नई दिल्ली, 15 जनवरी: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस के नये मुख्यालय को धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की नींव पर आधारित सतत समावेशी विकास का प्रतीक बताया और कहा है कि यह भवन हमारे मूल्यों को प्रतिबंधित करती रहेगी।

श्री खरगे तथा श्री गांधी ने बुधवार को नये कांग्रेस मुख्यालय भवन के उद्घाटन के दौरान समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर हमला किया और कहा कि इस संगठन के प्रमुख मोहन भागवत लोकतंत्र और संविधान विरोधी बयान देते हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि इस देश कि बुनियाद सद्भाव शांति और एकता की नींव पर आधारित है तथा उस विचार की संवाहक है जिसे महात्मा बुद्ध, गुरु नानक और भगवान कृष्ण ने प्रतिपादित किया है।

श्री खरगे ने कहा, “कांग्रेस पार्टी का नया मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ लोकतंत्र, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता, समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की नींव पर बनाया गया है। कांग्रेस के 140 साल पुराने गौरवशाली इतिहास का प्रतीक, यहाँ की दीवारें सत्य, अहिंसा, त्याग, संघर्ष और देशभक्ति की महान गाथा बयां करती हैं।”

श्री गांधी ने कहा, “हम अपने नए मुख्यालय का उद्घाटन बहुत ही महत्वपूर्ण समय पर कर रहे हैं। यह बहुत ही प्रतीकात्मक है। यह इमारत कोई साधारण इमारत नहीं है। यह हमारे देश की मिट्टी से निकली है और यह लाखों लोगों की कड़ी मेहनत और बलिदान का परिणाम है। कांग्रेस पार्टी हमेशा विशेष मूल्यों के लिए खड़ी रही है, और हम उन मूल्यों को इस इमारत में प्रतिबिंबित देख सकते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष का फल हमारा संविधान था।”

उन्होंने कहा, “ये इमारत हमारे कार्यकर्ताओं के खून से, हमारे हर एक नेता के खून से बनी है। इसमें आप सभी शामिल हैं जो कांग्रेस पार्टी के विचार का बचाव कर रहे हैं। यहां हर कोई कांग्रेस के विचारों का बचाव करते हुए गंभीर हमले का सामना कर रहा है लेकिन ये लोग भाजपा और आरएसएस के सामने आत्मसमर्पण नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास करने वाले लोग डरते नहीं हैं। उसी तरह से यह इमारत हमारे देश की मिट्टी से, हमारे नेताओं और हमारे कार्यकर्ताओं के खून से निकली है। इस इमारत के पीछे का विचार भी हमारे देश के कोने-कोने तक पहुँचना चाहिए। इस इमारत के अंदर जो विचार हैं, वे हमारे देश के कोने-कोने तमिलनाडु, कश्मीर, पूर्वोत्तर, गुजरात, अंडमान और लक्षद्वीप तक आदि जगह तक पहुंचे। हमारे देश के हर कोने तक इस इमारत से निकले इस विचार का प्रचार-प्रसार होना चाहिए।”

आरएसएस पर हमला करते हुए उन्होंने कहा, “आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कल कहा कि भारत को 1947 में सच्ची आजादी नहीं मिली, बल्कि राम मंदिर के निर्माण के समय मिली। उन्होंने कहा था कि संविधान हमारी स्वतंत्रता का प्रतीक नहीं है। हमारी विचारधारा आरएसएस की विचारधारा की तरह कल नहीं आई, बल्कि हजारों साल पुरानी है और तब से आरएसएस की विचारधारा से लड़ती आ रही है। हमारे अपने प्रतीक हैं। हमारे पास शिव हैं, हमारे पास बुद्ध हैं, हमारे पास गुरु नानक हैं, हमारे पास कबीर हैं और हमारे पास महात्मा गांधी हैं। ये सभी प्रतीक हैं जिन्होंने देश को सही रास्ता दिखाया है। सवाल है कि क्या गुरु नानक, बुद्ध, भगवान कृष्ण आरएसएस की विचारधारा से थे। इनमें एक भी नहीं है क्योंकि इनमें से हर एक ने समानता और भाईचारे के लिए लड़ाई लड़ी।”

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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