पूर्वी चंपारण (बिहार)। बिहार ने एक बार फिर धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर अपनी वैश्विक पहचान दर्ज कराई है। पूर्वी चंपारण जिले में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर परिसर में 17 जनवरी को दुनिया का सबसे बड़ा 33 फीट ऊंचा अखंड शिवलिंग ‘सहस्त्रलिंगम’ विधि-विधान के साथ स्थापित किया गया। इस ऐतिहासिक स्थापना के साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

इस विशेष रिपोर्ट में पढ़िए—यह शिवलिंग क्या है, इसे कहां और क्यों स्थापित किया गया, इसकी विशेषताएं क्या हैं और इससे जुड़े सभी अहम सवालों के जवाब।

 क्या है ‘सहस्त्रलिंगम’?

‘सहस्त्रलिंगम’ का अर्थ है—हजारों शिवलिंगों से युक्त एक विशाल शिवलिंग। इस अखंड शिवलिंग की सतह पर भगवान शिव के हजारों सूक्ष्म स्वरूप अंकित हैं, जो इसे अद्वितीय बनाते हैं। यह शिवलिंग एक ही पत्थर से तराशा गया है, इसलिए इसे ‘अखंड’ कहा जा रहा है।

कहां स्थापित हुआ है यह शिवलिंग?

यह शिवलिंग बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित किया गया है। यह वही स्थल है, जहां भविष्य में दुनिया का सबसे बड़ा रामायण मंदिर निर्माणाधीन है।

शिवलिंग की ऊंचाई और विशेषताएं क्या हैं?

* ऊंचाई: 33 फीट

* स्वरूप: अखंड (एक ही पत्थर से निर्मित)

* डिजाइन: शिवलिंग पर हजारों छोटे शिवलिंगों की नक्काशी

* पहचान: दुनिया का सबसे ऊंचा अखंड शिवलिंग

धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार, 33 फीट की ऊंचाई भगवान शिव के 33 कोटि देवताओं से जुड़े आध्यात्मिक प्रतीक को भी दर्शाती है।

स्थापना कब और कैसे हुई?

17 जनवरी को वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के बीच शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में साधु-संत, धार्मिक विद्वान और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?

यह शिवलिंग न केवल आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि—

* बिहार को वैश्विक धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर मजबूत स्थान दिलाएगा

* विराट रामायण मंदिर परियोजना को नई पहचान देगा

* रोजगार और स्थानीय विकास को बढ़ावा देगा

धार्मिक मान्यता है कि सहस्त्रलिंगम के दर्शन से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

क्या यह आम श्रद्धालुओं के लिए खुला है?

जी हां, शिवलिंग स्थापना के बाद अब श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन कर सकते हैं। आने वाले समय में यहां विशेष पर्वों पर भव्य आयोजन और शिवरात्रि जैसे महापर्वों पर विशाल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

बिहार के लिए क्यों है यह ऐतिहासिक?

अब तक बिहार को बौद्ध और जैन तीर्थों के लिए जाना जाता था, लेकिन सहस्त्रलिंगम की स्थापना के बाद यह राज्य शैव परंपरा के प्रमुख केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। यह उपलब्धि न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक गर्व का विषय भी है।

पूर्वी चंपारण में स्थापित ‘सहस्त्रलिंगम’ न सिर्फ एक धार्मिक संरचना है, बल्कि यह बिहार की आध्यात्मिक विरासत, शिल्पकला और आस्था का भव्य प्रतीक बनकर उभरा है। आने वाले वर्षों में यह स्थल देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के शिवभक्तों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनने की पूरी संभावना रखता है।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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