वॉशिंगटन, 13 दिसंबर: भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को लेकर विरोध तेज हो गया है। अमेरिकी संसद में तीन सांसदों ने एक प्रस्ताव पेश कर भारत पर लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ को हटाने की मांग की है। सांसदों का कहना है कि यह फैसला न केवल भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं और उद्योगों पर भी अतिरिक्त बोझ डाल रहा है।
प्रस्ताव पेश करने वाले सांसदों ने तर्क दिया कि भारत अमेरिका का एक प्रमुख रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। ऐसे में उस पर अत्यधिक टैरिफ लगाना दीर्घकालिक हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है और कई अमेरिकी कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि टैरिफ नीति का सीधा असर आम अमेरिकी नागरिकों पर पड़ रहा है, क्योंकि आयातित वस्तुएं महंगी हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इसका असर रोजगार और बाजार की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।
उधर, राजनीतिक गलियारों में इस प्रस्ताव को ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति के खिलाफ बढ़ती असहमति के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ को लेकर अमेरिका के भीतर यह विरोध आने वाले समय में और तेज हो सकता है।