किश्तवाड़ | विशेष रिपोर्ट: किश्तवाड़ के दुर्गम जंगलों में सुरक्षा बलों को मिला आतंकी बंकर केवल एक ठिकाना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आतंकी नेटवर्क की परतें खोलने वाला सबूत है। समुद्र तल से लगभग 12,000 फीट की ऊँचाई, चारों ओर बर्फ़ीली हवाएं और महीनों तक दुर्गम रहने वाला इलाका—इन हालातों में आतंकियों का टिके रहना अपने आप में एक बड़ा सवाल है।

बंकर से जो सामान मिला है, उसमें शामिल हैं:

* मैगी और इंस्टेंट फूड

* बासमती चावल, दालें, मसाले

* गैस सिलेंडर, बर्तन

* थर्मल कपड़े, कंबल और सर्दियों का सामान

विशेषज्ञों के अनुसार, यह राशन कुछ दिनों का नहीं, बल्कि महीनों तक चलने वाला है। इससे साफ है कि आतंकी किसी अस्थायी मिशन पर नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए इलाके में जमे रहने की रणनीति पर काम कर रहे थे।

सप्लाई लाइन बिना मदद के नामुमकिन

इतनी ऊँचाई पर न तो दुकान है, न सड़क और न ही आम लोगों की आवाजाही। ऐसे में सवाल उठता है—

यह राशन आखिर पहुंचा कैसे?

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसके पीछे:

* स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW)

* जंगल और पहाड़ी रास्तों की जानकारी रखने वाले मददगार

* सीमापार बैठे हैंडलरों के निर्देश हो सकते हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि राशन किश्तवाड़ के निचले इलाकों से चरणबद्ध तरीके से ऊपर पहुंचाया गया।

बंकर में सर्दियों के पूरे इंतज़ाम यह संकेत देते हैं कि आतंकी बर्फबारी के दौरान भी ऑपरेशन जारी रखने की योजना बना रहे थे। आमतौर पर इस मौसम में आतंकी गतिविधियां धीमी पड़ जाती हैं, लेकिन इस बंकर ने उस धारणा को चुनौती दी है।

जंगल भले ही शांत दिखते हों, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक: “यह बंकर बताता है कि आतंकी अब ऊँचाई वाले इलाकों में लंबे समय तक छिपकर रहने की रणनीति अपना रहे हैं।” ड्रोन सर्विलांस, मोबाइल डेटा एनालिसिस और स्थानीय पूछताछ के जरिए अब मददगारों की पहचान की जा रही है। इस ऑपरेशन के बाद फोकस सिर्फ आतंकियों पर नहीं, बल्कि:

* राशन पहुंचाने वाले

* सूचना देने वाले

* शरण देने वाले

पूरे नेटवर्क को तोड़ने पर है। एजेंसियों का मानना है कि जब तक सप्लाई लाइन खत्म नहीं होगी, तब तक आतंकी ठिकाने दोबारा बनते रहेंगे।

Rajnish Pandey
A media professional with experience in print and digital journalism, handling news editing and content management with a focus on accuracy and responsible reporting.

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