तेहरान/वॉशिंगटन/यरुशलम। युद्ध की आग के बीच ईरान में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का टकराव चरम पर है और पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता गहरा गई है।
संयुक्त हमले में खामेनेई की मौत
बताया जा रहा है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इसी दौरान राजधानी तेहरान में हुए हमले में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई। इस घटना ने ईरान की राजनीति में भूचाल ला दिया और सर्वोच्च नेतृत्व का पद रिक्त हो गया था।
ईरान के संविधान के तहत नए सुप्रीम लीडर के चयन का अधिकार ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ को है। कई दौर की बैठकों और विचार-विमर्श के बाद मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगाई गई।
IRGC के दबाव की चर्चा
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि मोजतबा को सर्वोच्च नेता बनाए जाने के पीछे Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का अहम दबाव था। ईरान की सैन्य और रणनीतिक नीति में IRGC की भूमिका बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। सूत्रों के अनुसार, मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति में सत्ता का केंद्रीकरण और सख्त नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला तेजी से लिया गया।
हालांकि, आधिकारिक तौर पर असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने इस निर्णय को “देश की स्थिरता और निरंतरता” के लिए आवश्यक बताया है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई, खाड़ी में तनाव
अमेरिका-इजरायल हमले के बाद ईरान ने भी तीखी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र के करीब सात देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा और बढ़ गया है।
तेल आपूर्ति, वैश्विक बाजार और समुद्री व्यापार मार्गों पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और तत्काल युद्धविराम की अपील की है।