नई दिल्ली: दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ने आज एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया, जब रामलीला ग्राउंड से राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन और दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने राजधानी को एक साथ 500 नई इलेक्ट्रिक बसें समर्पित कीं। यह दिल्ली के इतिहास में पहली बार हुआ है जब इतनी बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों को एक साथ परिवहन बेड़े में शामिल किया गया।
बीते एक वर्ष के दौरान दिल्ली सरकार ने डीटीसी (दिल्ली परिवहन निगम) के बेड़े को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए हैं। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि नई इलेक्ट्रिक बसों के जुड़ने के साथ ही दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या 4000 के आंकड़े को पार कर गई है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक डीटीसी की सभी बसों को पूर्णतः इलेक्ट्रिक बनाया जाए, जिस दिशा में तेज़ी से काम चल रहा है।
इन नई EV बसों से न केवल राजधानी की यातायात व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर भी यह एक निर्णायक पहल साबित होगी। इलेक्ट्रिक बसें शून्य उत्सर्जन पर आधारित हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार, ध्वनि प्रदूषण में कमी और ईंधन पर निर्भरता घटेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिल्ली को स्वच्छ हवा और हरित भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दिल्ली–पानीपत के बीच इलेक्ट्रिक अंतरराज्यीय बस सेवा का भी शुभारंभ किया गया। इस नई सेवा से दिल्ली और हरियाणा के हजारों यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और सुविधाजनक यात्रा विकल्प मिलेगा। यह पहल अंतरराज्यीय परिवहन में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देगी।
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार, स्मार्ट डिपो और आधुनिक तकनीक के ज़रिये दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को देश के लिए हरित मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। 500 नई इलेक्ट्रिक बसों की यह सौगात न सिर्फ आज की जरूरत है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और टिकाऊ दिल्ली की मजबूत नींव भी है।