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दिल्ली हाई कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली, 14 मई: दिल्ली आबकारी घोटाला मामले में पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत पर दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान जमानत की मांग करते हुए दलील दी गई कि अभी भी इस मामले में ईडी और सीबीआई की जांच जारी है। वरिष्ठ वकील दायन कृष्णन ने कहा कि इस मामले में अभी भी गिरफ्तारी जारी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सिसोदिया की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। मामले में ईडी और सीबीआई ने भी कोर्ट में अपनी दलीलें रखीं।

सुनवाई के दौरान दायन कृष्णन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया और कहा कि सीबीआई ने इस मामले में एक मुख्य चार्जशीट और दो पूरक चार्जशीट दाखिल की है। वहीं ईडी ने एक मुख्य और छह पूरक चार्जशीट दाखिल की है। दोनों मामलों में अभी जांच जारी है। इस मामले में अभी गिरफ्तारी भी जारी है। सबसे ताजा गिरफ्तारी 3 मई को की गई है।

दायन कृष्णन ने कहा कि एक आरोपी के खिलाफ तो अभी आरोप भी तय नहीं किए गए हैं। ट्रायल कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान इस पहलू पर गौर नहीं किया। उन्होंने कहा कि क्या अभियोजन पक्ष ने ट्रायल पूरा करने की कोशिश की है। इसका जवाब है कि नहीं। ट्रायल कोर्ट में आरोपी की कोशिशों पर ही कुछ कार्यवाही आगे बढ़ी है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने जल्द सुनवाई के लिए दो बार याचिका लगाई, ऐसे में ये कहना गलत होगा कि आरोपियों की ओर से ट्रायल में देरी की जा रही है। हकीकत ये है कि ट्रायल शुरु करने की दिशा में शून्य काम हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक मनीष सिसोदिया को जमानत दी जानी चाहिए।

बता दें कि 30 अप्रैल को राउज एवेन्यु कोर्ट ने सीबीआई और ईडी की ओर से दर्ज केस में सिसोदिया की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था। इसी आदेश को सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी ने सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि प्रॉफिट मार्जिन को सात फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने को सही ठहराने को लेकर कोई बैठक या चर्चा नहीं की गई। ये नीति कुछ थोक विक्रेताओं के पक्ष में थी।

सुनवाई के दौरान ईडी ने कहा था कि सिसोदिया के वकील सिर्फ ट्रायल में देरी को लेकर जमानत के लिए दबाव बना रहे हैं। उसके लिए उनको हलफनामा दाखिल करना चाहिए, क्योंकि इस मामले मे बड़ी संख्या में अलग-अलग अर्जियां दाखिल की गई थी। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि मुकदमा धीमी गति से चल रहा है। ईडी ने कहा कि प्रॉफिट मार्जिन को सात फीसदी बढ़ाकर 12 फीसदी करने को सही ठहराने को लेकर कोई बैठक या चर्चा नहीं हुई। इनका तर्क है कि पहले भी बैठक और चर्चा नहीं हुई थी अब भी नहीं है, इसलिए हमने भी ऐसा किया है। तीन दिनों के भीतर, बिना किसी बैठक या चर्चा के 12 प्रतिशत का प्रॉफिट मार्जिन पेश किया गया।

ईडी ने कहा कि अपराध की गंभीरता बेहद गंभीर है क्योंकि एक नीति बनाई गई जो कुछ थोक विक्रेताओं के पक्ष में थी। पॉलिसी वापस लेने का एकमात्र वजह जांच थी और शराब की नई नीति मतलब अवैध लाभ प्राप्त करने का एक जरिया। ईडी ने कहा था कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में कहा गया था कि थोक कारोबार का हिस्सा सरकार को दिया जाए, इस बात पर कोई चर्चा नहीं की गई और थोक कारोबार निजी कंपनियों को क्यों दे दिया गया। ईडी ने कहा था कि साउथ ग्रुप के साथ ओबेरॉय होटल में मीटिंग हुई थी। जहां सभी सह-आरोपी मीटिंग में उपस्थित थे। उनमें से कुछ अब सरकारी गवाह बन गए हैं। इस मामले के सह-आरोपी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को जमानत दी थी। उसके पहले सुप्रीम कोर्ट आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को जमानत दे चुका है।

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