वाराणसी। मेरा युवा भारत के तत्वावधान में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय एवं गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सहयोग से आयोजित सात दिवसीय 17वें जनजातीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का तृतीय दिवस शनिवार को गरिमामय, प्रेरणादायी और ऐतिहासिक वातावरण में संपन्न हुआ। काशी की पावन धरती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और युवा सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने शिरकत की। उन्होंने विधिवत दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, और इसी विविधता में हमारी एकता निहित है।
कार्यक्रम के दौरान नारायणपुर, छत्तीसगढ़ से आए प्रतिभागियों ने पारंपरिक जनजातीय सामूहिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। रंग-बिरंगी वेशभूषा, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की लय और ऊर्जा से भरपूर अभिव्यक्ति ने सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। उपस्थित दर्शक इस जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुति से अभिभूत हो उठे।
जिलाधिकारी ने काशी की आध्यात्मिक महिमा और ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए युवाओं को उच्च लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हैं और उन्हें नई दृष्टि, नई दिशा एवं नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने अनुभवों को साझा करने, नई सीख ग्रहण करने तथा समाज के उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
जिला युवा अधिकारी यतेन्द्र सिंह ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का मंच नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है।
कार्यक्रम का संचालन राज्य प्रशिक्षक प्रयागराज के मनोज शर्मा ने प्रभावी ढंग से किया, जबकि संत रविदास नगर के जिला युवा अधिकारी रामगोपाल सिंह चौहान ने भावपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत कर सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर लेखा एवं कार्यक्रम सहायक ललितपुर विकास चौरसिया, भूतपूर्व स्वयंसेवक नन्दकिशोर जी, पूर्व स्वयंसेवक राकेश यादव, सुरेश भावद्वाज जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और भी बढ़ा दिया।
काशी की पावन धरती पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक उत्सव भर नहीं, बल्कि युवाओं के बीच संवाद, समझ और राष्ट्रीय एकात्मता की भावना को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।