- लखनऊ। उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बड़ा राजनीतिक फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी इस बार किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। बसपा प्रदेश में अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी और पूर्ण बहुमत हासिल करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेगी।
लखनऊ से जारी आधिकारिक प्रेस बयान में मायावती ने कहा कि पिछले चुनावी अनुभवों से यह स्पष्ट हुआ है कि गठबंधन से पार्टी को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, बल्कि कई बार संगठनात्मक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा, “बसपा का जनाधार मजबूत है और पार्टी अपने दम पर सत्ता में आने की क्षमता रखती है। इसलिए इस बार किसी भी तरह के गठबंधन से दूर रहकर अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया गया है।”
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि गठबंधन की राजनीति में पार्टी की विचारधारा और संगठनात्मक ताकत प्रभावित होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर बहुजन समाज की आवाज को मजबूती दें, ताकि पार्टी पूर्ण बहुमत के लक्ष्य को हासिल कर सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा का यह फैसला प्रदेश की चुनावी रणनीति को नया मोड़ दे सकता है। अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा से अन्य दलों की रणनीतियों पर भी असर पड़ने की संभावना है।
मायावती ने अपने बयान में यह भी कहा कि पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक एवं फर्जी दावे फैलाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के मैसेज और पोस्ट पूरी तरह गलत हैं और पार्टी का उनसे कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अफवाहों और फर्जी खबरों से सतर्क रहें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। मायावती ने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से तैयार की गई फर्जी बयानबाजी को पार्टी गंभीरता से ले रही है और ऐसे मामलों की निगरानी की जा रही है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक एकता पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे गांव-गांव और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें तथा पार्टी की नीतियों और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं।
आगामी चुनावों के मद्देनजर बसपा का यह ऐलान प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति बसपा को कितना राजनीतिक लाभ पहुंचाती है।