ईरान इस समय अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। कभी सीमित आर्थिक असंतोष के रूप में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब खुले तौर पर सरकार बदलने की मांग में तब्दील हो चुके हैं। सड़कों पर उतरते लोग सिर्फ महंगाई और बेरोजगारी का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि पूरे शासन तंत्र पर सवाल उठा रहे हैं।
आर्थिक संकट की जड़ में क्या है?
ईरानी अर्थव्यवस्था लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, युद्ध के दबाव और आंतरिक नीतिगत कमजोरियों से जूझ रही है। हालात तब और बिगड़ गए जब देश की मुद्रा रियाल ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई।
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत करीब 14.2 लाख रियाल तक पहुंच गई, जिसने आम लोगों की क्रय शक्ति लगभग खत्म कर दी।
रियाल की गिरावट का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा—
♦खाने-पीने की चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर होती चली गईं
♦आयात-निर्यात और व्यापार लगभग ठप पड़ गया
♦ छोटे दुकानदार और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए
बाजार बंद, सड़कों पर विरोध
आर्थिक बदहाली के खिलाफ विरोध की शुरुआत कुछ हफ्ते पहले हुई, जब तेहरान के ग्रैंड बाजार और मोबाइल फोन बाजार के दुकानदारों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। दुकानों के शटर गिरते ही यह साफ हो गया कि असंतोष सिर्फ आम जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक वर्ग भी सरकार से नाराज है।
धीरे-धीरे यह आंदोलन बाजारों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गया। कई शहरों में लोग नारे लगाते हुए दिखाई दिए, जिनमें अब महंगाई के साथ-साथ शासन परिवर्तन की मांग भी खुलकर सुनाई देने लगी।
आर्थिक नाराजगी से राजनीतिक चुनौती तकविशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान में यह कोई पहला विरोध प्रदर्शन नहीं है, लेकिन इस बार का फर्क साफ है।
पहले जहां प्रदर्शनकारी वेतन, सब्सिडी और कीमतों में राहत की मांग कर रहे थे, अब नारे सीधे तौर पर सरकारी नीतियों और नेतृत्व को निशाना बना रहे हैं।
युद्ध जैसी परिस्थितियां, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का बोझ और सख्त सरकारी नियंत्रण—इन सबने मिलकर जनता के धैर्य की सीमा तोड़ दी है।
सरकार की सख्ती और बढ़ता तनाव
सरकार ने इन प्रदर्शनों को काबू में करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की खबरें भी सामने आ रही हैं। हालांकि, दमन की नीति ने हालात को शांत करने के बजाय कई जगह और भड़का दिया है।
आगे क्या?
ईरान के लिए यह सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता की बड़ी परीक्षा बन चुका है। अगर महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा संकट पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
फिलहाल, ईरान की सड़कों पर गूंज रहा जनाक्रोश यह संकेत दे रहा है कि देश में हालात सामान्य नहीं हैं—और आने वाले दिन सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।