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छपरा, 27 फरवरी। सारण की समृद्ध सभ्यता और संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा लोक परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से ‘सारण्य महोत्सव’ के बैनर तले एस.डी.एस. पब्लिक स्कूल परिसर में भव्य होलिकोत्सव का आयोजन किया गया। रंग, अबीर और लोकधुनों से सराबोर इस सांस्कृतिक उत्सव में भोजपुरी अस्मिता, देशभक्ति और पारंपरिक फाग गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने वातावरण को पूरी तरह होलीमय बना दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्ति वाचन, भोजपुरी संस्कार गीत और ‘बटोहिया’ गीत से हुआ। दीप प्रज्वलन कर समारोह का विधिवत उद्घाटन मेयर लक्ष्मी नारायण गुप्ता, सारण्य महोत्सव के संरक्षक एवं पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार सिंह, डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ. हरेंद्र सिंह, अध्यक्ष चंद्र प्रकाश राज और महासचिव श्याम बिहारी अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया।

समारोह की शुरुआत ‘गाई के गोबर महादेव’ संस्कार गीत से हुई, जिसने लोकपरंपरा की सुगंध बिखेर दी। इसके बाद भोजपुरी के राष्ट्रीय गीत ‘सुंदर सुभूमि भइया भारत के देशवा हो’ की प्रस्तुति ने श्रोताओं में देशभक्ति का जोश भर दिया।

सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय कलाकारों—सृष्टि पाण्डेय, शुभम कुमार, रवि कुमार, मनोज कुमार और प्रमोद कुमार सिंह—ने एक से बढ़कर एक होली गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। ‘बाबू कुंवर सिंह तेगवा बहादुर बंगला में उड़ेला गुलाल’ जैसे वीर रस से ओतप्रोत गीत से लेकर ‘होली खेले रघुवीरा अवध में’, ‘रंग बरसे भींगे चुनर वाली’, ‘पनिया लाले लाल ऐ गौरा हमरो के चाही’, ‘होली के जोगीरा’, ‘आज बिरज में होली रे रसिया’, ‘रंग ले के खेलते राधा संग नंदलाल’, ‘होली के दिन दिल खिल जाते हैं’ और ‘बलम पिचकारी’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर पूरा परिसर तालियों और ठुमकों से गूंज उठा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्र प्रकाश राज ने की, जबकि संचालन महासचिव श्याम बिहारी अग्रवाल और संजय भारद्वाज ने संयुक्त रूप से किया। अतिथियों का स्वागत पूर्व प्राचार्य अरुण कुमार सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राकेश कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।

होलिकोत्सव के अवसर पर सभी आगत अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। आयोजन की सफलता में डॉ. देवेश कुमार सिंह, सुभाष ओझा, सीए अमित कुमार, जितेन्द्र सिंह, डॉ. सम्पूर्णानंद सिंह, प्रियेश रंजन सिंह, रामनाथ राय सहित कई गणमान्य व्यक्तियों का सराहनीय सहयोग रहा।

उल्लेखनीय है कि इस आयोजन के माध्यम से सारण्य महोत्सव ने न केवल होली के पारंपरिक रंगों को जीवंत किया, बल्कि स्थानीय कला, संस्कृति और भोजपुरी भाषा के संरक्षण का भी सशक्त संदेश दिया।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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