नई दिल्ली, 16 अगस्त: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट ने एक बड़े साइबर अपराध गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 18 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) क्रेडिट कार्ड धारकों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। जांच में सामने आया कि गिरोह अब तक 350 से अधिक पीड़ितों से लगभग 2.6 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर चुका है।

दरअसल, दिल्ली पुलिस को द्वारका के काकरोला स्थित कॉल सेंटर के खिलाफ शिकायत मिली थी। जांच में पता चला कि यह गिरोह गुरुग्राम स्थित टेलीपरफॉर्मेंस कॉल सेंटर से चोरी किए गए डेटा का इस्तेमाल करता था। इस कॉल सेंटर में एसबीआई कार्ड प्रोटेक्शन प्लान (सीपीपी) से जुड़ी सेवाएं दी जाती थीं। डेटा में ग्राहकों का नाम, पंजीकृत मोबाइल नंबर और आंशिक कार्ड विवरण शामिल था। गिरोह के सदस्य खुद को एसबीआई कस्टमर केयर अधिकारी बताकर कॉल करते और ओटीपी तथा सीवीवी जैसी संवेदनशील जानकारियां हासिल कर लेते।

गिफ्ट कार्ड के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग

इन क्रेडेंशियल्स से आरोपी EaseMyTrip और WuHu जैसे प्लेटफार्म पर महंगे गिफ्ट कार्ड और घरेलू एयर टिकट खरीदते थे। फिर ये गिफ्ट कार्ड ट्रैवल एजेंटों को थोक में बेच दिए जाते, जिसके बदले में उन्हें नकद या क्रिप्टोकरेंसी मिलती थी। इस तरह गिरोह ने करोड़ों रुपये का हेरफेर किया।

गिरफ्तार आरोपी और उनका रोल

पुलिस ने दिल्ली, जयपुर, मथुरा और गुरुग्राम में छापेमारी कर इस नेटवर्क को ध्वस्त किया।

अंकित राठी, वसीम और विशाल भारद्वाज – सिंडिकेट के सरगना, जो पूरी रणनीति और मनी मैनेजमेंट संभालते थे।

विशेष लाहौरी उर्फ पाजी और दुर्गेश धाकड़ – टेलीपरफॉर्मेंस कॉल सेंटर से डेटा चोरी कराने वाले ब्रोकर्स।

राहुल विश्वकर्मा, पवन बिष्ट, कैलाश पुरोहित उर्फ कबीर, हिमांशु चुघ उर्फ बाबू, रविन सैनी – ग्राहकों से संपर्क कर ओटीपी और सीवीवी निकालने वाले।

अखिलेश लखोटिया और हर्ष चौहान – क्रिप्टो और कैश ट्रांजैक्शन संभालने वाले।

शिवम सहरावत – सिम कार्ड सप्लायर।

पुलिस ने इनके पास से 52 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड और बैंक विवरण की लिस्ट बरामद की है।

पुलिस अधिकारियों का बयान

डीसीपी आईएफएसओ विनीत कुमार ने बताया, “यह एक हाई-प्रोफाइल साइबर सिंडिकेट है, जो लंबे समय से सक्रिय था। कॉल सेंटर कर्मचारियों की मिलीभगत से ग्राहक डेटा लीक किया गया। यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी उपलब्धि है।” एसीपी विजय गहलावत, जिन्होंने टीम का नेतृत्व किया, ने कहा कि गिरोह “संगठित और पेशेवर तरीके से” काम करता था।

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