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न्यूज रिपोर्ट (डेस्क): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति एक बार फिर दुनिया के सामने है। वेनेजुएला पर सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ाने के बाद अब अमेरिका ने रूस को सीधे तौर पर निशाने पर लेते हुए उत्तरी सागर में रूसी ध्वज वाले एक तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। इस जोखिम भरे अभियान को अमेरिकी सेना ने अंजाम दिया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, जिस तेल टैंकर को जब्त किया गया है, वह रूस से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है और उस पर रूसी झंडा लगा हुआ था। जैसे ही इस कार्रवाई की जानकारी मॉस्को को मिली, रूस ने टैंकर की सुरक्षा के लिए नौसेना तैनात करने की कोशिश की। हालांकि, तमाम कूटनीतिक और सैन्य प्रयासों के बावजूद अमेरिका ने अपने अभियान को पूरा करते हुए टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई केवल एक तेल टैंकर की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे अमेरिका का व्यापक रणनीतिक संदेश छिपा है। ट्रंप प्रशासन पहले ही रूस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है और अब इस तरह की सैन्य कार्रवाई से दोनों देशों के रिश्तों में और कड़वाहट आने की आशंका है।

रूस की ओर से इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया जा सकता है, वहीं अमेरिका इसे अपनी सुरक्षा और वैश्विक हितों से जोड़कर सही ठहराने की कोशिश करेगा। जानकारों के अनुसार, अगर इस मामले पर दोनों देशों के बीच टकराव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि रूस इस कार्रवाई का जवाब किस तरह देता है और क्या यह घटना अमेरिका-रूस संबंधों को एक नए टकराव की ओर ले जाएगी।

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