबूतों के ऐसे बयान वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

लैटिन अमेरिका के कई देशों और संयुक्त राष्ट्र से जुड़े सूत्रों ने संयम बरतने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की सलाह दी है। कुछ देशों ने काराकस में अपने नागरिकों के लिए यात्रा परामर्श भी जारी किए हैं।

आगे क्या?

स्थिति तेजी से बदल रही है। एक ओर अमेरिका के दावे हैं, तो दूसरी ओर वेनेजुएला का सख्त खंडन। आने वाले घंटों में अगर किसी पक्ष की ओर से ठोस सबूत या आधिकारिक घोषणा सामने आती है, तो क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें काराकस और वॉशिंगटन पर टिकी हुई हैं।

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