मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय लेते हुए शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में मुस्लिम समुदाय को दिए जा रहे 5 प्रतिशत आरक्षण को समाप्त कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने इस संबंध में नया सरकारी आदेश (जीआर) जारी कर निर्णय को औपचारिक रूप दे दिया है। इसके साथ ही सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग (SEBC) श्रेणी के अंतर्गत मुस्लिम समुदाय को मिलने वाले लाभ अब प्रभावी नहीं रहेंगे।
कानूनी और प्रक्रियात्मक आधार पर लिया गया निर्णय
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह कदम कानूनी एवं प्रक्रियात्मक कारणों से उठाया गया है। वर्ष 2014 में जारी अध्यादेश के माध्यम से मुस्लिम समुदाय के कुछ सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान किया गया था। हालांकि बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकारी नौकरियों में इस आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अधिकारियों ने बताया कि उक्त अध्यादेश को निर्धारित समय सीमा के भीतर विधेयक के रूप में पारित नहीं कराया जा सका, जिसके कारण वह स्वतः निरस्त हो गया। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने अब नया आदेश जारी कर पूर्व व्यवस्था को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
SEBC ढांचे में बनाई गई थी SBC-A श्रेणी
पूर्व व्यवस्था के तहत राज्य सरकार ने SEBC ढांचे के अंतर्गत “स्पेशल बैकवर्ड कैटेगरी-ए (SBC-A)” का गठन किया था। इस श्रेणी के माध्यम से आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्गों को सरकारी एवं अर्धसरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती तथा शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के दौरान 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता था।
नए आदेश के बाद इस श्रेणी के अंतर्गत मिलने वाले सभी लाभ तत्काल प्रभाव से समाप्त हो गए हैं।
प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी रुकी
सरकारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम आवेदकों को SEBC श्रेणी के अंतर्गत जारी किए जाने वाले जाति प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र की प्रक्रिया भी रोक दी गई है। संबंधित विभागों को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं।