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उत्तरप्रदेश/ लखनऊ, 10 मई: अवैध ढंग से नियुक्त किए गए कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन द्वारा पॉवर कारपोरेशन से सभी विद्युत वितरण निगमों का पांच साल का डाटा मांगने से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा है। ध्यान रहे कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने सीमा पर युद्ध की स्थिति को देखते हुए आगामी 14 मई तक कोई आन्दोलन न करने का कल ऐलान किया था और उम्मीद जताई थी कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन भी युद्ध की स्थिति को देखते हुए टकराव टालने हेतु निजीकरण की प्रक्रिया रद्द करेगा। किन्तु कंसल्टेंट द्वारा सभी वितरण निगमों का डाटा मांगने से स्पष्ट हो गया है कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन सभी विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करने जा रहा है। सभी वितरण निगमों का डाटा मांगने का दस्तावेज सामने आने से बिजली कर्मियों में आक्रोश बढ़ गया है।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि अवैध ढंग से नियुक्त किए गए ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन के एसोसिएट डायरेक्टर चन्दन चटर्जी ने मुख्य अभियन्ता रेवेन्यू अफेयर्स यूनिट को ई मेल भेजकर कहा है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के 31 मार्च तक विगत पांच वर्षों का डाटा उपलब्ध कराए।

संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन ने ग्रांट थॉर्टन को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु आर एफ पी डॉक्यूमेंट तैयार करने के लिए अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट नियुक्त किया है। किन्तु नियुक्त किए गए कंसलटेंट द्वारा केवल पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का डाटा मांगने के बजाय सभी विद्युत वितरण निगमों का डाटा मांगा गया है इससे स्पष्ट हो जाता है कि पॉवर कारपोरेशन का निर्णय सभी विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण करने का है। इस बात के उजागर होने से बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

संघर्ष समिति ने कहा कि सीमा पर युद्ध की स्थिति को देखते हुए संघर्ष समिति ने क्रमिक अनशन के समापन के दिन कहा था कि फिलहाल बिजली कर्मी आगामी 14 मई तक कोई आन्दोलन नहीं करेंगे किन्तु ग्रांट थॉर्टन और पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन की सभी वितरण निगमों के निजीकरण की मिली भगत सामने आने से स्थिति बहुत गम्भीर हो गई है।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि झूठा शपथ पत्र देने वाले और फर्जीवाड़ा करने वाले कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की नियुक्ति तत्काल निरस्त कर उसके विरुद्ध एफ आई आर दर्ज की जाय।

संघर्ष समिति ने सभी वितरण निगमों के निजीकरण का दस्तावेज सामने आने के बाद अभियंताओं और कर्मचारियों को निर्देश दिया है कि अवैध ढंग से नियुक्त कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन को कोई भी पत्रावली या डाटा न उपलब्ध कराया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि उम्मीद की जा रही थी कि संघर्ष समिति द्वारा 14 मई तक कोई आन्दोलन न करने के निर्णय के बाद पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन भी निजीकरण की प्रक्रिया रद्द कर कार्य का स्वस्थ वातावरण मनाएगा। किन्तु इसका उल्टा हो रहा है जिसकी तीखी प्रतिक्रिया स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि सीमाओं पर संकट के समय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन स्थिति को बिगड़ने के लिए जिम्मेदार है।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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