मुंबई, 05 जून: 250 से अधिक हिंदी और 50 से अधिक मराठी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाने वाली और कई शीर्ष सितारों की ‘मां’ रहीं दिग्गज अभिनेत्री सुलोचना लतकर का रविवार को यहां निधन हो गया। वह 94 वर्ष की थीं। बॉलीवुड सूत्रों ने बताया कि उन्होंने रविवार शाम यहां के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली।

सुलोचना फिल्म उद्योग में लोकप्रिय थीं और व्यापक भूमिकाओं के लिए विख्यात थीं। वह सहायक भूमिकाओं से लेकर मातृशक्ति का प्रतीक थीं और छह दशकों से भी अधिक समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहीं। मुख्य नायिका के रूप में उनके कुछ यादगार शुरुआती मराठी फिल्में थीं : ‘ससुरवास’, ‘वाहिनीच्या बंगद्य’, ‘मीत भाकर’, ‘संगत्ये आइका’, ‘शक्ति जौ’ और कई अन्य।

30 जुलाई, 1928 को बेलगावी (अब कर्नाटक में) के खडाकलत गांव में जन्मीं सुलोचना ने 1946 में अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत की। उनकी शीर्ष बॉलीवुड फिल्मों में बिमल रॉय की क्लासिक ‘बंदिनी’ (1963) थी, जिसे आज भी याद किया जाता है।

जिन अन्य हिंदी फिल्मों में उन्होंने अभिनय किया उनमें ‘जब प्यार किसी से होता है’, ‘दुनिया’, ‘अमीर गरीब’, ‘बहारों के सपने’, ‘कटी पतंग’, ‘मेरे जीवन साथी’, ‘प्यार मोहब्बत’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘वारंट’, ‘जोशीला’, ‘डोली’, ‘प्रेम नगर’, ‘आक्रमण’, ‘भोला भला’, ‘त्याग’, ‘आशिक हूं बहारों का’, ‘अधिकार’, ‘नई रोशनी’, ‘आए दिन बहार के’, ‘आई मिलन की बेला’, ‘अब दिल्ली दूर नहीं’, ‘मजबूर’, ‘गोरा और कला’, ‘देवर’, ‘कहानी किस्मत की’, ‘तलाश’ और ‘आजाद’ शामिल हैं।

इन वर्षो में उन्होंने धर्मेद्र, राजेश खन्ना, ऋषि कपूर, अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, राजेंद्र कुमार, संजीव कुमार, नूतन, आशा पारेख, वहीदा रहमान, जीनत अमान, तनुजा, आदि सहित कई सितारों की मां की भूमिका निभाई। सुलोचना को 1999 में पद्मश्री और 2004 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया था। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सर्वोच्च सम्मान ‘महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार’ से सम्मानित किया।

वृद्धावस्था संबंधी दिक्कतों और सांस लेने में तकलीफ के चलते प्रभादेवी निवासी एक परिचित महिला ने वरिष्ठ अभिनेत्री को अस्पताल में भर्ती कराया था और उनकी देखभाल कर रही थीं, जहां रविवार की शाम उन्होंने शांतिपूर्वक अंतिम सांस ली।

Rajnish Pandey
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